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पूजा विधि · धनतेरस

धनतेरस पूजा विधि: सामग्री, पूजा का क्रम और यम दीपक

धनतेरस की पूजा विधि घर पर: पूजा सामग्री, शाम को धन्वंतरि, कुबेर और लक्ष्मी पूजन, दक्षिण की ओर यम का दीपक, और नए बर्तन लाने की रीति।

  • सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम
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यह घर पर पूजा करने का आम तरीका है। आपके परिवार की रीति सबसे पहले है: क्षेत्र के हिसाब से क्रम, सामग्री और शब्द बदलते हैं, और मन से की गई सादी पूजा भी पूरी है। इसके लिए किसी से कुछ खरीदने की ज़रूरत नहीं।

तिथि और मुहूर्त

तिथि और समय हमारे अपने पंचांग की गणना से हैं, और शहर के साथ बदलते हैं। यहाँ से देखें:

इस पृष्ठ पर

धनतेरस की पूजा दीवाली से पहले की त्रयोदशी की शाम होती है, जिसमें गणेश जी, धन्वंतरि, कुबेर और लक्ष्मी जी का पूजन होता है, और अंत में यमराज के नाम का चौमुखा दीया जलाकर घर के बाहर दक्षिण की ओर रखा जाता है। संक्षेप में: घर साफ़ करके रंगोली बनाएँ, पूजा की चौकी सजाएँ, शाम के मुहूर्त में पूजन करें, कथा सुनें, और फिर द्वार पर यम का दीया रखें।

त्योहार का दिन और आपके शहर में पूजा का मुहूर्त, यानी प्रदोष काल, वृषभ लग्न और त्रयोदशी का मेल, धनतेरस की तिथि वाले पृष्ठ पर है। यहाँ वे समय नहीं दोहराए गए, क्योंकि वे हर साल और हर शहर में बदलते हैं।

पूजा सामग्री: क्या-क्या तैयार रखें

  • चौकी और उस पर बिछाने को लाल या पीला कपड़ा
  • गणेश जी, लक्ष्मी जी, कुबेर और धन्वंतरि के चित्र या छोटी मूर्तियाँ; लक्ष्मी-गणेश वाला दीवाली का एक छपा चित्र भी चलेगा, और कुबेर के लिए एक सिक्का रखा जा सकता है
  • आम के पत्तों वाला जल का कलश, या सादा लोटा
  • रोली, हल्दी, अक्षत, सिंदूर, फूल, थोड़ा साबुत धनिया
  • पूजा के लिए घी के दीये, और द्वार-खिड़कियों के लिए मिट्टी के छोटे दीये
  • यम का दीया: मिट्टी या गेहूँ के आटे का चौमुखा दीया, सरसों का तेल और चार बत्तियाँ
  • भोग: मिठाई, फल, खील-बताशे, या जो घर में बनता हो; महाराष्ट्र में बहुत-से घर धन्वंतरि को नीम की पत्तियाँ चीनी या गुड़ के साथ चढ़ाते हैं
  • इस दिन लाया गया नया बर्तन या सिक्का, जो लक्ष्मी जी के आगे रखा जाता है
  • धूप, घंटी, आचमन के लिए जल की कटोरी
  • द्वार के लिए रंगोली के रंग या चावल का आटा, और चावल के घोल या रोली से बने लक्ष्मी जी के पदचिह्न

पूजा का क्रम

  1. सफ़ाई और सजावट। दिन में घर की सफ़ाई पूरी कर लें, दहलीज़ धोकर रंगोली बनाएँ। बहुत-से घर बाहर से भीतर की ओर आते लक्ष्मी जी के छोटे पदचिह्न बनाते हैं।
  2. स्नान और संकल्प। शाम को नहाकर पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठें और अपने शब्दों में कहें कि आप परिवार के स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए धनतेरस की पूजा कर रहे हैं।
  3. चौकी सजाएँ। कपड़ा बिछाकर उस पर गणेश जी, लक्ष्मी जी, कुबेर और धन्वंतरि को स्थापित करें। एक ओर कलश रखें। नया बर्तन, सिक्का या बही आगे रख दें।
  4. पहले गणेश जी। घी का मुख्य दीया जलाएँ। गणेश जी को रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएँ।
  5. धन्वंतरि पूजन। धन्वंतरि को फूल, अक्षत और भोग चढ़ाएँ और घर में सबकी सेहत के लिए प्रार्थना करें। बहुत-से लोग ॐ धन्वंतरये नमः जैसा छोटा नाम-मंत्र बोलते हैं।
  6. कुबेर और लक्ष्मी जी। कुबेर और लक्ष्मी जी को रोली, हल्दी, अक्षत और फूल चढ़ाएँ, मिठाई, खील-बताशे और धनिया का भोग लगाएँ। नए बर्तन या सिक्के पर थोड़ी रोली लगाएँ। घर या दुकान में तिजोरी हो तो उसे पोंछकर उस पर स्वस्तिक बनाएँ।
  7. कथा सुनें। धनतेरस की कथा सुनें या पढ़ें — राजा हिम का बेटा और दीयों की रात, और समुद्र से निकले धन्वंतरि।
  8. घर के दीये। मिट्टी के छोटे दीये जलाकर मुख्य द्वार, खिड़कियों, रसोई और पानी की जगह पर रखें। बहुत-से घरों में त्रयोदशी के नाते तेरह दीये जलते हैं।
  9. आरती। लक्ष्मी जी की आरती ओम जय लक्ष्मी माता गाएँ, और घर की रीति हो तो धन्वंतरि की आरती भी।
  10. यम दीपदान। चौमुखे दीये में सरसों का तेल भरकर चारों बत्तियाँ जलाएँ। उसे मुख्य द्वार से बाहर ले जाकर ज़मीन पर या अनाज की छोटी ढेरी पर दक्षिण की ओर मुँह करके रखें। हाथ जोड़कर घर के सब लोगों की लंबी आयु की प्रार्थना करें। कई घरों में यह काम घर के सबसे बड़े सदस्य करते हैं, और दीया रखने के बाद उसे पलटकर नहीं देखा जाता, न भीतर लाया जाता है।
  11. प्रसाद। मिठाई बाँटें और सब साथ भोजन करें।

