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पूजा विधि · नाग पंचमी

नाग पंचमी पूजा विधि: सामग्री और घर पर पूजा का क्रम

नाग पंचमी की पूजा विधि क्रम से: दीवार पर नाग बनाना, पूजा सामग्री, चित्र या प्रतिमा के आगे दूध रखना, और जीवित साँपों को दूध क्यों न पिलाएँ।

  • सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम
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यह घर पर पूजा करने का आम तरीका है। आपके परिवार की रीति सबसे पहले है: क्षेत्र के हिसाब से क्रम, सामग्री और शब्द बदलते हैं, और मन से की गई सादी पूजा भी पूरी है। इसके लिए किसी से कुछ खरीदने की ज़रूरत नहीं।

तिथि और मुहूर्त

तिथि और समय हमारे अपने पंचांग की गणना से हैं, और शहर के साथ बदलते हैं। यहाँ से देखें:

इस पृष्ठ पर

नाग पंचमी की पूजा नाग देवताओं की पूजा है, जो घर की दीवार पर बने नागों के चित्र या छोटी प्रतिमा के आगे जल, हल्दी, फूल, अक्षत और दूध से की जाती है। संक्षेप में: नहाकर दरवाज़े के पास नाग बनाएँ, उनकी पूजा करें, कथा सुनें, और दिन भर धरती न खोदें, हल न चलाएँ और किसी जीवित साँप को न छेड़ें।

आपके शहर में नाग पंचमी किस दिन है, यह नाग पंचमी की तिथि वाले पृष्ठ पर है; उस दिन की तिथि अपने शहर के पंचांग में देखें। समय यहाँ नहीं लिखे गए, क्योंकि वे हर शहर में अलग होते हैं।

पूजा सामग्री: क्या-क्या तैयार रखें

  • नाग बनाने के लिए: हल्दी का लेप, चंदन, थोड़ा गोबर या कोयले का टुकड़ा; कुछ घरों में गेरू या चावल का घोल
  • चित्र की जगह चाहें तो चाँदी, पीतल या मिट्टी के छोटे नाग, या नाग देवता का छपा चित्र
  • एक छोटी कटोरी दूध और साफ़ जल का लोटा
  • रोली या कुमकुम, हल्दी, अक्षत, कुछ फूल और दूब
  • घी का दीया और अगरबत्ती
  • भोग के लिए: भीगे या अंकुरित चने और मूँग, धान का लावा, खीर या कोई सादी मिठाई
  • मौली (लाल-पीला धागा)
  • कथा की पुस्तिका, या घर की किसी बड़ी का याद रखा हुआ किस्सा

इनमें कुछ भी नया या महँगा होना ज़रूरी नहीं। बच्चे के हाथ का बनाया हल्दी का नाग भी उतने ही आदर से पूजा जाता है जितनी चाँदी की प्रतिमा।

