त्योहार · 2027
हरियाली तीज 2027 — बुधवार, 4 अगस्त 2027
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया का वर्षा-उत्सव है, जब स्त्रियाँ झूलों, गीतों, हरे वस्त्रों और मेहंदी के साथ शिव-पार्वती के मिलन का उत्सव मनाती हैं।
2026 में
शनिवार, 15 अगस्त 2026
- तिथि
- शुक्ल तृतीया: 14 अगस्त, 18:47 – 15 अगस्त, 17:29
- चांद्र मास
- श्रावण
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 05:50 / 19:00
नियम: सूर्योदय के समय श्रावण शुक्ल तृतीया।
2027 में
बुधवार, 4 अगस्त 2027
- तिथि
- शुक्ल तृतीया: 4 अगस्त, 08:20 – 5 अगस्त, 05:09
- चांद्र मास
- श्रावण
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 05:43 / 19:10
नियम: सूर्योदय के समय श्रावण शुक्ल तृतीया।
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त से। दूसरे शहरों में मुहूर्त कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी तिथि एक दिन। पूरा त्योहार कैलेंडर
हरियाली तीज क्या है
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को, वर्षा ऋतु के बीच आती है, जब खेत और पेड़ हरे-भरे हो उठते हैं। हरियाली का अर्थ है हरापन, और यह पर्व जितना धार्मिक अनुष्ठान है, उतना ही वर्षा का स्वागत भी। इसे श्रावणी तीज, छोटी तीज और सिंधारा तीज भी कहा जाता है, और यह इस ऋतु की तीन तीजों में पहली है, जिसके बाद कजरी तीज और भाद्रपद में हरतालिका तीज आती हैं।
यह दिन पार्वती की शिव-भक्ति का सम्मान है। शिव पुराण की रुद्र संहिता बताती है कि पर्वतराज हिमवान की पुत्री पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया और कठोर तपस्या की, जब तक शिव ने उन्हें स्वीकार नहीं कर लिया। लोक-परंपरा कहती है कि उनका तप अनेक जन्मों तक चला और श्रावण मास में शिव ने उन्हें स्वीकार किया, और हरियाली तीज उसी मिलन की आनंदमय स्मृति के रूप में मनाई जाती है। इस दिन पार्वती की पूजा तीज माता के रूप में होती है।
विवाहित स्त्रियों के लिए यह सुखी दांपत्य की प्रार्थना का पर्व है, और अविवाहित कन्याओं के लिए अच्छे वर की प्रार्थना का, ठीक पार्वती की अपनी कामना की तरह। बहुत-सी स्त्रियाँ उपवास रखती हैं, कुछ शाम की पूजा तक निर्जल, जबकि कुछ बस दिन पूजा और उत्सव में बिताती हैं। पूजा के बाद वे इकट्ठी होकर तीज के गीत गाती हैं, नाचती हैं और पेड़ों की डालों पर डाले गए झूलों पर बारी-बारी से झूलती हैं; यह रीति इस दिन से इतनी जुड़ी है कि कई नगरों में इसके लिए विशेष रूप से झूले डाले जाते हैं।
हरियाली तीज की एक विशेष बात सिंधारा है, यानी वह भेंट जो विवाहित बेटी के माता-पिता उसकी ससुराल भेजते हैं। इसमें प्रायः वस्त्र, चूड़ियाँ, मेहंदी, घेवर जैसी मिठाइयाँ और त्योहार की दूसरी चीज़ें होती हैं, और नवविवाहिता के लिए पहली तीज, जो वह प्रायः मायके में मनाती है, बड़े चाव से प्रतीक्षित अवसर होती है। हिंदी भाषी गाँवों में तीज स्त्रियों की सखी-सहेलियों वाले दिन के रूप में याद की जाती है, उन गीतों के साथ जो माँ और दादी से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आते हैं।
कैसे मनाया जाता है
- हरे वस्त्र और हरी चूड़ियाँ पहनना, और एक शाम पहले या उसी दिन हाथों में मेहंदी लगाना।
