अमावस्या · 2026
फाल्गुन अमावस्या 2026 (भौमवती) — मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026
फाल्गुन अमावस्या मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 को है (नई दिल्ली)।
नई दिल्ली के लिए गणना
मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026
- तिथि
- अमावस्या: 16 फ़रवरी, 17:34 – 17 फ़रवरी, 17:31
- चांद्र मास
- फाल्गुन (पूर्णिमांत) / माघ (अमांत)
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 06:57 / 18:12
नियम: सूर्योदय के समय अमावस्या वाला दिन (नहीं तो जिस दिन आरंभ हो)। दर्श अमावस्या — व्रत और श्राद्ध का दिन — वह पहला दिन जब अमावस्या मध्याह्न को छुए।
अमावस्या की तारीख सूर्योदय की तिथि से है; दर्श अमावस्या — व्रत और श्राद्ध का दिन — वह पहला दिन है जिस दिन अमावस्या मध्याह्न को छुए।
सभी समय हमारे अपने इंजन से, नई दिल्ली के सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय पर। दूसरे शहर में समय कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी दिन भी। अपने शहर का पंचांग
यह दिन
फाल्गुन अमावस्या महाशिवरात्रि के बाद आती है और होली से पहले की अंतिम अमावस्या है। यह तर्पण और दान के लिए रखी जाती है।
मंगलवार को पड़ने वाली अमावस्या भौमवती अमावस्या कहलाती है, जो मंगल से जुड़ी है। परंपरा में इस दिन हनुमान पूजा और नदी स्नान बताया गया है।
अमावस्या कैसे रखें
- जो लोग व्रत रखते हैं, वे प्रायः दर्श अमावस्या पर सादा व्रत रखते हैं: एक समय सात्विक भोजन, या फल और दूध।
- पितरों को काले तिल और कुश के साथ जल अर्पित करना — तर्पण — देर सुबह या दोपहर के आसपास किया जाता है; परिवार का कोई भी सदस्य इसे श्रद्धा से कर सकता है।
- नदी या तीर्थ में स्नान की गहरी परंपरा है, खासकर मौनी और सोमवती अमावस्या पर; घर पर पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करने का भी वही भाव है।
- गाय, कौए, कुत्ते और चींटियों को भोजन देना, और ज़रूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या तिल का दान अमावस्या के आम रिवाज हैं।
- शाम को पीपल के नीचे या घर के पूजा स्थान पर दीपक जलाने की परंपरा बहुत जगह है।
- सम्मान के भाव से बहुत से लोग इस दिन शाकाहार रखते हैं और मदिरा से दूर रहते हैं।
- बुज़ुर्ग, गर्भवती, मधुमेह के रोगी या अस्वस्थ लोगों को उपवास की ज़रूरत नहीं — इस दिन का मूल स्मरण और दान है। संदेह हो तो डॉक्टर से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फाल्गुन अमावस्या 2026 कब है?
फाल्गुन अमावस्या मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 को है (नई दिल्ली)। अमावस्या तिथि 16 फ़रवरी, 17:34 – 17 फ़रवरी, 17:31 तक रहती है।