दीवाली की लक्ष्मी पूजा कार्तिक अमावस की शाम सूर्यास्त के बाद के मुहूर्त में घर पर होने वाला लक्ष्मी जी और गणेश जी का पूजन है, जिसमें कुबेर, कलश, घर-दुकान की बहियाँ और दीयों की कतारें भी शामिल होती हैं। संक्षेप में: घर साफ़ करके रंगोली बनाएँ, चौकी सजाएँ, संकल्प लें, पहले गणेश जी और फिर लक्ष्मी जी की पूजा करें, कुबेर और बही-खाते का पूजन करें, कथा सुनकर आरती करें, और पूरे घर में दीये जलाएँ।
त्योहार का दिन, प्रदोष काल और आपके शहर में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त दीपावली की तिथि वाले पृष्ठ पर है। यहाँ वे समय नहीं लिखे गए, क्योंकि वे हर साल और हर शहर में बदलते हैं।
पूजा सामग्री: क्या-क्या तैयार रखें
- चौकी और लाल कपड़ा; कुछ घर आसन के रूप में उस पर थोड़े चावल या गेहूँ बिछाते हैं
- लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति या चित्र; बहुत-से घरों में हर दीवाली मिट्टी की नई मूर्तियाँ आती हैं
- जल से भरा कलश, आम के पत्ते और ऊपर मौली बँधा नारियल
- रोली, हल्दी, सिंदूर, अक्षत, मौली, कमल या दूसरे फूल, एक माला
- खील-बताशे, चीनी के खिलौने, मिठाई, फल, थोड़े मेवे
- सिक्के, या लक्ष्मी जी के लिए अलग रखा चाँदी का सिक्का, और उनके लिए एक कटोरी
- पूजा के लिए घी का दीया, रात भर के लिए एक बड़ा दीया, और तेल-बत्ती वाले मिट्टी के बहुत-से छोटे दीये
- धूप, आरती के लिए कपूर, घंटी, सिक्के धोने के लिए पंचामृत या सादा दूध
- बही-खाते के लिए: नई बहियाँ या रजिस्टर, कलम, दवात या निशान लगाने को रोली, और दुकान या तिजोरी की चाबियाँ
- कुबेर के लिए चित्र या सिक्का, और कुछ घरों में सरस्वती जी के लिए कोई किताब या कलम
- द्वार पर रंगोली के लिए चावल का आटा या रंग, और लक्ष्मी जी के पदचिह्नों के लिए रोली
इस सूची की हर चीज़ होना ज़रूरी नहीं। एक साफ़ कोना, एक चित्र, एक दीया और थोड़ी-सी मिठाई — इतने से भी लक्ष्मी पूजा पूरी है।
पूजा का क्रम
- सफ़ाई और सजावट। दिन में सफ़ाई पूरी कर लें। दहलीज़ धोएँ, रंगोली बनाएँ, द्वार पर आम के पत्तों या गेंदे का तोरण बाँधें, और बाहर से भीतर की ओर आते लक्ष्मी जी के छोटे पदचिह्न बनाएँ।
- स्नान और नए कपड़े। शाम को घर के सब लोग नहाकर साफ़ या नए कपड़े पहनें।
- चौकी सजाएँ। पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके लाल कपड़ा बिछाएँ और गणेश जी व लक्ष्मी जी को स्थापित करें; हर घर का अपना ढंग है, और बहुत-से घरों में लक्ष्मी जी को गणेश जी की दाईं ओर बैठाया जाता है। एक ओर चावल की छोटी ढेरी पर कलश रखें, और आगे सिक्के, बहियाँ और चाबियाँ।
- संकल्प। दाएँ हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपने शब्दों में कहें कि परिवार घर की सुख-समृद्धि के लिए दीवाली की लक्ष्मी पूजा कर रहा है। जल धरती पर छोड़ दें।
- गणेश पूजन। घी का मुख्य दीया जलाएँ। गणेश जी को रोली, अक्षत, हो सके तो दूब, फूल और लड्डू चढ़ाएँ।
- कलश पूजन। कलश पर रोली और अक्षत चढ़ाएँ; कलश में सब देवताओं का वास माना जाता है।
- लक्ष्मी पूजन। सिक्कों को दूध या जल से धोकर लक्ष्मी जी के आगे रखें। हल्दी, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत, कमल या फूल, माला, खील-बताशे, चीनी के खिलौने और मिठाई चढ़ाएँ। बहुत-से लोग चढ़ाते समय ॐ महालक्ष्म्यै नमः जैसा छोटा नाम-मंत्र दोहराते हैं।
