एकादशी · 2026
परमा एकादशी 2026 — गुरुवार, 11 जून 2026
परमा एकादशी गुरुवार, 11 जून 2026 को है (नई दिल्ली)। पारण 12 जून को 05:22 – 08:09 के बीच।
नई दिल्ली के लिए गणना
गुरुवार, 11 जून 2026
- तिथि
- कृष्ण एकादशी: 11 जून, 00:58 – 11 जून, 22:36
- चांद्र मास
- अधिक ज्येष्ठ
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 05:22 / 19:18
- अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले)
- 03:46
| पारण (व्रत खोलने का समय) | 12 जून, 05:22 – 12 जून, 08:09 |
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नियम: स्मार्त नियम: सूर्योदय के समय एकादशी वाला दिन, अगली सुबह पारण के लिए द्वादशी रहे।
स्मार्त और वैष्णव
इस बार दोनों परंपराएँ एक ही दिन व्रत रखती हैं: अरुणोदय (03:46) तक एकादशी शुरू हो चुकी है, इसलिए दिन दशमी-विद्धा नहीं है।
वैष्णव दिन केवल अरुणोदय वाले सरल नियम से है; इस्कॉन अपना कैलेंडर अपने स्थान के लिए बनाता है, इसलिए अपने मंदिर से मिला लें।
पारण कैसे तय हुआ
व्रत अगले दिन द्वादशी में खोला जाता है — हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) के बाद, हो सके तो प्रातः काल में, और मध्याह्न से बचते हुए। द्वादशी रहते पारण न हो तो उसका पुण्य कम माना जाता है।
सभी समय हमारे अपने इंजन से, नई दिल्ली के सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय पर। दूसरे शहर में समय कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी दिन भी। अपने शहर का पंचांग
परमा एकादशी का महत्व
परमा एकादशी अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आती है, इसलिए पद्मिनी की तरह यह भी लगभग तीन साल में एक बार ही रखी जाती है। परमा का अर्थ है “सर्वश्रेष्ठ”, और यह दिन दरिद्रता और कष्ट से छुटकारे से जुड़ा है।
अन्य नाम: पुरुषोत्तमी एकादशी
व्रत कथा
कांपिल्य नगर में सुमेधा नाम के गरीब पर ईमानदार ब्राह्मण और उनकी पत्नी पवित्रा रहते थे, जो अपने थोड़े से अन्न में से भी अतिथि को देते थे। गरीबी असहनीय होने पर सुमेधा काम की तलाश में बाहर जाने की सोचने लगे, तभी कौंडिन्य ऋषि उनके घर आए और उन्हें अधिक मास की परमा एकादशी पाँच दिन के उपवास के साथ रखने को कहा। उन्होंने व्रत रखा और उनका कष्ट दूर हो गया।
कथा का सार, पद्म पुराण और भविष्योत्तर पुराण के एकादशी माहात्म्य से।
यह दिन
यह दिन अधिक मास में पड़ता है, जिसे पुरुषोत्तम मास और मल मास भी कहते हैं। अधिक मास में त्योहार नहीं मनाए जाते; वे उसके बाद के निज मास में होते हैं। यह महीना भक्ति, पाठ, दान और विष्णु पूजा को समर्पित माना जाता है।
एकादशी कैसे रखें
- व्रत एकादशी के सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक चलता है। बहुत से लोग दशमी की शाम, व्रत शुरू होने से पहले, एक बार सादा और सात्विक भोजन करते हैं।
- परंपरा में अन्न और दालें, खासकर चावल, नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, मेवे और फलाहार — साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू — आम तौर पर लिए जाते हैं; हर परिवार का रिवाज थोड़ा अलग होता है।
- व्रत के कई स्तर हैं: निर्जला (बिना पानी), फलाहार (फल और दूध), या बिना अन्न का एक समय भोजन। जो आपके शरीर के अनुकूल हो, वही चुनें; सबके लिए एक ही नियम ज़रूरी नहीं है।
- दिन भगवान विष्णु की पूजा में बीतता है: तुलसी, दीपक, विष्णु सहस्रनाम या ओम नमो भगवते वासुदेवाय जैसा मंत्र, और उस एकादशी की कथा। तुलसी के पत्ते प्रायः एक दिन पहले तोड़ लिए जाते हैं, क्योंकि बहुत से लोग एकादशी पर तुलसी नहीं तोड़ते।
- कुछ लोग रात में भजन-कीर्तन के साथ जागरण करते हैं, और बहुत से लोग अन्न या भोजन का दान करते हैं।
- पारण द्वादशी को सूची में दिए समय के भीतर होता है: हरि वासर के बाद, हो सके तो सुबह के समय, और द्वादशी समाप्त होने से पहले। व्रत प्रायः किसी हल्की चीज़ से, अक्सर थोड़ा तुलसी-जल लेकर खोला जाता है।
- गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, बुज़ुर्ग, मधुमेह के रोगी, नियमित दवा लेने वाले या अस्वस्थ लोग हल्का व्रत रख सकते हैं — फल और दूध, या एक समय भोजन — या केवल पूजा-पाठ से दिन मना सकते हैं। कोई बीमारी हो तो व्रत से पहले डॉक्टर से पूछ लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
परमा एकादशी 2026 कब है?
परमा एकादशी गुरुवार, 11 जून 2026 को है (नई दिल्ली)। कृष्ण एकादशी तिथि 11 जून, 00:58 – 11 जून, 22:36 तक रहती है।
परमा एकादशी का पारण कब है?
पारण शुक्रवार, 12 जून 2026 को 05:22 – 08:09 के बीच, हरि वासर के बाद और द्वादशी रहते।
क्या वैष्णव परमा एकादशी अलग दिन है?
नहीं। अरुणोदय के समय एकादशी शुरू हो चुकी है, इसलिए स्मार्त और वैष्णव दोनों 11 जून 2026 को व्रत रखते हैं।