त्योहार · 2026
वसंत पंचमी 2026 — शुक्रवार, 23 जनवरी 2026
वसंत पंचमी वसंत के स्वागत और विद्या की देवी सरस्वती की आराधना का पर्व है, जिसमें पीले वस्त्र, पुस्तकों की पूजा और बच्चों का पहला अक्षर शामिल है।
2026 में
शुक्रवार, 23 जनवरी 2026
- तिथि
- शुक्ल पंचमी (शुक्ल): 23 जनवरी, 02:28 – 24 जनवरी, 01:46
- चांद्र मास
- माघ
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 07:13 / 17:52
| पूजा मुहूर्त | 07:13 – 12:32 |
|---|---|
| पूर्वाह्न (सूर्योदय से मध्य दिन) | 07:13 – 12:32 |
नियम: माघ शुक्ल पंचमी जो पूर्वाह्न (सूर्योदय से मध्य दिन) को छुए; दोनों दिन छुए तो पहला दिन।
2027 में
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027
- तिथि
- शुक्ल पंचमी (शुक्ल): 11 फ़रवरी, 03:04 – 12 फ़रवरी, 03:18
- चांद्र मास
- माघ
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 07:02 / 18:07
| पूजा मुहूर्त | 07:02 – 12:35 |
|---|---|
| पूर्वाह्न (सूर्योदय से मध्य दिन) | 07:02 – 12:35 |
नियम: माघ शुक्ल पंचमी जो पूर्वाह्न (सूर्योदय से मध्य दिन) को छुए; दोनों दिन छुए तो पहला दिन।
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त से। दूसरे शहरों में मुहूर्त कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी तिथि एक दिन। पूरा त्योहार कैलेंडर
वसंत पंचमी क्या है
वसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है और परंपरा इसे वसंत ऋतु की पहली आहट मानती है। उत्तर और पूर्वी भारत के बड़े हिस्से में यह सरस्वती पूजा का दिन है, यानी विद्या, वाणी, संगीत और कला की देवी माँ सरस्वती की आराधना का पर्व। सरसों के फूलों से खिले खेतों का पीला रंग ही इस दिन का रंग है।
मान्यता है कि इसी दिन माँ सरस्वती प्रकट हुईं और मौन सृष्टि को स्वर और अर्थ मिला। विद्यार्थी अपनी पुस्तकें, कलम और वाद्य देवी के सामने रखकर स्पष्ट बुद्धि का आशीर्वाद माँगते हैं। परंपरा की एक और धारा इस दिन को कामदेव और वसंत के आगमन से जोड़ती है। होली इसके लगभग चालीस दिन बाद आती है, और कई जगह उसकी तैयारी इसी दिन से शुरू हो जाती है, जब होलिका दहन के स्थान पर डंडा गाड़ा जाता है।
बहुत-से परिवारों में इसी दिन छोटे बच्चे को पहला अक्षर लिखवाया जाता है, जिसे विद्यारंभ या अक्षरारंभ कहते हैं। लोक-मान्यता में यह अबूझ मुहूर्त है, यानी ऐसा दिन जिसमें पढ़ाई की शुरुआत, गृह प्रवेश या विवाह जैसे शुभ काम अलग से मुहूर्त निकाले बिना किए जा सकते हैं। सबसे बढ़कर, यह पर्व ज्ञान को पवित्र और सबका साझा धन मानने का उत्सव है।
कैसे मनाया जाता है
- पीले वस्त्र पहनना और पीले फूल, विशेषकर गेंदा और सरसों के फूल चढ़ाना।
- घर, विद्यालय और सामुदायिक पंडालों में माँ सरस्वती की पूजा, उनके सामने पुस्तकें और वाद्य रखकर।
- छोटे बच्चों का विद्यारंभ, यानी पहला अक्षर लिखवाना।
- केसरिया भात, केसर हलवा या बूँदी जैसे पीले पकवान बनाना।
- बंगाल और ओडिशा में पुस्तकें दिनभर देवी के चरणों में रखना और उन्हें वापस लेने तक न पढ़ना।
- पंजाब और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में पतंग उड़ाना।
तिथि कैसे तय होती है
वसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी है, यानी माघ के शुक्ल पक्ष की पाँचवीं तिथि। तिथि कैलेंडर के दिन से ठीक मेल नहीं खाती, इसलिए हमारा पंचांग देखता है कि पंचमी पूर्वाह्न में, यानी सूर्योदय से मध्याह्न तक, मौजूद है या नहीं, क्योंकि परंपरागत रूप से सरस्वती पूजा इसी समय होती है। जिस दिन पंचमी इस समय को छूती है, वही दिन लिया जाता है; यदि लगातार दो दिन ऐसा हो, तो पहला दिन माना जाता है।
क्षेत्रीय अंतर
पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और त्रिपुरा में यह मुख्य रूप से सरस्वती पूजा के रूप में मनाई जाती है, जहाँ घरों, विद्यालयों और मोहल्लों के पंडालों में प्रतिमाएँ स्थापित होती हैं। पंजाब में यह बसंत कहलाती है, जो पतंगों और पीले कपड़ों के लिए जानी जाती है, और ब्रज में होली का मौसम इसी से शुरू होता है। शुक्ल पक्ष का नाम पूर्णिमांत और अमांत दोनों पद्धतियों में एक ही रहता है, इसलिए हर जगह यह माघ मास ही है।
तिथियाँ और समय हमारा अपना इंजन गणना करता है (सूर्योदय, तिथि और काल नई दिल्ली के लिए, लाहिड़ी अयनांश)। दूसरे शहर में, या किसी दूसरी परंपरा के पंचांग में, तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है — अपने कुल पुरोहित की परंपरा मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वसंत पंचमी पर पीला रंग क्यों पहना जाता है?
पीला रंग इस मौसम में खिलने वाली सरसों का रंग है और इसे माँ सरस्वती तथा वसंत से जोड़ा जाता है। पीले कपड़े पहनना और पीले फूल व पकवान चढ़ाना व्यापक रूप से निभाई जाने वाली परंपरा है।
क्या वसंत पंचमी और सरस्वती पूजा एक ही हैं?
हाँ, उत्तर और पूर्वी भारत के अधिकतर हिस्सों में दोनों एक ही दिन हैं। यह पर्व वसंत के आरंभ का प्रतीक है और इस दिन विद्या व कला की देवी सरस्वती की पूजा होती है।
क्या वसंत पंचमी नया काम शुरू करने के लिए शुभ है?
लोक-मान्यता इसे अबूझ मुहूर्त मानती है, यानी ऐसा दिन जिसमें अलग से मुहूर्त निकाले बिना शुभ काम शुरू किए जा सकते हैं। कई परिवार इस दिन बच्चे का विद्यारंभ, गृह प्रवेश या विवाह करते हैं।