- सुखी दांपत्य की प्रार्थना के साथ दिन भर का उपवास, कुछ परिवारों में निर्जल।
- तीज माता के रूप में पार्वती की पूजा, प्रायः शिव के साथ, फूल, मिठाई और सुहाग की सामग्री से।
- पार्वती की भक्ति और शिव द्वारा उन्हें स्वीकार करने की तीज कथा सुनना।
- पेड़ों पर डाले झूलों पर झूलना, और सहेलियों व पड़ोसिनों के साथ तीज और सावन के गीत गाना।
- विवाहित बेटी के माता-पिता की ओर से घेवर, वस्त्र और चूड़ियों वाला सिंधारा भेजना और पाना।
तिथि कैसे तय होती है
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है, यानी श्रावण के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि। हमारा पंचांग वह दिन देता है जिस दिन सूर्योदय के समय यह तृतीया चल रही हो। शुक्ल पक्ष में होने के कारण उत्तर भारतीय (पूर्णिमांत) और अमांत दोनों पंचांगों में इसका महीना एक ही रहता है, इसलिए इस तीज के नाम में कोई भ्रम नहीं होता, जबकि कृष्ण पक्ष में आने वाली कजरी तीज के साथ ऐसा होता है।
क्षेत्रीय अंतर
यह पर्व सबसे अधिक राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली और पंजाब में मनाया जाता है। जयपुर में तीज माता की सवारी पुराने सिटी पैलेस से निकलकर दो दिनों तक परकोटे वाले शहर में घूमती है। पंजाब में यह ऋतु तीयाँ के रूप में मनाई जाती है, जब लड़कियाँ और स्त्रियाँ कई दिनों तक गीत, गिद्धा और झूलों के लिए इकट्ठी होती हैं। ब्रज में वर्षा ऋतु में कृष्ण मंदिरों में देवताओं के लिए झूले सजाए जाते हैं, और हरियाली तीज उसी झूलन उत्सव का हिस्सा है। नेपाल और नेपाली समुदायों में मुख्य तीज भाद्रपद की हरतालिका है।
तिथियाँ और समय हमारा अपना इंजन गणना करता है (सूर्योदय, तिथि और काल नई दिल्ली के लिए, लाहिड़ी अयनांश)। दूसरे शहर में, या किसी दूसरी परंपरा के पंचांग में, तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है — अपने कुल पुरोहित की परंपरा मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाली तीज पर हरा रंग क्यों पहना जाता है?
हरा वर्षा ऋतु का रंग है, जब खेत और पेड़ फिर से जी उठते हैं, और उत्तर भारत में यह सुहाग के श्रृंगार से भी जुड़ा रंग है। हरे वस्त्र और चूड़ियाँ ऋतु और सुखी दांपत्य, दोनों का उत्सव हैं।
हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज में क्या अंतर है?
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया है। कजरी तीज लगभग दो सप्ताह बाद, अगले कृष्ण पक्ष की तृतीया को आती है। हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया है, उसके भी लगभग दो सप्ताह बाद। तीनों पार्वती को समर्पित हैं, पर रीतियाँ अलग हैं।
सिंधारा क्या है?
सिंधारा वह भेंट है जो विवाहित स्त्री के माता-पिता तीज पर उसे भेजते हैं: वस्त्र, चूड़ियाँ, मेहंदी, घेवर जैसी मिठाइयाँ और त्योहार की दूसरी चीज़ें। इसी कारण इस दिन को सिंधारा तीज भी कहते हैं।
क्या अविवाहित कन्याएँ हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं?
हाँ। बहुत-सी अविवाहित कन्याएँ पार्वती के उदाहरण पर यह व्रत रखती हैं, जिन्होंने शिव से विवाह की कामना के साथ आराधना की थी। उपवास कितना कठोर हो, यह परिवार की रीति पर निर्भर है।