त्योहार · 2026
शारदीय नवरात्रि 2026 — रविवार, 11 अक्टूबर 2026
शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल पक्ष में देवी उपासना की नौ रातें हैं, जो घटस्थापना से शुरू होकर दशहरे से पहले महानवमी पर पूरी होती हैं।
2026 में
रविवार, 11 अक्टूबर 2026समापन 19 अक्टूबर 2026
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा (शुक्ल): 10 अक्टूबर, 21:20 – 11 अक्टूबर, 21:31
- चांद्र मास
- आश्विन
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 06:19 / 17:55
| घटस्थापना मुहूर्त | 06:19 – 10:11 |
|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 11:44 – 12:30 |
- महा नवमी: 19 अक्टूबर 2026
नियम: शुक्ल प्रतिपदा जो दिन के पहले तिहाई भाग (घटस्थापना काल) को छुए, उस दिन आरंभ; महा नवमी पर पूर्ण; अगले दिन दशहरा।
2027 में
गुरुवार, 30 सितंबर 2027समापन 8 अक्टूबर 2027
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा (शुक्ल): 30 सितंबर, 08:06 – 1 अक्टूबर, 05:35
- चांद्र मास
- आश्विन
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 06:13 / 18:08
| घटस्थापना मुहूर्त | 08:06 – 10:11 |
|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 11:47 – 12:34 |
- महा नवमी: 8 अक्टूबर 2027
नियम: शुक्ल प्रतिपदा जो दिन के पहले तिहाई भाग (घटस्थापना काल) को छुए, उस दिन आरंभ; महा नवमी पर पूर्ण; अगले दिन दशहरा।
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त से। दूसरे शहरों में मुहूर्त कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी तिथि एक दिन। पूरा त्योहार कैलेंडर
शारदीय नवरात्रि क्या है
शारदीय नवरात्रि वर्ष की नवरात्रियों में सबसे व्यापक रूप से मनाई जाती है। यह आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होती है, और नौ रातों तक भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — की एक-एक दिन उपासना करते हैं। दसवां दिन विजयादशमी यानी दशहरा है।
दुर्गा सप्तशती में महिषासुर की कथा है, जिसे कोई देवता पराजित नहीं कर पा रहा था। तब सभी देवताओं के तेज से मां दुर्गा प्रकट हुईं; उन्होंने नौ दिन युद्ध किया और दसवें दिन महिषासुर का वध किया। एक अन्य परंपरा इस ऋतु को श्रीराम से जोड़ती है, जिन्होंने रावण से युद्ध से पहले देवी की आराधना की थी। दोनों कथाओं का भाव एक है — साहस जुटाकर अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना।
नवरात्रि वर्षा ऋतु के अंत और फसल के आगमन के समय आती है, और इसे अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है: किसी घर में व्रत और शांत पूजा, कहीं गरबा और डांडिया, तो कहीं भव्य पंडाल और ढाक की थाप। इन सबको जोड़ता है देवी को जीवंत, रक्षा करने वाली मां के रूप में देखने का भाव, और नौ दिन अनुशासन व भक्ति के साथ उनकी ओर मुड़ने का संकल्प।
कैसे मनाया जाता है
- पहले दिन सुबह घटस्थापना मुहूर्त में कलश स्थापित किया जाता है और उसके पास मिट्टी में जौ बोए जाते हैं।
- कई भक्त पूरे नौ दिन या पहले और अंतिम दिन व्रत रखते हैं और फल, दूध, कुट्टू, सिंघाड़ा जैसी चीज़ें खाते हैं।
- कुछ घरों में अखंड ज्योति जलाई जाती है, जो नौ दिनों तक लगातार जलती रहती है।
- दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है और हर दिन देवी के एक रूप को समर्पित होता है।
- अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन होता है: छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर आदर से भोजन कराया जाता है।
- गुजरात में और दुनिया भर के गुजराती समुदायों में हर रात गरबा और डांडिया होता है।
- नवमी का हवन और अंकुरित जौ व कलश का विसर्जन इस अनुष्ठान को पूरा करते हैं।
तिथि कैसे तय होती है
नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होती है। घटस्थापना परंपरा से दिन के पहले तिहाई भाग में की जाती है, इसलिए हमारा पंचांग वह प्रतिपदा पहला दिन मानता है जो दिन के पहले तिहाई भाग को छूती हो। दुर्गाष्टमी वह दिन है जिस दिन सूर्योदय पर अष्टमी हो। महानवमी वह दिन है जिस दिन अपराह्न में, यानी दिन के पांच बराबर भागों में से चौथे भाग में, नवमी हो; इसी से नवरात्रि पूरी होती है और अगला दशहरा आता है। कोई तिथि छूट सकती है या दो सूर्योदय तक रह सकती है, इसलिए नवरात्रि कभी आठ और कभी दस दिन की होती है।
क्षेत्रीय अंतर
बंगाल, असम, ओडिशा और त्रिपुरा में यही दिन दुर्गा पूजा हैं, जिसका मुख्य उत्सव षष्ठी से विजयादशमी तक चलता है। गुजरात गरबा के लिए, कर्नाटक मैसूरु दशहरे के लिए और तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश गोलू यानी सीढ़ियों पर गुड़ियों की सजावट के लिए जाने जाते हैं, जहां नवमी को सरस्वती पूजा होती है। शुक्ल पक्ष होने के कारण अमांत और पूर्णिमांत दोनों गणनाओं में यह आश्विन मास ही है।
तिथियाँ और समय हमारा अपना इंजन गणना करता है (सूर्योदय, तिथि और काल नई दिल्ली के लिए, लाहिड़ी अयनांश)। दूसरे शहर में, या किसी दूसरी परंपरा के पंचांग में, तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है — अपने कुल पुरोहित की परंपरा मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
घटस्थापना कब करनी चाहिए?
प्रतिपदा की सुबह, दिन के पहले तिहाई भाग के भीतर। इस वर्ष का मुहूर्त ऊपर दिया गया है।
कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?
दोनों ही परंपरागत हैं और परिवार अपनी रीति के अनुसार करते हैं: कुछ दुर्गाष्टमी को, कुछ महानवमी को।
नवरात्रि कभी आठ या दस दिन की क्यों होती है?
तिथियां कैलेंडर के दिनों से मेल नहीं खातीं; कोई तिथि छूट सकती है या दो सूर्योदय तक रह सकती है। नौ तिथियां वही रहती हैं, बस दिनों की गिनती बदल जाती है।