त्योहार और व्रत · निःशुल्क
हिंदू त्योहार कैलेंडर 2026
हर तिथि शास्त्रीय नियम से गणना की गई — चांद्र मास, तिथि, और वह काल जिसमें तिथि होनी चाहिए (सूर्योदय, मध्याह्न, प्रदोष, निशीथ)। समय नई दिल्ली के लिए।
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2026 के व्रत, एक जगह
- एकादशीहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि एकादशी हिंदू पंचांग का सबसे अधिक रखा जाने वाला व्रत है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है और महीने में दो बार आता है।
- पूर्णिमाशुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा पर व्रत, सत्यनारायण कथा और चंद्रमा की पूजा की परंपरा है।
- अमावस्याकृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या पितरों के स्मरण, स्नान, दान और प्रार्थना का शांत दिन है।
- प्रदोष व्रतप्रदोष व्रत भगवान शिव के लिए महीने में दो बार त्रयोदशी को रखा जाता है, और इसकी पूजा सूर्यास्त के बाद संध्या में होती है।
- संकष्टी चतुर्थीसंकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि पर रखा जाने वाला गणेश जी का मासिक व्रत है, जो चाँद निकलने के बाद ही खोला जाता है।
ये तिथियाँ कैसे निकलती हैं
हिंदू त्योहार चांद्र तिथि पर चलते हैं, अंग्रेज़ी तारीख़ पर नहीं। तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12° का अंतर है, इसलिए एक तिथि 19 से 27 घंटे तक की होती है और दिन के बीच में बदल सकती है। इसीलिए हर त्योहार का एक नियम है कि तिथि दिन के किस भाग में होनी चाहिए — जैसे जन्माष्टमी के लिए निशीथ काल (अर्धरात्रि), दीपावली के लिए प्रदोष काल, राम नवमी के लिए मध्याह्न।
हमारा इंजन हर वर्ष के लिए चांद्र मास (अमांत, अधिक मास सहित), हर तिथि का आरंभ-अंत, और नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त से ये काल निकालता है, फिर हर त्योहार का नियम लगाता है। होलिका दहन और रक्षा बंधन में भद्रा भी देखी जाती है; एकादशी में द्वादशी पर पारण। मकर संक्रांति सूर्य के निरयण मकर प्रवेश से तय होती है।
हमने 2025 और 2026 की अपनी तिथियाँ प्रकाशित पंचांग (नई दिल्ली) से मिलाकर जाँची हैं। जहाँ परंपराएँ भिन्न हैं — वैष्णव एकादशी, दक्षिण भारत की हनुमान जयंती, अमांत और पूर्णिमांत मास के नाम — वह हर पृष्ठ पर लिखा है।