एकादशी · 2026
योगिनी एकादशी 2026 — शुक्रवार, 10 जुलाई 2026
योगिनी एकादशी शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को है (नई दिल्ली)। पारण 11 जुलाई को 13:49 – 16:35 के बीच।
नई दिल्ली के लिए गणना
शुक्रवार, 10 जुलाई 2026
- तिथि
- कृष्ण एकादशी: 10 जुलाई, 08:16 – 11 जुलाई, 05:23
- चांद्र मास
- आषाढ़ (पूर्णिमांत) / ज्येष्ठ (अमांत)
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 05:30 / 19:22
- अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले)
- 03:54
- हरि वासर समाप्त
- 11 जुलाई, 10:33
| पारण (व्रत खोलने का समय) | 11 जुलाई, 13:49 – 11 जुलाई, 16:35 |
|---|
- गौण एकादशी: 11 जुलाई 2026
- वैष्णव एकादशी: 11 जुलाई 2026
नियम: स्मार्त नियम: सूर्योदय के समय एकादशी वाला दिन, अगली सुबह पारण के लिए द्वादशी रहे। इस बार एकादशी किसी सूर्योदय को नहीं छूती (क्षय), इसलिए जिस दिन आरंभ हो उस दिन।
स्मार्त और वैष्णव
इस बार दिन अलग हैं। 10 जुलाई 2026 को अरुणोदय (03:54) के समय दशमी चल रही है, और एकादशी 08:16 पर शुरू होती है। स्मार्त (गृहस्थ) परंपरा सूर्योदय की एकादशी देखती है और व्रत 10 जुलाई 2026 को रखती है; वैष्णव (इस्कॉन आदि) परंपरा दशमी-विद्धा दिन छोड़कर व्रत शनिवार, 11 जुलाई 2026 को रखती है। गौण एकादशी 11 जुलाई 2026 को है — संन्यासी, विधवाएँ और मोक्ष की कामना करने वाले इसे रखते हैं।
वैष्णव दिन केवल अरुणोदय वाले सरल नियम से है; इस्कॉन अपना कैलेंडर अपने स्थान के लिए बनाता है, इसलिए अपने मंदिर से मिला लें।
पारण कैसे तय हुआ
व्रत अगले दिन द्वादशी में खोला जाता है — हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो 10:33 पर समाप्त होता है) के बाद, हो सके तो प्रातः काल में, और मध्याह्न से बचते हुए। द्वादशी रहते पारण न हो तो उसका पुण्य कम माना जाता है।
सभी समय हमारे अपने इंजन से, नई दिल्ली के सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय पर। दूसरे शहर में समय कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी दिन भी। अपने शहर का पंचांग
योगिनी एकादशी का महत्व
योगिनी एकादशी आषाढ़ के कृष्ण पक्ष (अमांत में ज्येष्ठ) में आती है — देवशयनी और चातुर्मास से पहले की अंतिम एकादशी। परंपरा इसे आरोग्य और छूटे हुए कर्तव्य के प्रायश्चित से जोड़ती है।
व्रत कथा
अलकापुरी में माली हेममाली हर सुबह कुबेर की शिव-पूजा के लिए फूल लाता था। एक दिन वह अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ घर पर रुक गया और फूल देर से पहुँचे। नाराज़ कुबेर ने उसे चर्म रोग का शाप देकर नगर से निकाल दिया। बहुत भटकने के बाद हेममाली मार्कंडेय ऋषि के आश्रम पहुँचा, जिन्होंने उसे योगिनी एकादशी रखने को कहा। उसने व्रत रखा और वह स्वस्थ हो गया।
कथा का सार, पद्म पुराण और भविष्योत्तर पुराण के एकादशी माहात्म्य से।
एकादशी कैसे रखें
- व्रत एकादशी के सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक चलता है। बहुत से लोग दशमी की शाम, व्रत शुरू होने से पहले, एक बार सादा और सात्विक भोजन करते हैं।
- परंपरा में अन्न और दालें, खासकर चावल, नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, मेवे और फलाहार — साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू — आम तौर पर लिए जाते हैं; हर परिवार का रिवाज थोड़ा अलग होता है।
- व्रत के कई स्तर हैं: निर्जला (बिना पानी), फलाहार (फल और दूध), या बिना अन्न का एक समय भोजन। जो आपके शरीर के अनुकूल हो, वही चुनें; सबके लिए एक ही नियम ज़रूरी नहीं है।
- दिन भगवान विष्णु की पूजा में बीतता है: तुलसी, दीपक, विष्णु सहस्रनाम या ओम नमो भगवते वासुदेवाय जैसा मंत्र, और उस एकादशी की कथा। तुलसी के पत्ते प्रायः एक दिन पहले तोड़ लिए जाते हैं, क्योंकि बहुत से लोग एकादशी पर तुलसी नहीं तोड़ते।
- कुछ लोग रात में भजन-कीर्तन के साथ जागरण करते हैं, और बहुत से लोग अन्न या भोजन का दान करते हैं।
- पारण द्वादशी को सूची में दिए समय के भीतर होता है: हरि वासर के बाद, हो सके तो सुबह के समय, और द्वादशी समाप्त होने से पहले। व्रत प्रायः किसी हल्की चीज़ से, अक्सर थोड़ा तुलसी-जल लेकर खोला जाता है।
- गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, बुज़ुर्ग, मधुमेह के रोगी, नियमित दवा लेने वाले या अस्वस्थ लोग हल्का व्रत रख सकते हैं — फल और दूध, या एक समय भोजन — या केवल पूजा-पाठ से दिन मना सकते हैं। कोई बीमारी हो तो व्रत से पहले डॉक्टर से पूछ लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
योगिनी एकादशी 2026 कब है?
योगिनी एकादशी शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को है (नई दिल्ली)। कृष्ण एकादशी तिथि 10 जुलाई, 08:16 – 11 जुलाई, 05:23 तक रहती है।
योगिनी एकादशी का पारण कब है?
पारण शनिवार, 11 जुलाई 2026 को 13:49 – 16:35 के बीच, हरि वासर के बाद और द्वादशी रहते।
क्या वैष्णव योगिनी एकादशी अलग दिन है?
हाँ। 10 जुलाई 2026 को अरुणोदय के समय दशमी चल रही है, इसलिए वैष्णव परंपरा में व्रत शनिवार, 11 जुलाई 2026 को रखा जाता है।