मुहूर्त की गणना कैसे होती है
मुहूर्त खोजक पूरी तरह नियम-आधारित है — कोई AI नहीं। नियम मुहूर्त चिंतामणि और उस पर आधारित पंचांग परंपरा (दृक, विशुद्ध, निर्णय सागर) के साझा भाग हैं। जहाँ स्रोत असहमत हैं, वहाँ हम केवल वही रखते हैं जो सब मानते हैं — इसलिए हमारा दिया समय अधिकांश परंपराओं को स्वीकार्य होना चाहिए, पर कुछ मान्य समय छूट सकते हैं।
एक समय तभी दिखता है जब हर क्षण ये सब सही हों
- वार (सूर्योदय से सूर्योदय) कार्य की सूची में हो — सभी कार्यों के लिए सोम, बुध, गुरु, शुक्र।
- चल रही तिथि सूची में हो (1–15 शुक्ल, 16–30 कृष्ण)।
- चंद्रमा का नक्षत्र (लाहिड़ी अयनांश) सूची में हो।
- राहु काल सदा टाला जाता है; कुछ कार्यों में यमगंड भी; विष्टि (भद्रा) करण; कुछ कार्यों में व्यतीपात और वैधृति योग।
- पूरे दिन छोड़े जाते हैं जब: खरमास (सूर्य धनु या मीन में), चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक), अधिक मास, गुरु या शुक्र अस्त।
- समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक; केवल विवाह अगले सूर्योदय तक (विवाह प्रायः रात में होते हैं)।
जहाँ तिथि, नक्षत्र, योग या करण बदलता है वहाँ समय टूटता है, ताकि हर समय के साथ एक ही पंचांग और उसके कारण रहें। 10 मिनट से छोटे टुकड़े छोड़ दिए जाते हैं।
कार्य के अनुसार
| कार्य | नक्षत्र | तिथि | टाले जाते | निषेध |
|---|---|---|---|---|
| विवाह | रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद, रेवती | दोनों पक्षों की 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13 | राहु काल, भद्रा, व्यतीपात/वैधृति | खरमास, चातुर्मास, अधिक मास, गुरु/शुक्र अस्त |
| गृह प्रवेश | रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद, रेवती | शुक्ल 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13; कृष्ण 2, 3, 5 | राहु काल, यमगंड, भद्रा, व्यतीपात/वैधृति | खरमास, चातुर्मास, अधिक मास, गुरु/शुक्र अस्त |
| वाहन क्रय | अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती | दोनों पक्षों की 2, 3, 5, 6, 7, 10, 11, 12, 13 और पूर्णिमा | राहु काल, यमगंड, भद्रा, व्यतीपात/वैधृति | अधिक मास |
| नामकरण | अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तर भाद्रपद, रेवती | शुक्ल 1; दोनों पक्षों की 2, 3, 5, 7, 10, 11, 12, 13 | राहु काल, भद्रा | अधिक मास |
| यात्रा | अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती | दोनों पक्षों की 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13 | राहु काल, भद्रा | — |
| व्यापार आरंभ | अश्विनी, रोहिणी, पुष्य, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, उत्तर भाद्रपद, रेवती | शुक्ल 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13; कृष्ण 2, 3, 5 | राहु काल, यमगंड, भद्रा, व्यतीपात/वैधृति | अधिक मास |
जो हम नहीं देखते
- लग्न शुद्धि (किस लग्न में कार्य हो)।
- व्यक्ति विशेष का तारा बल और चंद्र बल — इसके लिए आपकी जन्म कुंडली चाहिए।
- पंचक, दिशा शूल (यात्रा की दिशा हमें पता नहीं), गंड मूल, होलाष्टक और क्षेत्रीय प्रथाएँ।
- नामकरण परंपरा से जन्म के 11वें-12वें दिन होता है; खोजक केवल बताता है कि चुनी अवधि में कौन से दिन उपयुक्त हैं।
- मुंडन, संपत्ति क्रय, शल्य-चिकित्सा जैसे कार्य जानबूझकर नहीं दिए गए — उन पर स्रोतों में साझा नियम पर्याप्त नहीं।
इसलिए अंतिम निर्णय से पहले अपने पुरोहित से पूछ लें — वे हमारे दिए समय को और परिष्कृत कर सकते हैं।
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