पूजा का क्रम

  1. स्नान और संकल्प। सुबह नहाकर साफ़ कपड़े पहनें। पूर्व की ओर मुँह करके बैठें, दाएँ हाथ में थोड़ा जल लें और अपने शब्दों में कहें कि आप परिवार की रक्षा और सुख के लिए नाग पंचमी की पूजा कर रही हैं। जल धरती पर छोड़ दें।
  2. नाग बनाएँ। मुख्य द्वार के दोनों ओर की दीवार, या आँगन का एक कोना साफ़ करें। हल्दी, चंदन, गोबर या कोयले से नागों की कतार बनाएँ; बहुत-से घरों में पाँच, सात या नौ नाग बनते हैं, कहीं कई फनों वाला एक कुंडलीदार नाग। कुछ परिवार पूजा घर की दीवार पर ही बनाते हैं।
  3. पहले गणेश जी। दीया जलाएँ और गणेश जी को एक फूल और थोड़े अक्षत चढ़ाएँ।
  4. नाग पूजन। चित्र या प्रतिमा पर जल के छींटे दें। हल्दी, रोली, अक्षत, फूल और दूब चढ़ाएँ, पास में मौली रखें। दूध की कटोरी चित्र के सामने रखें; कथा में बेटी ने भी यही किया था, और यह दूध प्रतिमा को अर्पित है, किसी जीव को पिलाने के लिए नहीं। फूल चढ़ाते समय बहुत-से घरों में अनंत, वासुकि, शेष, पद्म, कंबल, कर्कोटक, तक्षक और कालिय जैसे नागों के नाम लिए जाते हैं, और "ॐ नागदेवताभ्यो नमः" कहा जाता है।
  5. भोग। भीगे चने, लावा और मिठाई नाग देवता के आगे रखें।
  6. कथा सुनें। परिवार के साथ बैठकर नाग पंचमी की कथा पढ़ें या सुनें, किसान के हल और बेटी की पूजा वाली।
  7. आरती। चित्र के आगे दीया घुमाएँ; बहुत-से घरों में नाग देवता या शिव जी की आरती गाई जाती है।
  8. बाँबी या मंदिर, यदि घर की रीति हो। कुछ परिवार पास की बाँबी या पेड़ के नीचे रखी पत्थर की नाग प्रतिमा पर जाकर थोड़ा दूध-जल, हल्दी और फूल चढ़ाते हैं। यह चुपचाप करें, मिट्टी खोदे या छेड़े बिना।
  9. बाद में दूध का क्या करें। घर में चित्र के आगे रखा दूध प्रसाद की तरह ले लिया जाता है या किसी पेड़ की जड़ में डाल दिया जाता है। उसे साँपों के लिए बाहर नहीं रखा जाता।

जीवित साँपों के बारे में

यह बात साफ़ कहनी ज़रूरी है। साँप प्रकृति में दूध नहीं पीते; वे चूहे, मेंढक और अंडे खाते हैं। ज़बरदस्ती दूध पिलाने से साँप बीमार हो सकता है। इस दिन सपेरे जो साँप टोकरी में लेकर घूमते हैं, वे जंगल से पकड़े जाते हैं, भूखे रखे जाते हैं, और अक्सर उनके दाँत तोड़ दिए जाते हैं या मुँह सिल दिया जाता है। यह क्रूरता है, और भारत में वन्यजीव कानून के अनुसार ऐसा करना मना है। घर या खेत में कोई साँप दिखे तो दूर रहें, बच्चों को दूर रखें, और वन विभाग या किसी प्रशिक्षित साँप-बचाव वाले को बुलाएँ। परंपरा को कभी जीवित साँप की ज़रूरत थी ही नहीं: कथा की बेटी ने भी अपनी दीवार पर बने नागों की पूजा की थी।

समय कैसे देखें

ज़्यादातर घरों के लिए कोई कठिन मुहूर्त नहीं है; पूजा पंचमी तिथि में सुबह की जाती है। देखना बस यह है कि आपके शहर में सुबह पंचमी तिथि चल रही हो, जो पंचांग में दिखता है। जो परिवार अच्छे समय में पूजा शुरू करना पसंद करते हैं, वे सुबह का चौघड़िया देख लें। पंचमी छोटी हो तो दिन कैसे चुना जाता है, यह तिथि वाले पृष्ठ पर समझाया गया है।

परिवारों के रीति-रिवाज

ये रिवाज हैं, शर्तें नहीं; आपके घर की रीति सबसे पहले है।

  • धरती न खोदना, हल न चलाना, ताकि बिलों में रहने वाले साँपों को चोट न पहुँचे।
  • कुछ घरों में इस दिन सब्ज़ी नहीं काटी जाती, कुछ तला नहीं जाता और लोहे का तवा नहीं चढ़ता; सादा खाना बनता है, कहीं-कहीं एक दिन पहले का।
  • कुछ लोग पूजा तक व्रत रखते हैं या एक समय खाते हैं; गर्भवती, बीमार और बुज़ुर्ग फल, दूध और पानी लें, और डॉक्टर की सलाह सबसे पहले मानें।
  • ब्याही बेटियाँ अक्सर मायके आती हैं या मायके से उनके लिए उपहार जाते हैं, कथा की बेटी की याद में।
  • उत्तर भारत के गाँवों में पेड़ों पर झूले पड़ते हैं और लड़कियाँ सावन के गीत गाती हैं।

