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ड्राइंग रूम का वास्तु: बैठक की दिशा, सोफ़ा और टीवी कहाँ रखें

ड्राइंग रूम का वास्तु सरल भाषा में: बैठक किस दिशा में हो, मेज़बान का मुँह किधर रहे, सोफ़ा और टीवी कहाँ रखें, ईशान कोना खुला क्यों, और फ़ोटो कहाँ।

  • सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम
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इस लेख में

वास्तु के अनुसार ड्राइंग रूम यानी बैठक घर के उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में सबसे अच्छी रहती है, और भारी फ़र्नीचर दक्षिण और पश्चिम की दीवारों पर हो ताकि मेज़बान का मुँह उत्तर या पूर्व की ओर रहे। कमरे का ईशान कोना हल्का और खुला रखा जाता है, और टीवी आग्नेय हिस्से में।

यह वह कमरा है जहाँ परिवार लोगों का स्वागत करता है, इसलिए परंपरा का उद्देश्य सीधा है: खुला, उजला, अपनापन भरा कमरा, जिसका भार पीछे की ओर रहे। इस लेख में दिशा, बैठने की व्यवस्था, टीवी, रोशनी और पौधे, फ़ोटो, और बैठक किसी दूसरी दिशा में हो तो क्या करें, यह सब है। पूरे घर में दिशाएँ कैसे काम करती हैं, यह घर का वास्तु शास्त्र में देखिए।

बैठक किस दिशा में हो

शास्त्रीय ग्रंथों के वास्तु पुरुष मंडल में उत्तर और पूर्व भूखंड का हल्का, खुला हिस्सा है, और दक्षिण और पश्चिम भारी, बंद हिस्सा। लोगों से मिलने का कमरा खुले हिस्से में होना चाहिए।

बैठक की दिशापरंपरा का मत
उत्तरउत्तम; कुबेर और अवसरों से जोड़ी जाती है
पूर्वउत्तम; सुबह की रोशनी, सूर्य की दिशा
ईशान (उत्तर-पूर्व)उत्तम, बशर्ते कमरा हल्का और साफ़ रहे
वायव्य (उत्तर-पश्चिम)स्वीकार्य; आवाजाही और मेहमानों से जुड़ी
दक्षिण या पश्चिमभारी फ़र्नीचर और अच्छी रोशनी के साथ ठीक
नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम)आम तौर पर मास्टर बेडरूम के लिए रखा जाता है

ज़्यादातर घरों में बैठक मुख्य द्वार के पास होती है, इसलिए दोनों को साथ देखा जाता है। मुख्य द्वार की बात हमारे मुख्य द्वार के वास्तु वाले लेख में है।

कौन किधर मुँह करके बैठे

परंपरा का नियम मेज़बान के बारे में है। मुख्य सोफ़ा या घर के मुखिया की कुर्सी दक्षिण या पश्चिम की दीवार से लगाइए, ताकि वहाँ बैठने वाले का मुँह उत्तर या पूर्व की ओर रहे। मेहमान फिर पूर्व या उत्तर की ओर बैठकर मेज़बान के सामने होंगे।

तर्क वही है जो पूरे वास्तु में चलता है: कमरे का भारी, स्थिर हिस्सा दक्षिण और पश्चिम है, और मुँह उत्तर या पूर्व की ओर, जो प्रकाश और वृद्धि की दिशाएँ हैं। आज के कमरे में इसका मतलब आम तौर पर यह होता है:

  • मुख्य सोफ़ा दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर।
  • बगल की कुर्सियाँ या छोटा सोफ़ा उत्तर या पूर्व की ओर।
  • कमरे का बीच खुला, भारी फ़र्नीचर के बजाय नीची सेंटर टेबल।
  • ईशान कोने में कुछ भारी नहीं। ऊँची किताबों की अलमारी या भारी कैबिनेट नहीं।

