मुहूर्त · 2026–2027
विवाह मुहूर्त 2026 और 2027
विवाह की शुभ तिथियाँ और समय, नई दिल्ली के लिए हमारे अपने पंचांग इंजन से — हर तिथि के साथ उसका कारण, और हर छूटे दिन के साथ वह नियम जो उसे रोकता है।
आने वाली शुभ तिथियाँ
25 नवंबर 2026, बुधवार
- 16:50 – 20:363 घं 46 मि · कृष्ण द्वितीया · रोहिणी
- 20:36 – 03:02(26 नवंबर)6 घं 26 मि · कृष्ण द्वितीया · मृगशिरा
- 03:02 – 06:52(26 नवंबर)3 घं 50 मि · कृष्ण द्वितीया · मृगशिरा
26 नवंबर 2026, गुरुवार
- 06:52 – 07:4958 मि · कृष्ण द्वितीया · मृगशिरा
- 07:49 – 13:155 घं 26 मि · कृष्ण द्वितीया · मृगशिरा
- 13:15 – 13:2712 मि · कृष्ण तृतीया · मृगशिरा
- 14:46 – 17:473 घं 1 मि · कृष्ण तृतीया · मृगशिरा
30 नवंबर 2026, सोमवार
- 12:54 – 14:271 घं 33 मि · कृष्ण सप्तमी · मघा
2 दिसंबर 2026, बुधवार
- 22:52 – 06:57(3 दिसंबर)8 घं 5 मि · कृष्ण दशमी · उत्तरा फाल्गुनी
3 दिसंबर 2026, गुरुवार
- 06:57 – 09:152 घं 18 मि · कृष्ण दशमी · उत्तरा फाल्गुनी
- 09:23 – 10:541 घं 30 मि · कृष्ण दशमी · हस्त
- 23:03 – 06:58(4 दिसंबर)7 घं 54 मि · कृष्ण एकादशी · हस्त
4 दिसंबर 2026, शुक्रवार
- 06:58 – 08:231 घं 25 मि · कृष्ण एकादशी · हस्त
- 08:23 – 10:231 घं 59 मि · कृष्ण एकादशी · हस्त
विवाह मुहूर्त 2026
2026 में नई दिल्ली के लिए 27 शुभ दिन। महीना चुनें:
- जनवरीकोई तिथि नहीं
- फ़रवरी4 दिन
- मार्च2 दिन
- अप्रैल3 दिन
- मई4 दिन
- जून4 दिन
- जुलाई2 दिन
- अगस्तकोई तिथि नहीं
- सितंबरकोई तिथि नहीं
- अक्टूबरकोई तिथि नहीं
- नवंबर3 दिन
- दिसंबर5 दिन
विवाह मुहूर्त 2027
2027 में नई दिल्ली के लिए 41 शुभ दिन। महीना चुनें:
- जनवरी4 दिन
- फ़रवरी5 दिन
- मार्च6 दिन
- अप्रैल6 दिन
- मई4 दिन
- जून3 दिन
- जुलाई2 दिन
- अगस्तकोई तिथि नहीं
- सितंबरकोई तिथि नहीं
- अक्टूबरकोई तिथि नहीं
- नवंबर8 दिन
- दिसंबर3 दिन
हमारे नियम
- नक्षत्र
- रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
- तिथि
- शुक्ल 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13; कृष्ण 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13
- वार
- सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
- टाले जाते हैं
- राहु काल, विष्टि (भद्रा) करण, व्यतीपात / वैधृति योग
- पूरे दिन छोड़े जाते हैं
- खरमास, चातुर्मास, अधिक मास, गुरु अस्त, शुक्र अस्त
विवाह क्या है
विवाह मुहूर्त वह समय है जिसमें विवाह के मुख्य संस्कार — प्रायः फेरे या सप्तपदी — होते हैं, स्वागत समारोह नहीं। पंचांग हर वर्ष विवाह की तिथियों की सूची देते हैं, और परिवार पुरोहित के साथ ठीक समय तय करते हैं।
शास्त्र क्या देखते हैं
मुहूर्त चिंतामणि विवाह के लिए ग्यारह नक्षत्र बताता है, जिनमें रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल और रेवती हैं। किसी भी पक्ष की केवल 2, 3, 5, 7, 10, 11 और 13 तिथियाँ ली जाती हैं — यानी रिक्ता (4, 9, 14), अष्टमी, पूर्णिमा और अमावस्या बाहर — और भद्रा टाली जाती है। गुरु या शुक्र अस्त, खरमास, अधिक मास और चातुर्मास में विवाह पूरी तरह रुकते हैं — इसी कारण कभी-कभी पूरा मौसम बिना तिथि के रहता है। विवाह का समय रात भर चल सकता है।
क्षेत्र और परिवार के अनुसार
उत्तर भारत में परिवार प्रायः पंचांग की सूची और रात का लग्न देखते हैं; दक्षिण और महाराष्ट्र में सुबह का मुहूर्त आम है और उस समय के लग्न को अधिक महत्व दिया जाता है। कुछ समुदाय रविवार, मंगलवार या शनिवार भी मानते हैं, और बहुत से लोग अक्षय तृतीया व देवउठनी एकादशी को अबूझ मुहूर्त मानते हैं। हमारी सूची केवल सख़्त साझा नियम रखती है, इसलिए यह अधिकांश पंचांगों से छोटी है।
ये तिथियाँ हमारे अपने इंजन से, खुले नियमों पर निकली हैं — कोई AI नहीं। हम लग्न शुद्धि, व्यक्तिगत तारा/चंद्र बल, पंचक और क्षेत्रीय प्रथाएँ नहीं देखते, और नियम कई परंपराओं का साझा, सख़्त भाग हैं; इसलिए कुछ पंचांगों की कुछ तिथियाँ यहाँ नहीं होंगी। अंतिम निर्णय से पहले अपने पुरोहित से पूछ लें। हम मुहूर्त कैसे निकालते हैं
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुछ महीनों में विवाह की तिथियाँ क्यों नहीं होतीं?
क्योंकि उस समय पूरे दिन को रोकने वाला कोई नियम लागू होता है: चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी), खरमास (सूर्य धनु या मीन में), अधिक मास, या गुरु-शुक्र अस्त। इन पृष्ठों पर हर खाली महीने के साथ वह नियम लिखा है।
जो तिथि इस सूची में नहीं, क्या वह अशुभ है?
ज़रूरी नहीं। हम केवल प्रमुख परंपराओं के साझा नियम रखते हैं और लग्न या वर-वधू की कुंडली नहीं देखते। पुरोहित इन्हें देखकर ऐसी तिथि भी स्वीकार कर सकते हैं जो हमारी सूची में नहीं है।