त्योहार · 2026
मकर संक्रांति 2026 — बुधवार, 14 जनवरी 2026
मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व है, जिसे पूरे भारत में स्नान, तिल-गुड़, पतंग और दान के साथ मनाया जाता है।
2026 में
बुधवार, 14 जनवरी 2026
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 07:15 / 17:45
- संक्रांति क्षण
- 15:07
| पुण्य काल | 15:07 – 17:45 |
|---|
नियम: जिस दिन सूर्य निरयण मकर राशि में प्रवेश करता है। प्रवेश सूर्यास्त के बाद हो तो पर्व और पुण्य काल अगले दिन।
2027 में
शुक्रवार, 15 जनवरी 2027
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 07:14 / 17:45
- संक्रांति क्षण
- 14 जनवरी, 21:10
| पुण्य काल | 07:14 – 12:30 |
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नियम: जिस दिन सूर्य निरयण मकर राशि में प्रवेश करता है। प्रवेश सूर्यास्त के बाद हो तो पर्व और पुण्य काल अगले दिन।
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त से। दूसरे शहरों में मुहूर्त कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी तिथि एक दिन। पूरा त्योहार कैलेंडर
मकर संक्रांति क्या है
मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य निरयन मकर राशि में प्रवेश करते हैं। अधिकतर हिंदू त्योहार चंद्रमा की तिथियों से तय होते हैं, पर यह पर्व सूर्य की गति से चलता है, इसीलिए इसकी तारीख़ साल-दर-साल लगभग एक ही रहती है। यह उन गिने-चुने त्योहारों में है जो अलग-अलग नामों से लगभग पूरे भारत में मनाए जाते हैं, और परंपरा इसे सूर्य के उत्तरायण होने की शुरुआत मानती है।
परंपरा में उत्तरायण को वर्ष का शुभ भाग माना गया है। महाभारत के अनुसार भीष्म पितामह ने शर-शैया पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की और तभी देह त्यागी। एक अन्य कथा में सूर्यदेव मतभेद भुलाकर अपने पुत्र शनि से मिलने जाते हैं, जो मकर राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस दिन को रिश्तों में मिठास लौटाने का दिन भी माना जाता है। तिल और गुड़ बाँटने की परंपरा इसी भाव से जुड़ी है।
खगोल की दृष्टि से अब शीत अयनांत मकर संक्रांति से कुछ सप्ताह पहले पड़ता है; कई सदियों पहले दोनों साथ पड़ते थे, पर पर्व ने अपना निरयन आधार नहीं छोड़ा। किसानों के लिए यह फ़सल का उत्सव है, जब धान, गन्ना और तिल की नई उपज घर आती है और दिन साफ़ बड़े होने लगते हैं। यह सूर्य, धरती और पशुधन के प्रति आभार का दिन है, और बहुत-से परिवार दान को ही इस पर्व का मूल मानते हैं।
कैसे मनाया जाता है
- सुबह जल्दी स्नान, हो सके तो नदी या संगम में; बहुत-से लोग इसके लिए प्रयागराज, हरिद्वार या गंगासागर जाते हैं।
- उगते सूर्य को जल (अर्घ्य) अर्पित करना।
- पुण्य काल में तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल, गर्म कपड़े या अनाज का दान।
- तिल-गुड़ के लड्डू, गजक, चिक्की और खिचड़ी बनाना और बाँटना।
- पतंग उड़ाना, ख़ासकर गुजरात और राजस्थान में।
- पंजाब में एक दिन पहले लोहड़ी की आग और तमिलनाडु में नई फ़सल से पोंगल पकाना।
तिथि कैसे तय होती है
मकर संक्रांति चंद्रमा से नहीं, सूर्य से तय होती है। हमारा पंचांग लाहिड़ी अयनांश के आधार पर वह सटीक क्षण निकालता है जब सूर्य निरयन मकर राशि में प्रवेश करते हैं। यदि यह क्षण सूर्यास्त से पहले हो, तो वही दिन मकर संक्रांति है और पुण्य काल, यानी स्नान और दान का समय, प्रवेश के क्षण से सूर्यास्त तक रहता है। यदि सूर्य सूर्यास्त के बाद मकर में प्रवेश करें, तो पर्व और पुण्य काल अगले दिन माने जाते हैं।
क्षेत्रीय अंतर
यही समय तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, असम में माघ बिहू (भोगाली बिहू) और पूर्वी उत्तर प्रदेश व बिहार में खिचड़ी के नाम से मनाया जाता है; पंजाब में इसकी पूर्व संध्या पर लोहड़ी होती है और केरल में इसी समय सबरीमला का मकरविलक्कु होता है। सूर्य पर आधारित होने से इसकी तिथि में पूर्णिमांत-अमांत का कोई भेद नहीं है। कुछ पंचांग दूसरा अयनांश या सूर्यास्त का अलग नियम अपनाते हैं, इसलिए कभी-कभी उनमें अगला दिन दिखता है।
तिथियाँ और समय हमारा अपना इंजन गणना करता है (सूर्योदय, तिथि और काल नई दिल्ली के लिए, लाहिड़ी अयनांश)। दूसरे शहर में, या किसी दूसरी परंपरा के पंचांग में, तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है — अपने कुल पुरोहित की परंपरा मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर संक्रांति लगभग हर साल एक ही तारीख़ को क्यों आती है?
क्योंकि यह चंद्र तिथि से नहीं, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से तय होती है। सौर वर्ष की लंबाई लगभग स्थिर है, इसलिए प्रवेश के क्षण और सूर्यास्त के हिसाब से तारीख़ कभी-कभार ही एक दिन खिसकती है।
मकर संक्रांति का पुण्य काल क्या है?
सूर्य के मकर में प्रवेश के क्षण से सूर्यास्त तक का समय पुण्य काल है, जिसे स्नान और दान के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। प्रवेश सूर्यास्त के बाद हो तो पुण्य काल अगले दिन होता है। इस वर्ष का समय ऊपर दिया गया है।
क्या मकर संक्रांति और उत्तरायण एक ही हैं?
परंपरा दोनों को एक मानती है और इसे सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा का आरंभ कहती है। खगोलीय रूप से सूर्य शीत अयनांत पर उत्तर की ओर मुड़ते हैं, जो अब कुछ सप्ताह पहले पड़ता है।