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पूजा विधि

पूजा विधि: हर व्रत और त्योहार की पूजा कैसे करें

करवा चौथ, दिवाली लक्ष्मी पूजा, छठ, सत्यनारायण और दूसरे व्रतों की पूजा विधि: सामग्री, घर पर पूजा का क्रम, रिवाज और मुहूर्त कहाँ देखें।

  • सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम
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यह घर पर पूजा करने का आम तरीका है। आपके परिवार की रीति सबसे पहले है: क्षेत्र के हिसाब से क्रम, सामग्री और शब्द बदलते हैं, और मन से की गई सादी पूजा भी पूरी है। इसके लिए किसी से कुछ खरीदने की ज़रूरत नहीं।

इस पृष्ठ पर

पूजा विधि यानी पूजा करने का क्रम: क्या तैयार रखें, क्या चढ़ाएँ, किस क्रम में, और व्रत कैसे शुरू और पूरा हो। इस खंड में प्रमुख व्रतों और त्योहारों की पूजा विधि वैसे दी गई है जैसे परिवार घर पर करते हैं, हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में, और जहाँ प्रांतों के ढंग अलग हैं वहाँ वे भी।

ज़्यादातर घरेलू पूजाओं का ढाँचा

त्योहार कोई भी हो, घर की ज़्यादातर पूजाएँ एक ही मोटे क्रम में होती हैं। पहले जगह साफ़ की जाती है और चौकी लगाई जाती है। फिर संकल्प लिया जाता है: अपनी भाषा में दो-चार शब्द कि आप क्या कर रहे हैं और क्यों। सबसे पहले गणेश जी का पूजन होता है। उसके बाद उस दिन के देवता की मुख्य पूजा होती है, जानी-पहचानी चीज़ों से — जल, रोली या कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप, दीया और भोग। फिर कथा सुनी जाती है, आरती गाई जाती है और प्रसाद बाँटा जाता है। व्रत पारण से, या चाँद या सूरज के दर्शन से पूरा होता है, यह व्रत पर निर्भर है।

यहाँ हर पृष्ठ इसी ढाँचे को एक व्रत या त्योहार के लिए भरता है: उसकी अपनी सामग्री, उसके अपने ख़ास चरण और उसके आसपास पनपे रिवाज।

रिवाज, शर्तें नहीं

हर विधि पृष्ठ पर परिवारों के रिवाज लिखे हैं, और उन्हें रिवाज ही कहा गया है। प्रांत, समाज और घर अपने-अपने ढंग से पूजा करते हैं, और आपके घर की रीति सबसे पहले है। मन लगाकर की गई सादी पूजा भी पूरी है; इसके लिए किसी से कुछ खरीदने की ज़रूरत नहीं, और कोई चरण छूट जाए तो उससे कोई विपदा नहीं आती। गर्भवती, बीमार और बुज़ुर्ग लोग हल्का व्रत रखते हैं, और व्रत के किसी भी नियम से पहले डॉक्टर की सलाह है।

समय कहाँ से आता है

विधि पृष्ठों पर कोई तारीख़ या समय नहीं छपता। हर व्रत का दिन और मुहूर्त हमारा पंचांग शास्त्रीय नियम से निकालता है, और वे हर साल और हर शहर में बदलते हैं। हर विधि अपने व्रत या त्योहार के पृष्ठ से जुड़ी है, जो त्योहार कैलेंडर में है, और उन औज़ारों से भी जो उस पूजा के काम के हैं: मुहूर्त खोज, आपके शहर का चौघड़िया, या चाँद देखकर खुलने वाले व्रतों के लिए चंद्रोदय।

विधि और कथा साथ-साथ

हर विधि के साथ उसकी व्रत कथा का पृष्ठ भी है, जिसमें पूजा में सुनाई जाने वाली कहानी है। तैयारी विधि से करें, और पूजा के समय कथा सुनें।

हर पूजा के साथ उसकी कथा भी है: व्रत कथा। तिथियाँ त्योहार कैलेंडर में हैं।

स्रोत

  • उत्तर, पूर्व और पश्चिम भारत के घरों की रीति
  • व्रत पुस्तकें और घरेलू पूजा का प्रचलित क्रम (संकल्प, गणेश पूजन, मुख्य पूजन, कथा, आरती)

यह पृष्ठ सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम ने लिखा है। कथाएँ हमारे अपने शब्दों में हैं; जहाँ परंपराएँ अलग हैं वहाँ यह कहते हैं। तिथि और समय हमारे पंचांग की गणना से हैं, लेख में नहीं लिखे जाते। हमारी पद्धति