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पूजा विधि · करवा चौथ

करवा चौथ पूजा विधि: सामग्री और घर पर पूजा का क्रम

करवा चौथ की पूजा विधि क्रम से: सरगी, पूजा सामग्री की सूची, शाम की गौरी पूजा और कथा, छलनी से चाँद देखकर अर्घ्य, और अलग-अलग प्रांतों के रिवाज।

  • सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम
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यह घर पर पूजा करने का आम तरीका है। आपके परिवार की रीति सबसे पहले है: क्षेत्र के हिसाब से क्रम, सामग्री और शब्द बदलते हैं, और मन से की गई सादी पूजा भी पूरी है। इसके लिए किसी से कुछ खरीदने की ज़रूरत नहीं।

तिथि और मुहूर्त

तिथि और समय हमारे अपने पंचांग की गणना से हैं, और शहर के साथ बदलते हैं। यहाँ से देखें:

इस पृष्ठ पर

करवा चौथ सूर्योदय से चंद्रोदय तक का व्रत है, जो शाम को गौरी पूजन, कथा और चाँद को अर्घ्य देकर पूरा होता है। संक्षेप में: भोर से पहले सरगी खाएँ, स्नान के बाद संकल्प लें, दिन भर व्रत रखें, शाम को गौरी की पूजा करके कथा सुनें, फिर छलनी से चाँद देखकर करवे से अर्घ्य दें और पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलें।

व्रत का दिन और आपके शहर में चाँद निकलने का समय करवा चौथ की तिथि वाले पृष्ठ और शहरवार चंद्रोदय पर है। यहाँ वे समय दोबारा नहीं लिखे गए, क्योंकि वे हर साल और हर शहर में बदलते हैं।

पूजा सामग्री: क्या-क्या तैयार रखें

  • करवा: मिट्टी या धातु का टोंटी वाला छोटा पात्र, ढक्कन सहित; कई महिलाएँ दो करवे रखती हैं, एक चढ़ाने के लिए और एक बदलने के लिए
  • करवे में भरने के लिए जल, और अर्घ्य के लिए लोटा या करवा ही
  • करवा माता या चौथ माता का चित्र (छपा हुआ पन्ना, जो बहुत-से घरों में आता है), या मिट्टी की छोटी गौरी
  • चौकी या पटरा, उस पर बिछाने को लाल या पीला कपड़ा
  • रोली या कुमकुम, हल्दी, अक्षत (साबुत चावल), सिंदूर, कुछ फूल
  • घी का दीया और रुई की बत्ती, धूप या अगरबत्ती
  • भोग के लिए मिठाई और फल; बहुत-से घरों में मठरी, फेनी या हलवा-पूरी बनती है
  • चाँद देखने के लिए छलनी
  • कथा के समय हाथ में रखने को गेहूँ या चावल के कुछ दाने
  • बायना: सास के लिए मिठाई, मेवे, कपड़े या कोई छोटा उपहार
  • सुहाग का सामान, जो महिलाएँ पहनती या चढ़ाती हैं: चूड़ियाँ, बिंदी, मेहंदी, लाल या शादी का जोड़ा

इनमें से कुछ भी खास या नया होना ज़रूरी नहीं। करवा न हो तो स्टील का लोटा भी वही काम करता है, और घर पर बनाया चित्र छपे चित्र जितना ही अच्छा है।

पूजा का क्रम

  1. सरगी, सूर्योदय से पहले। परंपरा से सास सरगी भेजती हैं: फल, मिठाई, मेवे, दूध में फेनी, कहीं-कहीं परांठे। आराम से खाएँ और पानी भरपूर पिएँ; व्रत सूर्योदय से शुरू होता है।
  2. स्नान और संकल्प। नहाकर पूर्व की ओर मुँह करके बैठें, दाएँ हाथ में थोड़ा जल लें और अपने शब्दों में कहें कि आप पति और परिवार के कुशल-मंगल के लिए करवा चौथ का व्रत रख रही हैं। जल धरती पर छोड़ दें।
  3. दिन भर। दिन शांति से बीतता है। बहुत-सी महिलाएँ मेहंदी लगाती हैं, सहेलियों से मिलती हैं और आराम करती हैं। जो पानी या फल के साथ व्रत रखती हैं, वे शुरू से ही ऐसा तय करें; दोपहर में थककर निर्णय लेने की ज़रूरत न पड़े।
  4. पूजा का स्थान सजाएँ। शाम होते-होते पूजा का कोना साफ़ करें, चौकी पर कपड़ा बिछाएँ और करवा माता का चित्र या मिट्टी की गौरी रखें। करवे में जल भरें, ढक्कन लगाएँ, रोली से स्वस्तिक बनाएँ और गले में मौली बाँधें। पास में दीया, मिठाई और बायना रखें।
  5. पहले गणेश जी। दीया जलाएँ। गणेश जी को रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएँ; हर पूजा में पहले उन्हीं का स्मरण होता है।
  6. गौरी पूजन। गौरी को हल्दी, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएँ, और उनके साथ शिव जी, कार्तिकेय और गणेश जी का स्मरण करें। कुछ परिवार गेरू और चावल के घोल से दीवार पर चाँद, सूरज और करवा बनाकर उसी की पूजा करते हैं।
  7. कथा सुनें। हाथ में गेहूँ या चावल के दाने लेकर करवा चौथ व्रत कथा सुनें या पढ़ें। दाने बाद के लिए अलग रख लें।
  8. थाली का फेरा। पंजाबी घरों में महिलाएँ घेरे में बैठकर फेरी का गीत गाते हुए सात बार थालियाँ एक-दूसरे को आगे बढ़ाती हैं। दूसरे घरों में महिलाएँ आपस में, या बहू और सास करवे बदलती हैं।
  9. बायना। सास के पैर छूकर उन्हें बायना दें। सास पास न हों तो परिवार की किसी बड़ी महिला या जेठानी-ननद को दें।
  10. चंद्रोदय। चाँद निकलने पर थाली लेकर छत या खिड़की पर जाएँ। छलनी से चाँद देखें, कथा वाले दानों के साथ करवे के जल से अर्घ्य दें और प्रार्थना करें। फिर उसी छलनी से पति को देखें।
  11. व्रत खोलें। पति पहला घूँट जल और मिठाई का पहला कौर देते हैं। फिर पूरा परिवार साथ भोजन करता है।

