अवधि · 2026
पितृ पक्ष 2026: श्राद्ध की तिथियाँ और समय
पितृ पक्ष में हर परिवार उस तिथि पर श्राद्ध करता है जिस तिथि को माता-पिता या पूर्वज का देहांत हुआ था; इस पृष्ठ पर हर तिथि का दिन और दोपहर के वे मुहूर्त हैं जिनमें श्राद्ध होता है।
2026 में पितृ पक्ष श्राद्ध तिथियाँ
| श्राद्ध तिथि | दिन | कुतुप | रौहिण | अपराह्न |
|---|---|---|---|---|
| पूर्णिमा25 सितंबर, 23:07 – 26 सितंबर, 22:18 | 26 सितंबर 2026शनिवार | 11:48 – 12:36 | 12:36 – 13:24 | 13:24 – 15:48 |
| कृष्ण प्रतिपदा26 सितंबर, 22:18 – 27 सितंबर, 20:59 | 27 सितंबर 2026रविवार | 11:47 – 12:35 | 12:35 – 13:23 | 13:23 – 15:47 |
| कृष्ण द्वितीया27 सितंबर, 20:59 – 28 सितंबर, 19:14 | 28 सितंबर 2026सोमवार | 11:47 – 12:35 | 12:35 – 13:23 | 13:23 – 15:47 |
| कृष्ण तृतीया28 सितंबर, 19:14 – 29 सितंबर, 17:10 | 29 सितंबर 2026मंगलवार | 11:47 – 12:35 | 12:35 – 13:22 | 13:22 – 15:46 |
| कृष्ण चतुर्थी29 सितंबर, 17:10 – 30 सितंबर, 14:55 | 30 सितंबर 2026बुधवार | 11:47 – 12:34 | 12:34 – 13:22 | 13:22 – 15:45 |
| कृष्ण पंचमी30 सितंबर, 14:55 – 1 अक्टूबर, 12:35 | 30 सितंबर 2026बुधवार | 11:47 – 12:34 | 12:34 – 13:22 | 13:22 – 15:45 |
| कृष्ण षष्ठी1 अक्टूबर, 12:35 – 2 अक्टूबर, 10:15 | 1 अक्टूबर 2026गुरुवार | 11:46 – 12:34 | 12:34 – 13:21 | 13:21 – 15:44 |
| कृष्ण सप्तमी2 अक्टूबर, 10:15 – 3 अक्टूबर, 08:00 | 2 अक्टूबर 2026शुक्रवार | 11:46 – 12:34 | 12:34 – 13:21 | 13:21 – 15:43 |
| कृष्ण अष्टमी3 अक्टूबर, 08:00 – 4 अक्टूबर, 05:52 | 3 अक्टूबर 2026शनिवार | 11:46 – 12:33 | 12:33 – 13:20 | 13:20 – 15:42 |
| कृष्ण नवमी4 अक्टूबर, 05:52 – 5 अक्टूबर, 03:54 | 4 अक्टूबर 2026रविवार | 11:46 – 12:33 | 12:33 – 13:20 | 13:20 – 15:42 |
| कृष्ण दशमी5 अक्टूबर, 03:54 – 6 अक्टूबर, 02:07 | 5 अक्टूबर 2026सोमवार | 11:45 – 12:32 | 12:32 – 13:20 | 13:20 – 15:41 |
| कृष्ण एकादशी6 अक्टूबर, 02:07 – 7 अक्टूबर, 00:34 | 6 अक्टूबर 2026मंगलवार | 11:45 – 12:32 | 12:32 – 13:19 | 13:19 – 15:40 |
| कृष्ण द्वादशी7 अक्टूबर, 00:34 – 7 अक्टूबर, 23:16 | 7 अक्टूबर 2026बुधवार | 11:45 – 12:32 | 12:32 – 13:19 | 13:19 – 15:39 |
| कृष्ण त्रयोदशी7 अक्टूबर, 23:16 – 8 अक्टूबर, 22:16 | 8 अक्टूबर 2026गुरुवार | 11:45 – 12:31 | 12:31 – 13:18 | 13:18 – 15:38 |
| कृष्ण चतुर्दशी8 अक्टूबर, 22:16 – 9 अक्टूबर, 21:36 | 9 अक्टूबर 2026शुक्रवार | 11:44 – 12:31 | 12:31 – 13:18 | 13:18 – 15:38 |
| अमावस्या9 अक्टूबर, 21:36 – 10 अक्टूबर, 21:20 | 10 अक्टूबर 2026शनिवार | 11:44 – 12:31 | 12:31 – 13:17 | 13:17 – 15:37 |
समय नई दिल्ली की घड़ी (IST) में, हमारे अपने इंजन से, लाहिड़ी अयनांश। कुतुप, रौहिण और अपराह्न आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से कुछ मिनट खिसकते हैं।
पितृ पक्ष श्राद्ध तिथियाँ क्या है
पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा के बाद का कृष्ण पक्ष है (पूर्णिमांत में आश्विन कृष्ण), जो सर्व पितृ अमावस्या पर पूरा होता है। पूर्णिमा का श्राद्ध इसके एक दिन पहले होता है।
श्राद्ध दोपहर में किया जाता है: ग्रंथ कुतुप मुहूर्त (दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ), रौहिण मुहूर्त (नौवाँ) और उसके बाद के अपराह्न को उचित समय बताते हैं। जल और तिल से तर्पण, पिंडदान, और ब्राह्मण, गाय, कौए व कुत्ते को भोजन इसके मुख्य अंग हैं।
कुछ दिनों के विशेष नाम हैं: भरणी श्राद्ध, माताओं के लिए नवमी (मातृ नवमी), दुर्घटना या हिंसा में मृत लोगों के लिए चतुर्दशी, और सबके लिए — उनके भी जिनकी तिथि ज्ञात न हो — सर्व पितृ अमावस्या।
परंपरा में क्या टाला जाता है
ये रिवाज हैं, नियम नहीं; परिवारों और क्षेत्रों में मान्यता अलग है।
- एक प्रचलित रिवाज के अनुसार विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और मुंडन।
- नए कपड़े, गहने या वाहन की ख़रीद — उन परिवारों में जो रिवाज कड़ाई से मानते हैं।
- श्राद्ध के दिन घर में मांसाहार, और प्रायः प्याज़-लहसुन।
यह पखवाड़ा कृतज्ञता का समय है, डर का नहीं। रोज़ का काम चलता रहता है, और ज़रूरतमंदों को भोजन देना भी अर्पण का हिस्सा माना जाता है।
हम इसे कैसे निकालते हैं
हर श्राद्ध तिथि उस दिन होती है जिस दिन वह अपराह्न में अधिक व्याप्त हो; इसलिए कभी दो तिथियाँ एक दिन पड़ती हैं और कोई तारीख़ छूट जाती है। कुतुप, रौहिण और अपराह्न नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाले गए हैं (दिन को पंद्रह मुहूर्तों में बाँटकर)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्राद्ध किस दिन करें?
देहांत की तिथि पर, तारीख़ चाहे जो हो: तालिका में तिथि देखकर उसका दिन लें। तिथि ज्ञात न हो तो सर्व पितृ अमावस्या सबके लिए है।
श्राद्ध किस समय होता है?
दोपहर में, कुतुप मुहूर्त से अपराह्न तक। तालिका में हर दिन के तीनों समय दिए हैं।
दो तिथियाँ एक दिन क्यों पड़ती हैं?
तिथि सौर दिन नहीं है। कोई तिथि छोटी हो और उसे अपना अपराह्न न मिले, तो उसका श्राद्ध अगली तिथि के साथ उसी दिन होता है।