भारी सामान दक्षिण और पश्चिम में

अलमारियाँ, शोकेस, किताबों की रैक, भारी लकड़ी का दीवान और पत्थर की बड़ी चीज़ें दक्षिण और पश्चिम की दीवारों पर रखी जाती हैं। उत्तर और पूर्व की दीवारों पर हल्की चीज़ें: खिड़की, हल्की शेल्फ़, पौधे। अगर कमरे को तराज़ू की तरह सोचें, तो परंपरा चाहती है कि उसका झुकाव दक्षिण-पश्चिम की ओर हो।

टीवी और बिजली के उपकरण

टीवी कमरे के आग्नेय हिस्से में, यानी अग्नि के कोने में, क्योंकि बिजली और गर्मी वाली चीज़ें अग्नि से जोड़ी जाती हैं। स्पीकर, राउटर और सेट-टॉप बॉक्स भी वहीं रह सकते हैं। टीवी देखते समय आपका मुँह किधर है, इसकी चिंता न करें; मेज़बान वाला नियम मुख्य आसन के लिए है, टीवी देखने के हर पल के लिए नहीं। जहाँ तक हो सके ईशान कोने में तार और उपकरण न हों।

ईशान कोना हल्का रखें

बैठक का अगर एक ही नियम याद रखना हो, तो यही रखिए। कमरे का ईशान कोना हल्का, साफ़ और खुला रहे। खिड़की, छोटा पौधा, पानी का कलश, या बस ख़ाली कोना, सब परंपरा के अनुरूप हैं। जिन घरों में अलग पूजा घर नहीं होता, वहाँ बहुत से परिवार यहीं छोटा सा पूजा स्थान बना लेते हैं।

रोशनी और पौधे

  • रोशनी: कमरा उजला और एक-सी रोशनी वाला हो। आग्नेय कोना लैंप के लिए ठीक है, क्योंकि वह अग्नि का कोना है। कहीं भी अँधेरा कोना हो तो एक लैंप लगा दीजिए; इतने से ही कमरा बेहतर लगने लगता है।
  • पौधे: उत्तर या पूर्व की ओर हरे-भरे पौधे आम सुझाव हैं। तुलसी परंपरा में उत्तर, पूर्व या ईशान में रखी जाती है, अक्सर आँगन या बालकनी में। गुलाब को छोड़कर काँटेदार पौधे और बोनसाई परंपरा में बैठक से बाहर रखे जाते हैं। सूखे या मुरझाए पौधे हटा दिए जाते हैं।

परिवार की फ़ोटो और चित्र

पारिवारिक फ़ोटो दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर लगाइए। दिवंगत बड़ों की फ़ोटो परंपरा में दक्षिण या नैऋत्य की दीवार पर लगाई जाती है, ईशान में नहीं और शयनकक्ष में भी नहीं। बाक़ी दीवारों के लिए सुखद चित्र सुझाए जाते हैं: प्राकृतिक दृश्य, फूल, उगता सूरज, साथ बैठा परिवार। युद्ध, हिंसा, रोते हुए लोग या हमला करते जंगली जानवरों के चित्र परंपरा में टाले जाते हैं।

रंग

बैठक के लिए हल्के, गर्म रंग ठीक हैं: क्रीम, ऑफ़-व्हाइट, हल्का पीला, बेज, हल्का हरा। दिशा के हिसाब से रंगों के लिए घर के लिए वास्तु रंग देखिए।

अगर बैठक दक्षिण या पश्चिम में हो

यह बहुत आम है, ख़ासकर फ़्लैट में, और इसके लिए तोड़फोड़ की ज़रूरत नहीं। कमरे के भीतर के नियम लगाइए: भारी फ़र्नीचर कमरे की दक्षिण और पश्चिम दीवारों पर, मेज़बान का मुँह उत्तर या पूर्व की ओर, कमरे का ईशान कोना हल्का, और पूरे कमरे में अच्छी रोशनी। निर्माण से जुड़े बदलाव के लिए आर्किटेक्ट या इंजीनियर से बात कीजिए; यहाँ वास्तु का अर्थ विन्यास और उपयोग है।

