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त्योहार · 2026

महाशिवरात्रि 2026 — रविवार, 15 फ़रवरी 2026

महाशिवरात्रि शिव की महान रात्रि है, जिसमें दिनभर व्रत, रातभर जागरण और आधी रात के आसपास पूजा का शिखर होता है।

2026 में

रविवार, 15 फ़रवरी 2026

तिथि
कृष्ण चतुर्दशी (कृष्ण): 15 फ़रवरी, 17:05 – 16 फ़रवरी, 17:34
चांद्र मास
फाल्गुन (पूर्णिमांत) / माघ (अमांत)
सूर्योदय / सूर्यास्त
06:59 / 18:11
मुहूर्त और काल
पूजा मुहूर्त16 फ़रवरी, 00:09 – 16 फ़रवरी, 01:00
निशीथ काल16 फ़रवरी, 00:09 – 16 फ़रवरी, 01:00

नियम: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (अमांत में माघ) जो निशीथ काल (अर्धरात्रि का मुहूर्त) में हो।

2027 में

शनिवार, 6 मार्च 2027

तिथि
कृष्ण चतुर्दशी (कृष्ण): 6 मार्च, 12:03 – 7 मार्च, 13:46
चांद्र मास
फाल्गुन (पूर्णिमांत) / माघ (अमांत)
सूर्योदय / सूर्यास्त
06:41 / 18:23
मुहूर्त और काल
पूजा मुहूर्त7 मार्च, 00:07 – 7 मार्च, 00:56
निशीथ काल7 मार्च, 00:07 – 7 मार्च, 00:56

नियम: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (अमांत में माघ) जो निशीथ काल (अर्धरात्रि का मुहूर्त) में हो।

समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त से। दूसरे शहरों में मुहूर्त कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी तिथि एक दिन। पूरा त्योहार कैलेंडर

महाशिवरात्रि क्या है

महाशिवरात्रि, यानी शिव की महान रात्रि, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है, जिसे अमांत पंचांग में माघ कृष्ण चतुर्दशी कहा जाता है। हर महीने इस तिथि पर शिवरात्रि आती है, पर वर्ष में यह सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। अधिकतर त्योहारों के उलट इसका केंद्र रात है: भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रातभर जागकर भगवान शिव की आराधना करते हैं।

इस रात से कई कथाएँ जुड़ी हैं। एक मान्यता के अनुसार इसी रात शिव और पार्वती का विवाह हुआ। दूसरी कथा कहती है कि इसी रात शिव अनंत ज्योति-स्तंभ, यानी ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए, जिसका आदि और अंत न ब्रह्मा खोज सके, न विष्णु। एक प्रिय लोककथा उस शिकारी की है जिसने रातभर बेल के पेड़ पर बैठे-बैठे अनजाने में नीचे स्थित शिवलिंग पर पत्ते और जल गिराए और शिव की कृपा पाई।

बहुत-से भक्तों के लिए यह उत्सव से ज़्यादा ठहराव की रात है, जिसमें उपवास, जप और जागरण के साथ मन को भीतर की ओर मोड़ा जाता है। बारह ज्योतिर्लिंगों से लेकर गाँव के छोटे शिवालयों तक, मंदिर रातभर खुले रहते हैं और श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है। योग और साधना की परंपराएँ इसे ध्यान के लिए विशेष मानती हैं, और गृहस्थ परिवार भी सादे व्रत और पास के शिव मंदिर के दर्शन से इसे मनाते हैं।

कैसे मनाया जाता है

  • दिनभर व्रत, निर्जल या फल-दूध के साथ, और अगली सुबह पारण।
  • शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक।
  • बेलपत्र, धतूरा, फूल और चंदन अर्पित करना।
  • ओम नमः शिवाय का जप और शिव पुराण या रुद्राष्टक का पाठ।
  • रातभर जागरण और चारों प्रहर में पूजा।
  • किसी ज्योतिर्लिंग या पास के शिव मंदिर के दर्शन, जिनमें से कई रातभर खुले रहते हैं।

तिथि कैसे तय होती है

महाशिवरात्रि पूर्णिमांत पंचांग के फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी है; अमांत पंचांग में इसी पखवाड़े को माघ कृष्ण कहा जाता है। निर्णायक समय निशीथ काल है, यानी रात को पंद्रह मुहूर्तों में बाँटने पर आठवाँ मुहूर्त, जो लगभग आधी रात के आसपास पड़ता है। जिस दिन की रात में निशीथ काल के समय चतुर्दशी चल रही हो, वही महाशिवरात्रि है; यदि दो रातों में निशीथ के समय चतुर्दशी हो, तो पहली रात ली जाती है।

क्षेत्रीय अंतर

पूर्णिमांत पंचांग मानने वाला उत्तर भारत इस मास को फाल्गुन कहता है, जबकि अमांत पंचांग वाले महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यही पखवाड़ा माघ कृष्ण कहलाता है; रात दोनों में एक ही है। कश्मीरी पंडित इसे हेरथ के रूप में, प्रायः एक दिन पहले, कई दिनों तक चलने वाले अनुष्ठानों के साथ मनाते हैं। नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर में इस रात भारी संख्या में श्रद्धालु और साधु पहुँचते हैं।

तिथियाँ और समय हमारा अपना इंजन गणना करता है (सूर्योदय, तिथि और काल नई दिल्ली के लिए, लाहिड़ी अयनांश)। दूसरे शहर में, या किसी दूसरी परंपरा के पंचांग में, तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है — अपने कुल पुरोहित की परंपरा मानें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाशिवरात्रि रात में क्यों मनाई जाती है?

मान्यता है कि शिव से जुड़ी प्रमुख घटनाएँ, जैसे ज्योति-स्तंभ के रूप में प्रकट होना और कई कथाओं के अनुसार पार्वती से विवाह, रात में हुईं। पूजा का शिखर निशीथ काल यानी लगभग आधी रात होता है, और हमारा पंचांग भी इसी समय के आधार पर तिथि तय करता है।

शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?

हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि आती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहते हैं। फाल्गुन (अमांत में माघ) की शिवरात्रि महाशिवरात्रि कहलाती है और वर्ष में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

कुछ पंचांग फाल्गुन और कुछ माघ क्यों लिखते हैं?

उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा पर समाप्त माना जाता है (पूर्णिमांत), जबकि पश्चिम और दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में अमावस्या पर (अमांत)। इस कारण कृष्ण पक्ष का नाम दोनों में अलग होता है, पर महाशिवरात्रि की रात एक ही है।