- कुबेर और सरस्वती। धन की रक्षा के लिए कुबेर को, और विद्या के लिए सरस्वती जी को, प्रायः किसी किताब या कलम पर, फूल और अक्षत चढ़ाएँ।
- बही-खाता पूजन। नई बही खोलकर पहले पन्ने पर रोली से स्वस्तिक बनाएँ और घर की रीति के अनुसार शुभ और लाभ, या श्री लिखें। पास में कलम और चाबियाँ रखकर अक्षत और फूल चढ़ाएँ। दुकान में यही पूजन गल्ले या तिजोरी पर होता है।
- कथा सुनें। दीवाली लक्ष्मी पूजा की कथा सुनें या सुनाएँ, या बस श्रीराम के लौटने की कहानी।
- आरती। कपूर या घी के दीये से ओम जय लक्ष्मी माता और गणेश जी की आरती गाएँ।
- घर भर में दीये। पूजा के दीये से छोटे दीये जलाकर मुख्य द्वार, हर कमरे, रसोई, पानी की टंकी, तुलसी और छत पर रखें। बहुत-से घरों में पहला दीया दहलीज़ पर रखा जाता है।
- प्रसाद। खील-बताशे और मिठाई परिवार और पड़ोसियों में बाँटें।
समय कैसे देखें
तीन बातें काम की हैं। लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम का वह समय है जब प्रदोष काल, स्थिर वृषभ लग्न और अमावस्या एक साथ हों; आपके शहर के लिए यह दीपावली की तिथि वाले पृष्ठ और मुहूर्त पृष्ठ पर है। नई बही खोलने वाले व्यापारी अक्सर अच्छे समय के लिए चौघड़िया भी देखते हैं, और कुछ लोग बृहस्पति या शुक्र जैसे शुभ ग्रह की होरा में शुरुआत करना पसंद करते हैं। जो घर देर रात पूजा करते हैं, जैसे काली के उपासक, वे तिथि वाले पृष्ठ पर निशीथ काल देखते हैं। आदर्श समय छोटा हो, तो सूर्यास्त के बाद शाम में कभी भी पूजा हो सकती है; स्वागत का भाव घड़ी की सुई से बड़ा है।
परिवारों के रीति-रिवाज
ये रिवाज हैं, शर्तें नहीं; आपके घर की अपनी रीति सबसे पहले है।
- बहुत-से घरों में लक्ष्मी जी के पास एक बड़ा दीया रात भर जलता है। उसे गहरी थाली में, पक्की जगह पर, पर्दों और कागज़ की सजावट से दूर रखें, और पास में पानी रखें।
- बहुत-से परिवार पूजा के बाद कुछ देर मुख्य द्वार खुला रखते हैं, स्वागत के भाव से।
- दीवाली पर पूजे गए सिक्के अगले साल तक घर की बचत के साथ रखे जाते हैं।
- खील-बताशे और चीनी के खिलौने बच्चों और पड़ोसियों को दिए जाते हैं।
- अब बहुत-से घर साफ़ हवा, पशु-पक्षियों, छोटे बच्चों और बुज़ुर्ग पड़ोसियों का ध्यान रखते हुए कम पटाखे चलाते हैं या बिल्कुल नहीं।
- कुछ परिवार हर साल नई लक्ष्मी-गणेश मूर्ति लाते हैं और पुरानी को विसर्जित करते हैं या आदर से सँभालकर रखते हैं।
प्रांतों के अपने ढंग
- उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बिहार: मिट्टी की लक्ष्मी-गणेश मूर्तियाँ, खील-बताशे और चीनी के खिलौने, शाम की लक्ष्मी पूजा और फिर दीये।
- गुजरात और राजस्थान के व्यापारी परिवार: दुकान में नई बहियों का चोपड़ा पूजन; गुजरात में अगले दिन से नया वर्ष शुरू होता है।
- महाराष्ट्र: शाम को लक्ष्मी पूजन, जिसमें नई झाड़ू को अक्सर लक्ष्मी का रूप मानकर पूजा जाता है।
- बंगाल, ओडिशा और असम: यही रात काली पूजा की है; ओडिशा में बहुत-से घर पितरों को बुलाने और विदा करने के लिए जूट की डंडियाँ भी जलाते हैं।
- तमिलनाडु और दक्षिण के बड़े हिस्से: दीपावली मुख्य रूप से नरक चतुर्दशी की भोर का तेल-स्नान है; अमावस की लक्ष्मी पूजा कुछ परिवार करते हैं।
पूजा के बाद
दीयों को अपने आप बुझने दें और सुबह समेट लें। इससे दो दिन पहले धनतेरस होता है, और अगले दिन गोवर्धन पूजा, जिसमें श्रीकृष्ण के लिए अन्नकूट सजता है।