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मुहूर्त · 2026–2027

गृह प्रवेश मुहूर्त 2026 और 2027

गृह प्रवेश की शुभ तिथियाँ और समय, नई दिल्ली के लिए हमारे अपने पंचांग इंजन से — हर तिथि के साथ उसका कारण, और हर छूटे दिन के साथ वह नियम जो उसे रोकता है।

आने वाली शुभ तिथियाँ

  1. 25 नवंबर 2026, बुधवार

    • 16:50 – 17:2434 मि · कृष्ण द्वितीया · रोहिणी
  2. 26 नवंबर 2026, गुरुवार

    • 08:11 – 13:155 घं 4 मि · कृष्ण द्वितीया · मृगशिरा
    • 13:15 – 13:2712 मि · कृष्ण तृतीया · मृगशिरा
    • 14:46 – 17:242 घं 38 मि · कृष्ण तृतीया · मृगशिरा
  3. 15 जनवरी 2027, शुक्रवार

    • 07:14 – 11:113 घं 57 मि · शुक्ल सप्तमी · रेवती
    • 12:30 – 14:131 घं 43 मि · शुक्ल सप्तमी · रेवती
  4. 20 जनवरी 2027, बुधवार

    • 07:14 – 08:331 घं 20 मि · शुक्ल त्रयोदशी · मृगशिरा
    • 09:53 – 12:322 घं 39 मि · शुक्ल त्रयोदशी · मृगशिरा
    • 13:51 – 14:591 घं 7 मि · शुक्ल त्रयोदशी · मृगशिरा
    • 14:59 – 16:171 घं 18 मि · शुक्ल त्रयोदशी · मृगशिरा
  5. 11 फ़रवरी 2027, गुरुवार

    • 08:26 – 13:585 घं 33 मि · शुक्ल पंचमी · रेवती
    • 15:21 – 18:082 घं 46 मि · शुक्ल पंचमी · रेवती
  6. 22 फ़रवरी 2027, सोमवार

    • 12:34 – 12:4713 मि · कृष्ण द्वितीया · उत्तरा फाल्गुनी
    • 12:47 – 18:165 घं 28 मि · कृष्ण द्वितीया · उत्तरा फाल्गुनी

गृह प्रवेश मुहूर्त 2026

2026 में नई दिल्ली के लिए 9 शुभ दिन। महीना चुनें:

2026 की पूरी महीनेवार सूची

गृह प्रवेश मुहूर्त 2027

2027 में नई दिल्ली के लिए 17 शुभ दिन। महीना चुनें:

2027 की पूरी महीनेवार सूची

हमारे नियम

नक्षत्र
रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
तिथि
शुक्ल 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13; कृष्ण 2, 3, 5
वार
सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
टाले जाते हैं
राहु काल, यमगण्ड, विष्टि (भद्रा) करण, व्यतीपात / वैधृति योग, रात्रि
पूरे दिन छोड़े जाते हैं
खरमास, चातुर्मास, अधिक मास, गुरु अस्त, शुक्र अस्त

गृह प्रवेश क्या है

गृह प्रवेश नए घर में पहला विधिवत प्रवेश है — प्रायः कलश, छोटी पूजा या हवन और नई रसोई में दूध उबालने के साथ। यह नए बने घर (अपूर्व), लंबे समय बाद लौटने (सपूर्व) या टूट-फूट के बाद फिर बने घर (द्वंद्व) के लिए होता है; नीचे के नियम नए घर के लिए हैं।

शास्त्र क्या देखते हैं

शास्त्र स्थिर (ध्रुव) और मृदु नक्षत्रों को उत्तम मानते हैं — रोहिणी, मृगशिरा, तीनों उत्तरा, चित्रा, अनुराधा और रेवती — ताकि घर-गृहस्थी टिके। शुक्ल पक्ष श्रेष्ठ है; कृष्ण पक्ष में केवल पंचमी तक के दिन लिए जाते हैं। राहु काल, यमगंड, भद्रा और व्यतीपात-वैधृति योग टाले जाते हैं, और खरमास, चातुर्मास, अधिक मास तथा गुरु-शुक्र अस्त में पूरे दिन छोड़ दिए जाते हैं। प्रवेश दिन में होता है।

क्षेत्र और परिवार के अनुसार

बहुत से परिवार उसी दिन वास्तु पूजा भी करते हैं, और कुछ पुरोहित द्वारा बताए लग्न में प्रवेश करते हैं। दक्षिण के कुछ भागों में प्रवेश सूर्योदय से पहले होता है। जहाँ चातुर्मास में ही घर बदलना पड़े, वहाँ प्रवेश पर छोटी पूजा और बाद में पूरा अनुष्ठान एक प्रचलित रास्ता है।

ये तिथियाँ हमारे अपने इंजन से, खुले नियमों पर निकली हैं — कोई AI नहीं। हम लग्न शुद्धि, व्यक्तिगत तारा/चंद्र बल, पंचक और क्षेत्रीय प्रथाएँ नहीं देखते, और नियम कई परंपराओं का साझा, सख़्त भाग हैं; इसलिए कुछ पंचांगों की कुछ तिथियाँ यहाँ नहीं होंगी। अंतिम निर्णय से पहले अपने पुरोहित से पूछ लें। हम मुहूर्त कैसे निकालते हैं

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या चातुर्मास में गृह प्रवेश कर सकते हैं?

अधिकांश पंचांगों की तरह हमारे नियम भी चातुर्मास को गृह प्रवेश के लिए छोड़ते हैं। जहाँ घर बदलना टल न सके, वहाँ बहुत से परिवार साधारण पूजा से रहना शुरू करते हैं और पूरा गृह प्रवेश देवउठनी एकादशी के बाद करते हैं।

क्या किराए के घर के लिए भी गृह प्रवेश मुहूर्त चाहिए?

परंपरा पूरा संस्कार अपने बनवाए या ख़रीदे घर से जोड़ती है। फिर भी बहुत से किरायेदार शुभ दिन पर ही सामान ले जाना पसंद करते हैं; वही तिथियाँ काम आती हैं।