समय कैसे देखें

दो समय काम के हैं। पूजा शाम के उस मुहूर्त में होती है जहाँ प्रदोष काल, स्थिर वृषभ लग्न और त्रयोदशी एक साथ हों; आपके शहर का यह मुहूर्त धनतेरस की तिथि वाले पृष्ठ और मुहूर्त पृष्ठ पर है। यम का दीया सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में जलाया जाता है। जो परिवार पूजा या ख़रीदारी अच्छे चौघड़िया में शुरू करना पसंद करते हैं, वे अपने शहर का चौघड़िया देख सकते हैं। वृषभ लग्न का समय छोटा पड़े तो बहुत-से लोग प्रदोष काल में ही पूजा कर लेते हैं और उसके बाद यम का दीया रखते हैं।

परिवारों के रीति-रिवाज

ये रिवाज हैं, शर्तें नहीं; आपके घर की अपनी रीति सबसे पहले है।

  • धातु का सामान। बहुत-से परिवार इस दिन स्टील, पीतल या ताँबे का नया बर्तन, या चाँदी-सोने का छोटा सिक्का लाते हैं और पूजा में लक्ष्मी जी के आगे रखते हैं। आम तौर पर कोई छोटी चीज़ ही ली जाती है, और बहुत-से लोग कुछ नहीं लेते।
  • नई झाड़ू। उत्तर भारत के बहुत-से घरों में धनतेरस पर नई झाड़ू आती है, पुराने को बुहारकर बाहर करने के भाव से।
  • धनिया। लक्ष्मी जी को साबुत धनिया चढ़ाया जाता है, और कुछ घरों में बाद में उसके कुछ दाने गमले में बो दिए जाते हैं या बचत के साथ रख दिए जाते हैं।
  • उधार नहीं। बहुत-से व्यापारी और घर इस दिन पैसा उधार देने या धातु की चीज़ किसी को देने से बचते हैं।
  • तेरह दीये। कुछ परिवार त्रयोदशी के सम्मान में तेरह दीये जलाते हैं।
  • दीये की सावधानी। यम का दीया पक्की जगह पर, पर्दों, सूखे पत्तों और बच्चों के कपड़ों से दूर रखें, और जलते दीयों को आग पकड़ने वाली चीज़ों के पास अकेला न छोड़ें।

प्रांतों के अपने ढंग

  • उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान: शाम को लक्ष्मी-कुबेर पूजन, द्वार पर यम का दीया, और बर्तन-सिक्कों के लिए भरे हुए बाज़ार।
  • गुजरात: यह दिन धन तेरस या धन पूजन कहलाता है, और सिक्के, गहने और तिजोरी धोकर पूजे जाते हैं।
  • महाराष्ट्र: धन्वंतरि पूजन प्रमुख है, एक दिन पहले गाय-बछड़े की वसु बारस होती है, और नीम-चीनी चढ़ाकर प्रसाद में खाई जाती है।
  • आयुर्वेद के वैद्य और विद्यालय पूरे देश में धन्वंतरि पूजन करते हैं और इसे आयुर्वेद का दिन मानते हैं।
  • दक्षिण भारत: यहाँ उत्सव का केंद्र नरक चतुर्दशी है, हालाँकि इस दिन सोना लेने का चलन अब वहाँ भी आम हो गया है।

पूजा के बाद

बहुत-से घरों की रीति है कि नया बर्तन अगले दिन से रसोई में काम आने लगता है। दो दिन बाद दीवाली है; उसकी कथाएँ दीवाली लक्ष्मी पूजा की कथा पृष्ठ पर हैं, और दीवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनतेरस पर यम का दीपक किस दिशा में रखा जाता है?

दक्षिण दिशा की ओर, जो यमराज की दिशा मानी जाती है। मिट्टी या आटे का चौमुखा दीया, सरसों के तेल और चार बत्तियों के साथ, शाम को जलाकर मुख्य द्वार के बाहर या आँगन के किनारे दक्षिण की ओर मुँह करके रखा जाता है।

धनतेरस की पूजा में किन देवताओं का पूजन होता है?

पहले गणेश जी, फिर आरोग्य के लिए धन्वंतरि, धन की रक्षा के लिए कुबेर, और लक्ष्मी जी, जिनका दीवाली से दो दिन पहले घर में स्वागत होता है। अंत में यमराज के लिए दीपदान होता है।

क्या धनतेरस पर धातु का सामान लेना ज़रूरी है?

नहीं। नया बर्तन, चाँदी का छोटा सिक्का या झाड़ू लाना समृद्धि के स्वागत की रीति है, जिसे बहुत-से घर छोटे रूप में निभाते हैं। पूजा के लिए कुछ भी नया होना ज़रूरी नहीं।

इसे भी पढ़ें

स्रोत

  • उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र के घरों की रीति
  • धनत्रयोदशी और यम दीपदान पर उत्तर भारत की त्योहार और व्रत पुस्तकें, पूजा के क्रम के लिए

यह पृष्ठ सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम ने लिखा है। कथाएँ हमारे अपने शब्दों में हैं; जहाँ परंपराएँ अलग हैं वहाँ यह कहते हैं। तिथि और समय हमारे पंचांग की गणना से हैं, लेख में नहीं लिखे जाते। हमारी पद्धति