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चौघड़िया · 178 शहर

आज का चौघड़िया

दिन और रात के आठ-आठ भाग, हर शहर के अपने सूर्योदय और सूर्यास्त से। अभी चल रहा चौघड़िया चिह्नित है, और हर शहर के पन्ने पर अगले 7 दिन की तालिका है।

दिल्ली · रविवार, 27 सितंबर 2026

यहाँ दिल्ली का समय दिखाया गया है। अपने शहर का समय नीचे की सूची से चुनें — हर शहर का समय उसके अपने सूर्योदय से निकलता है।

सूर्योदय 06:11सूर्यास्त 18:11दिनमान 12 घं 0 मि · हर भाग 90 मिनटरात्रिमान 12 घं 0 मि · हर भाग 90 मिनट

दिन का चौघड़िया

  • उद्वेगत्याज्य06:11 – 07:41
  • चरसामान्य07:41 – 09:11
  • लाभअनुकूल09:11 – 10:41
  • अमृतअनुकूल10:41 – 12:11
  • कालत्याज्य12:11 – 13:41
  • शुभअनुकूल13:41 – 15:11
  • रोगत्याज्य15:11 – 16:41
  • उद्वेगत्याज्य16:41 – 18:11

रात का चौघड़िया

  • शुभअनुकूल18:11 – 19:42
  • अमृतअनुकूल19:42 – 21:12
  • चरसामान्य21:12 – 22:42
  • रोगत्याज्य22:42 – 00:12
  • कालत्याज्य00:12 – 01:42
  • लाभअनुकूल01:42 – 03:12
  • उद्वेगत्याज्य03:12 – 04:42
  • शुभअनुकूल04:42 – 06:12
दिल्ली: 7 दिन की तालिका और पूरा विवरण

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चौघड़िया क्या है

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बाँटता है। हर भाग का एक नाम होता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल और रोग। परंपरा में अमृत, शुभ और लाभ किसी काम की शुरुआत के लिए अच्छे माने जाते हैं, चर यात्रा और आने-जाने के लिए, और उद्वेग, काल व रोग में नया काम टाला जाता है।

गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी भारत में इसका चलन सबसे अधिक है — रोज़ के छोटे निर्णयों के लिए: कब निकलें, दुकान कब खोलें, भुगतान या काग़ज़ पर हस्ताक्षर कब करें। नाम 'चौ' (चार) और 'घड़ी' से बना है: हर भाग लगभग चार घड़ी, यानी करीब डेढ़ घंटे का होता है।

ये समय कैसे निकाले गए

हम अपने इंजन से इसी शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त लेते हैं (क्षितिज पर सूर्य का ऊपरी किनारा, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन सहित) और दिनमान को आठ बराबर भागों में बाँटते हैं; सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात भी इसी तरह बँटती है। हर भाग ठीक डेढ़ घंटे का केवल विषुव के आसपास होता है। सर्दियों में दिन के भाग छोटे और रात के बड़े होते हैं, गर्मियों में इसका उल्टा।

दिन का पहला भाग वार के स्वामी ग्रह का होता है और बाकी होरा क्रम (सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल) में चलते हैं — इसीलिए हर वार अलग चौघड़िया से शुरू होता है। रात का चौघड़िया उसी क्रम में पाँच कदम आगे से शुरू होता है। कोई तय तालिका नहीं: शहर बदलें तो हर समय उसके सूर्योदय के साथ खिसक जाता है।

सहज भाव से उपयोग

चौघड़िया रोज़ के समय का एक हल्का साधन है, पूरे दिन पर कोई फ़ैसला नहीं। विवाह, गृह प्रवेश या किसी बड़े आरंभ के लिए परिवार पूरा मुहूर्त देखते हैं, जिसमें तिथि, नक्षत्र आदि भी तौले जाते हैं। जहाँ शुभ चौघड़िया राहु काल से मिलता हो, वहाँ बहुत से लोग उतना हिस्सा छोड़ देते हैं।

तिथि, नक्षत्र और बाकी सब एक साथ देखने के लिए आज का पंचांग देखें।