मुहूर्त · 2026–2027
संपत्ति ख़रीद मुहूर्त 2026 और 2027
संपत्ति ख़रीद की शुभ तिथियाँ और समय, नई दिल्ली के लिए हमारे अपने पंचांग इंजन से — हर तिथि के साथ उसका कारण, और हर छूटे दिन के साथ वह नियम जो उसे रोकता है।
आने वाली शुभ तिथियाँ
28 सितंबर 2026, सोमवार
- 06:12 – 07:421 घं 30 मि · कृष्ण द्वितीया · रेवती
- 09:12 – 10:161 घं 4 मि · कृष्ण द्वितीया · रेवती
1 अक्टूबर 2026, गुरुवार
- 07:43 – 12:354 घं 53 मि · कृष्ण पंचमी · रोहिणी
28 अक्टूबर 2026, बुधवार
- 13:28 – 14:371 घं 9 मि · कृष्ण तृतीया · रोहिणी
30 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
- 06:31 – 08:462 घं 15 मि · कृष्ण पंचमी · मृगशिरा
- 08:46 – 09:0418 मि · कृष्ण पंचमी · मृगशिरा
11 नवंबर 2026, बुधवार
- 06:40 – 08:011 घं 21 मि · शुक्ल द्वितीया · अनुराधा
- 09:22 – 11:382 घं 16 मि · शुक्ल द्वितीया · अनुराधा
20 नवंबर 2026, शुक्रवार
- 06:56 – 07:1619 मि · शुक्ल दशमी · उत्तरा भाद्रपद
- 07:16 – 10:463 घं 31 मि · शुक्ल एकादशी · उत्तरा भाद्रपद
- 12:06 – 14:462 घं 40 मि · शुक्ल एकादशी · उत्तरा भाद्रपद
- 16:05 – 17:251 घं 20 मि · शुक्ल एकादशी · उत्तरा भाद्रपद
संपत्ति ख़रीद मुहूर्त 2026
2026 में नई दिल्ली के लिए 37 शुभ दिन। महीना चुनें:
- जनवरी4 दिन
- फ़रवरी3 दिन
- मार्च3 दिन
- अप्रैल4 दिन
- मई3 दिन
- जून1 दिन
- जुलाई2 दिन
- अगस्त3 दिन
- सितंबर4 दिन
- अक्टूबर3 दिन
- नवंबर4 दिन
- दिसंबर3 दिन
संपत्ति ख़रीद मुहूर्त 2027
2027 में नई दिल्ली के लिए 44 शुभ दिन। महीना चुनें:
- जनवरी5 दिन
- फ़रवरी4 दिन
- मार्च4 दिन
- अप्रैल3 दिन
- मई2 दिन
- जून2 दिन
- जुलाई3 दिन
- अगस्त3 दिन
- सितंबर3 दिन
- अक्टूबर4 दिन
- नवंबर6 दिन
- दिसंबर5 दिन
हमारे नियम
- नक्षत्र
- रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
- तिथि
- शुक्ल 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13; कृष्ण 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13
- वार
- सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
- टाले जाते हैं
- राहु काल, यमगण्ड, विष्टि (भद्रा) करण, व्यतीपात / वैधृति योग, रात्रि
- पूरे दिन छोड़े जाते हैं
- अधिक मास
संपत्ति ख़रीद क्या है
संपत्ति ख़रीद मुहूर्त वह समय है जब ज़मीन, मकान या फ़्लैट का बैनामा, रजिस्ट्री या बयाना किया जाए। यह संस्कार नहीं है, इसलिए नियम गृह प्रवेश से हल्के हैं: समझौते का क्षण देखा जाता है, मौसम नहीं।
शास्त्र क्या देखते हैं
पंचांग परंपरा स्थिर (ध्रुव) और मृदु नक्षत्र लेती है — रोहिणी, मृगशिरा, तीनों उत्तरा, चित्रा, अनुराधा और रेवती — ताकि संपत्ति परिवार के पास टिके; साथ में शुभ ग्रहों के वार और शास्त्रीय शुभ तिथियाँ। राहु काल, यमगंड, भद्रा और व्यतीपात-वैधृति टाले जाते हैं; केवल अधिक मास में ख़रीद पूरी तरह रुकती है।
क्षेत्र और परिवार के अनुसार
भूमि क्रय का एक पुराना नियम दूसरे नक्षत्र लेता है — मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, विशाखा, अनुराधा, मूल और तीनों पूर्वा — और कुछ पंचांग आज भी उसे मानते हैं। कुछ परिवार भूमि के लिए मंगलवार (मंगल का वार) को अच्छा मानते हैं। हम वही स्थिर-मृदु सूची लेते हैं जो आज के अधिकांश पंचांग लेते हैं; जहाँ परिवार पुराना नियम मानता हो, पुरोहित दिन जाँच सकते हैं।
ये तिथियाँ हमारे अपने इंजन से, खुले नियमों पर निकली हैं — कोई AI नहीं। हम लग्न शुद्धि, व्यक्तिगत तारा/चंद्र बल, पंचक और क्षेत्रीय प्रथाएँ नहीं देखते, और नियम कई परंपराओं का साझा, सख़्त भाग हैं; इसलिए कुछ पंचांगों की कुछ तिथियाँ यहाँ नहीं होंगी। अंतिम निर्णय से पहले अपने पुरोहित से पूछ लें। हम मुहूर्त कैसे निकालते हैं
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रजिस्ट्री का दिन देखें या भुगतान का?
मुहूर्त उस कार्य का देखा जाता है जिससे संपत्ति आपकी होती है — प्रायः रजिस्ट्री या बैनामे पर हस्ताक्षर। बहुत से परिवार बयाना भी शुभ दिन पर देते हैं।
क्या पितृ पक्ष या चातुर्मास में संपत्ति ख़रीद सकते हैं?
हमारे नियम इन दोनों में ख़रीद नहीं रोकते; केवल अधिक मास रोकता है। कुछ परिवार प्रथा के कारण पितृ पक्ष टालते हैं — यह परिवार का निर्णय है, हमारा नियम नहीं।