समय कैसे देखें

दो समय काम के हैं: शाम की पूजा के लिए सुविधाजनक समय, और व्रत खोलने के लिए चंद्रोदय। अलग-अलग शहरों में चाँद कई मिनट आगे-पीछे निकलता है, इसीलिए अलग-अलग जगह अलग समय लिखे मिलते हैं; अपने शहर का समय चंद्रोदय पृष्ठ पर देखें। जो परिवार अच्छे चौघड़िया में पूजा शुरू करना पसंद करते हैं, वे अपने शहर का शाम का चौघड़िया देख सकते हैं। पहली बार व्रत रख रही हों तो चंद्रोदय का समय पहले से जान लेना अच्छा है, ताकि इंतज़ार भारी न लगे।

परिवारों के रीति-रिवाज

ये रिवाज हैं, शर्तें नहीं; आपके घर की अपनी रीति सबसे पहले है।

  • बहुत-से घरों में इस दिन कैंची, सुई-धागे और सिलाई-कढ़ाई का काम नहीं किया जाता।
  • बहुत-सी महिलाएँ लाल या शादी का जोड़ा पहनती हैं, और काले या सादे सफ़ेद कपड़ों से बचती हैं।
  • सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है, बाद में नहीं।
  • पूजा का करवा प्रायः रसोई में दोबारा इस्तेमाल न करके सास, पुरोहित या किसी ज़रूरतमंद महिला को दे दिया जाता है।
  • विवाह के बाद की पहली करवा चौथ अक्सर ससुराल में होती है, और मायके से उपहार आते हैं।
  • गर्भवती, मधुमेह वाली, बीमार या बुज़ुर्ग महिलाएँ पानी या फल के साथ हल्का व्रत रखती हैं, और अब बहुत-से पति भी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं।

प्रांतों के अपने ढंग

  • पंजाब और हरियाणा: सास की सरगी, घेरे में थाली का फेरा, और छलनी से चाँद का दर्शन।
  • उत्तर प्रदेश: मिट्टी या गोबर से बनी गौरी, दीवार पर चाँद और करवे का चित्र, और करवों का आदान-प्रदान।
  • राजस्थान: देवी की पूजा चौथ माता के रूप में; महिलाएँ उनके मंदिरों में जाती हैं, और बरवाड़ा के चौथ माता मंदिर में बड़ी भीड़ होती है।
  • गुजरात और महाराष्ट्र में महीने अमांत गणना से गिने जाते हैं, इसलिए यही चतुर्थी कार्तिक के बजाय आश्विन में पड़ती है; वहाँ यह व्रत कम घरों में रखा जाता है।

पूजा के बाद

बची हुई मिठाई प्रसाद के रूप में बाँटें। इस मौसम का अगला व्रत अहोई अष्टमी है, जिसे माताएँ संतान के लिए रखती हैं, और यदि आप हर महीने चौथ का व्रत रखती हैं तो उसकी कथा संकष्टी चतुर्थी कथा पृष्ठ पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करवा चौथ पर बादलों की वजह से चाँद न दिखे तो क्या करें?

हर परिवार का अपना तरीका है। बहुत-से लोग कुछ देर प्रतीक्षा करते हैं, फिर अपने शहर का चंद्रोदय का समय निकल जाने पर चाँद की दिशा में अर्घ्य दे देते हैं; कुछ घर की बड़ी-बूढ़ी की बात मानते हैं। किसी भी परंपरा में इसे टूटा हुआ व्रत नहीं माना जाता।

क्या करवा चौथ का व्रत निर्जल ही रखना होता है?

बहुत-सी महिलाएँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जल व्रत रखती हैं, पर बहुत-सी पानी, दूध या फल लेती हैं। गर्भवती, मधुमेह वाली, बीमार और बुज़ुर्ग महिलाओं के लिए यही ठीक है; डॉक्टर की सलाह सबसे पहले।

करवा चौथ की पूजा में किन देवताओं का पूजन होता है?

पूजा के केंद्र में गौरी (माता पार्वती) हैं, साथ में शिव जी, गणेश जी और कार्तिकेय, और अंत में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। राजस्थान में देवी चौथ माता के रूप में पूजी जाती हैं।

इसे भी पढ़ें

स्रोत

  • पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के घरों की रीति
  • करक चतुर्थी पर उत्तर भारत की व्रत पुस्तकें, पूजा के क्रम के लिए

यह पृष्ठ सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम ने लिखा है। कथाएँ हमारे अपने शब्दों में हैं; जहाँ परंपराएँ अलग हैं वहाँ यह कहते हैं। तिथि और समय हमारे पंचांग की गणना से हैं, लेख में नहीं लिखे जाते। हमारी पद्धति