कुछ भ्रांतियाँ

  • "दक्षिण की बैठक से घाटा होता है।" कोई शास्त्रीय ग्रंथ किसी एक कमरे की दिशा से कोई निश्चित नुक़सान नहीं बताता। दक्षिण और पश्चिम के कमरे बस अलग तरीक़े से सजाए जाते हैं।
  • "लाफ़िंग बुद्धा, क्रिस्टल या वास्तु कछुआ रखना ही होगा।" ये शास्त्रीय वास्तु ग्रंथों में नहीं हैं। हम कोई वास्तु उत्पाद नहीं बेचते, और डर से किसी को पैसा नहीं ख़र्चना चाहिए।
  • "बैठक में शीशा हमेशा ग़लत है।" उत्तर या पूर्व की दीवार पर शीशा परंपरा में ठीक है। टाला केवल वह शीशा जाता है जो ठीक मुख्य द्वार के सामने हो।

गृह प्रवेश

नया घर बसा रहे हों तो बहुत से परिवार चुनी हुई तिथि पर गृह प्रवेश करते हैं। हमारे मुहूर्त पेज पर गृह प्रवेश का विकल्प है, और पंचांग आपके शहर की तिथि और नक्षत्र दिखाता है, जैसे जयपुर का पंचांग।

ख़ुद देखें

फ़ोन के कंपास से देखिए कि मुख्य सोफ़ा कहाँ है और उस पर बैठकर आपका मुँह किधर होता है, ईशान कोने में क्या रखा है, और टीवी कहाँ है। पूरे घर को एक साथ पढ़वाना हो तो हमारा ऑनलाइन वास्तु परामर्श एक AI रीडिंग है: कमरों की दिशाएँ बताइए, चाहें तो नक़्शा जोड़िए, और मॉडल उन्हें शास्त्रीय नियमों से मिलाकर तीन ऐसे उपाय सुझाएगा जो किराए के घर में भी हो सकें। यह कोई पंडित या साइट विज़िट नहीं है; हम कैसे काम करते हैं, यह हमारे बारे में पेज पर है। इसके बाद आम तौर पर रसोई और मास्टर बेडरूम देखे जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वास्तु के अनुसार ड्राइंग रूम किस दिशा में हो?

घर के उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में। ये हल्की और खुली दिशाएँ हैं, जो लोगों के स्वागत वाले कमरे के लिए ठीक बैठती हैं। वायव्य में बैठक भी आम है और स्वीकार्य है।

सोफ़ा किस दिशा में रखें?

मुख्य सोफ़ा दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर रखें, ताकि घर के मुखिया या मेज़बान का मुँह उत्तर या पूर्व की ओर रहे। मेहमान बाक़ी तरफ़ बैठ सकते हैं।

ड्राइंग रूम में टीवी कहाँ हो?

कमरे का आग्नेय हिस्सा यानी दक्षिण-पूर्व, क्योंकि बिजली की चीज़ें अग्नि के कोने से जुड़ी मानी जाती हैं। यह संभव न हो तो कम से कम ईशान कोने में टीवी न रखें।

पूर्वजों की फ़ोटो किस दिशा में लगाएँ?

परंपरा में दिवंगत बड़ों की फ़ोटो बैठक की दक्षिण या नैऋत्य दीवार पर लगाई जाती है, ईशान में नहीं और शयनकक्ष में भी नहीं। बाक़ी पारिवारिक फ़ोटो दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर ठीक हैं।

स्वयं आज़माएँ

स्रोत

  • मयमतम् और मानसार (दिशा के अनुसार कक्षों की स्थिति; उत्तर और पूर्व खुले रखना)
  • विश्वकर्मा प्रकाश (भवन के कक्ष और उनकी दिशाएँ)
  • बृहत् संहिता का वास्तु अध्याय (वास्तु पुरुष मंडल और दिशाओं के देवता)

यह लेख सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम ने लिखा है। तिथियाँ और अंश हमारे अपने इंजन से (लाहिड़ी अयनांश)। ज्योतिष विचार के लिए मार्गदर्शन है — चिकित्सकीय, विधिक या वित्तीय सलाह नहीं। हमारी पद्धति

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