प्रांतों के अपने ढंग

  • महाराष्ट्र: महिलाएँ चंदन या हल्दी से नाग बनाती हैं और फुगड़ी खेलती-गाती हैं। सांगली के पास बत्तीस शिराला कभी इस दिन जीवित नाग पकड़ने के लिए जाना जाता था; अदालतों और वन्यजीव कानून के बाद अब वहाँ प्रतिमाओं और शोभायात्रा के साथ उत्सव होता है।
  • कर्नाटक: नागर पंचमी पर बहनें भाइयों के लिए पत्थर की नाग प्रतिमाओं की पूजा करती हैं और बाँबी पर दूध-हल्दी चढ़ाती हैं।
  • उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर के ऊपरी तल पर नागचंद्रेश्वर का मंदिर केवल इसी दिन दर्शन के लिए खुलता है।
  • बंगाल: वहाँ सर्प देवी मनसा की पूजा होती है, पूरी बरसात में और ख़ासकर श्रावण मास की संक्रांति के आसपास, यानी पंचमी से अलग गणना से।
  • आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: वहाँ नाग पूजा का बड़ा दिन नागुल चविति है, जो दीवाली के कुछ दिन बाद कार्तिक की चतुर्थी को आता है; बाँबी में दूध चढ़ाया जाता है।
  • गुजरात: गुजराती पंचांग में नाग पांचम प्रायः महीने के कृष्ण पक्ष में, जन्माष्टमी से कुछ दिन पहले आती है, और परिवार घर व पास के देवस्थानों पर नाग पूजा करते हैं।

पूजा के बाद

भोग परिवार में बाँटें। इसी महीने आगे रक्षा बंधन है, और भादों में महिलाएँ ऋषि पंचमी का व्रत रखती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घर पर नाग पंचमी की पूजा कैसे करें?

स्नान के बाद मुख्य द्वार के दोनों ओर दीवार पर हल्दी, चंदन, गोबर या कोयले से नाग बनाए जाते हैं, या चाँदी, पीतल अथवा मिट्टी के छोटे नाग रखे जाते हैं। फिर जल, हल्दी, रोली, अक्षत, फूल और दीये से उनकी पूजा होती है, सामने कटोरी में दूध रखा जाता है और कथा सुनी जाती है।

क्या नाग पंचमी पर साँप को दूध पिलाना ठीक है?

नहीं। साँप प्रकृति में दूध नहीं पीते, दूध से वे बीमार हो सकते हैं, और सपेरे जिन साँपों को घर-घर लाते हैं उन्हें बड़ी क्रूरता से रखा जाता है। भारत में वन्यजीव कानून के अनुसार साँप पकड़ना और दिखाना मना है। दूध चित्र, प्रतिमा या बाँबी पर ही चढ़ाएँ।

नाग पंचमी पर ज़मीन क्यों नहीं खोदते?

यह सावधानी की रीति है। बरसात में साँप मिट्टी के बिलों में रहते हैं, इसलिए उनके आदर में एक दिन धरती को छेड़ा नहीं जाता। इसके पीछे उस किसान की कथा है जिसके हल से नागिन के बच्चे मर गए थे।

इसे भी पढ़ें

स्रोत

  • उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक के घरों की रीति
  • उत्तर भारत की नाग पंचमी व्रत पुस्तकें, पूजा के क्रम के लिए
  • साँप और दूध के बारे में वन विभागों और प्रकृति-विशेषज्ञों की सलाह

यह पृष्ठ सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम ने लिखा है। कथाएँ हमारे अपने शब्दों में हैं; जहाँ परंपराएँ अलग हैं वहाँ यह कहते हैं। तिथि और समय हमारे पंचांग की गणना से हैं, लेख में नहीं लिखे जाते। हमारी पद्धति