मुहूर्त · 2026–2027
विद्यारंभ मुहूर्त 2026 और 2027
विद्यारंभ की शुभ तिथियाँ और समय, नई दिल्ली के लिए हमारे अपने पंचांग इंजन से — हर तिथि के साथ उसका कारण, और हर छूटे दिन के साथ वह नियम जो उसे रोकता है।
आने वाली शुभ तिथियाँ
1 अक्टूबर 2026, गुरुवार
- 06:13 – 12:356 घं 22 मि · कृष्ण पंचमी · रोहिणी
- 12:35 – 13:391 घं 4 मि · कृष्ण षष्ठी · रोहिणी
- 15:09 – 18:072 घं 58 मि · कृष्ण षष्ठी · रोहिणी
2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
- 06:14 – 10:154 घं 1 मि · कृष्ण षष्ठी · मृगशिरा
21 अक्टूबर 2026, बुधवार
- 06:25 – 12:055 घं 40 मि · शुक्ल दशमी · धनिष्ठा
- 13:30 – 14:1242 मि · शुक्ल दशमी · धनिष्ठा
- 14:12 – 17:453 घं 33 मि · शुक्ल एकादशी · धनिष्ठा
22 अक्टूबर 2026, गुरुवार
- 14:55 – 17:442 घं 50 मि · शुक्ल द्वादशी · शतभिषा
28 अक्टूबर 2026, बुधवार
- 13:28 – 14:371 घं 9 मि · कृष्ण तृतीया · रोहिणी
30 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
- 06:31 – 08:462 घं 15 मि · कृष्ण पंचमी · मृगशिरा
- 08:46 – 09:0418 मि · कृष्ण पंचमी · मृगशिरा
विद्यारंभ मुहूर्त 2026
2026 में नई दिल्ली के लिए 49 शुभ दिन। महीना चुनें:
- जनवरी6 दिन
- फ़रवरी6 दिन
- मार्च4 दिन
- अप्रैल1 दिन
- मई4 दिन
- जून3 दिन
- जुलाई6 दिन
- अगस्त1 दिन
- सितंबर3 दिन
- अक्टूबर6 दिन
- नवंबर6 दिन
- दिसंबर3 दिन
विद्यारंभ मुहूर्त 2027
2027 में नई दिल्ली के लिए 57 शुभ दिन। महीना चुनें:
- जनवरी3 दिन
- फ़रवरी5 दिन
- मार्च7 दिन
- अप्रैल5 दिन
- मई1 दिन
- जून4 दिन
- जुलाई5 दिन
- अगस्त4 दिन
- सितंबर3 दिन
- अक्टूबर2 दिन
- नवंबर7 दिन
- दिसंबर11 दिन
हमारे नियम
- नक्षत्र
- अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
- तिथि
- शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; कृष्ण 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12
- वार
- बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
- टाले जाते हैं
- राहु काल, विष्टि (भद्रा) करण, रात्रि
- पूरे दिन छोड़े जाते हैं
- अधिक मास
विद्यारंभ क्या है
विद्यारंभ (अक्षरारंभ) बच्चे की पढ़ाई की शुरुआत है — सरस्वती या गणेश के सामने, अक्सर चावल में या स्लेट पर, पहले अक्षर लिखना। यह प्रायः पाँच वर्ष की आयु के आसपास, औपचारिक पढ़ाई से पहले होता है।
शास्त्र क्या देखते हैं
बुधवार (बुध, विद्या), गुरुवार (गुरु, शिक्षक) और शुक्रवार इसके वार हैं; वार बताने वाले स्रोत सोम, मंगल और शनिवार छोड़ते हैं। स्थिर, चर, मृदु और लघु नक्षत्र, तथा दोनों पक्षों की 2, 3, 5, 6, 10, 11 और 12 तिथियाँ ली जाती हैं, शुक्ल पक्ष बेहतर। राहु काल और भद्रा टाले जाते हैं; अधिक मास छोड़ा जाता है।
क्षेत्र और परिवार के अनुसार
केरल और कर्नाटक में विद्यारंभम् विजयादशमी पर होता है, और उत्तर में बहुत से परिवार वसंत पंचमी चुनते हैं; दोनों पर्व के दिन हैं जो वार देखे बिना प्रथा से माने जाते हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह अक्षराभ्यासम् है, प्रायः बासर में।
ये तिथियाँ हमारे अपने इंजन से, खुले नियमों पर निकली हैं — कोई AI नहीं। हम लग्न शुद्धि, व्यक्तिगत तारा/चंद्र बल, पंचक और क्षेत्रीय प्रथाएँ नहीं देखते, और नियम कई परंपराओं का साझा, सख़्त भाग हैं; इसलिए कुछ पंचांगों की कुछ तिथियाँ यहाँ नहीं होंगी। अंतिम निर्णय से पहले अपने पुरोहित से पूछ लें। हम मुहूर्त कैसे निकालते हैं
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या वसंत पंचमी विद्यारंभ के लिए शुभ है?
यह सरस्वती का दिन है और बहुत से परिवार इसे प्रथा से लेते हैं। हमारी सूची हर दिन को एक ही नियमों से जाँचती है, इसलिए वसंत पंचमी तभी दिखती है जब वे नियम पूरे हों।
क्या विद्यारंभ और स्कूल का पहला दिन एक ही है?
पूरी तरह नहीं: विद्यारंभ पहली बार अक्षर लिखने का संस्कार है। फिर भी बहुत से परिवार स्कूल के पहले दिन या नए पाठ्यक्रम के लिए इन्हीं में से कोई तिथि चुनते हैं।