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अवधि · 2026

पंचक 2026: सभी तिथियाँ और समय

पंचक हर महीने के वे चार-पाँच दिन हैं जब चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक, राशिचक्र के अंतिम पाँच नक्षत्र-भागों से गुज़रता है।

2026 में पंचक

आरंभसमाप्तिप्रकार
21 जनवरी, 01:35मंगलवार25 जनवरी, 13:35अग्नि पंचक
17 फ़रवरी, 09:05मंगलवार21 फ़रवरी, 19:07अग्नि पंचक
16 मार्च, 18:14सोमवार21 मार्च, 02:28राज पंचक
13 अप्रैल, 03:44रविवार17 अप्रैल, 12:02रोग पंचक
10 मई, 12:13रविवार14 मई, 22:34रोग पंचक
6 जून, 19:03शनिवार11 जून, 08:16मृत्यु पंचक
4 जुलाई, 00:48शुक्रवार8 जुलाई, 16:00चोर पंचक
31 जुलाई, 06:38शुक्रवार4 अगस्त, 21:54चोर पंचक
27 अगस्त, 13:35गुरुवार1 सितंबर, 03:23पंचक (बिना विशेष नाम)
23 सितंबर, 21:57बुधवार28 सितंबर, 10:16पंचक (बिना विशेष नाम)
21 अक्टूबर, 07:00बुधवार25 अक्टूबर, 19:22पंचक (बिना विशेष नाम)
17 नवंबर, 15:30मंगलवार22 नवंबर, 05:55अग्नि पंचक
14 दिसंबर, 22:35सोमवार19 दिसंबर, 15:58राज पंचक

समय नई दिल्ली की घड़ी (IST) में, हमारे अपने इंजन से, लाहिड़ी अयनांश।

पंचक क्या है

पंचक का अर्थ है “पाँच का समूह”: धनिष्ठा का उत्तरार्ध, शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती — राशिचक्र का वह भाग जहाँ चंद्रमा कुंभ और मीन में होता है। चंद्रमा इसे लगभग साढ़े चार दिन में पार करता है, हर नाक्षत्र मास में एक बार, इसलिए साल में तेरह या चौदह पंचक आते हैं।

मुहूर्त ग्रंथ पंचक का नाम उस वार से रखते हैं जिस दिन वह शुरू हो: रोग (रविवार), राज (सोमवार), अग्नि (मंगलवार), चोर (शुक्रवार) और मृत्यु (शनिवार)। बुधवार या गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक का कोई विशेष नाम नहीं, और बहुत से पंचांग उसे हल्का मानते हैं। यहाँ वार हिंदू दिन है, जो सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए भोर से पहले शुरू होने वाला पंचक पिछले वार का माना जाता है।

पंचक मुहूर्त की, यानी समय चुनने की, एक परंपरा है; यह कोई भविष्यवाणी नहीं। जीवन के अधिकतर काम इसमें चलते रहते हैं, और बहुत से परिवार इसे मानते ही नहीं।

परंपरा में क्या टाला जाता है

ये रिवाज हैं, नियम नहीं; परिवारों और क्षेत्रों में मान्यता अलग है।

  • लकड़ी, घास या ईंधन इकट्ठा करना और उसका भंडार करना।
  • छत डलवाना या मकान की ऊपरी मंज़िल शुरू करना।
  • पलंग या चारपाई बनवाना या ख़रीदना।
  • दक्षिण दिशा की यात्रा शुरू करना।
  • किसी का देहांत हो जाए तो यह रिवाज मानने वाले परिवार अंत्येष्टि में शव के साथ कुशा के पाँच पुतले रखते हैं (पंचक शांति); अंत्येष्टि टाली नहीं जाती।

रोज़ का काम, पढ़ाई, दूसरी दिशाओं की यात्रा, पूजा, त्योहार और अधिकतर ख़रीदारी सामान्य रूप से चलती है। मुहूर्त ग्रंथ पंचक के नियम ऊपर बताए विशेष कामों पर लगाते हैं, पूरे जीवन पर नहीं।

हम इसे कैसे निकालते हैं

हम चंद्रमा का निरयण भोगांश (लाहिड़ी अयनांश) गणना करके वे क्षण निकालते हैं जब वह 300° (धनिष्ठा का तीसरा चरण, कुंभ का आरंभ) और 360° (रेवती का अंत) पर पहुँचता है। आरंभ और समाप्ति नई दिल्ली के समय में मिनट तक दिए हैं; ये क्षण हर जगह एक ही हैं, केवल घड़ी का समय समय-क्षेत्र से बदलता है। समाप्ति के क्षण भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) के चंद्र-मेष-प्रवेश से एक मिनट के भीतर मिलते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पंचक में हर काम अशुभ है?

नहीं। ग्रंथ पंचक में कुछ विशेष कामों पर रोक लगाते हैं, जैसे ईंधन इकट्ठा करना, छत डलवाना, चारपाई बनवाना और दक्षिण की यात्रा। रोज़ का काम, पूजा और त्योहार इससे प्रभावित नहीं होते।

पंचक का समय पूरे भारत में एक जैसा क्यों है?

पंचक केवल इस पर निर्भर है कि चंद्रमा तारों के बीच कहाँ है, इसलिए यह हर जगह एक ही क्षण शुरू होता है। पूरे देश में IST चलता है, इसलिए घड़ी का समय भी एक है; केवल वार का नियम स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर है।

मृत्यु पंचक क्या है?

शनिवार को शुरू होने वाला पंचक। नाम के बावजूद यह मुहूर्त का एक नाम है, भविष्यवाणी नहीं; इसमें भी वही रिवाज माने जाते हैं जो किसी भी पंचक में, बस मानने वाले थोड़ी अधिक सावधानी रखते हैं।