त्योहार · 2026
राम नवमी 2026 — गुरुवार, 26 मार्च 2026
राम नवमी अयोध्या में मध्याह्न के समय श्रीराम के जन्म का उत्सव है और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों का समापन भी।
2026 में
गुरुवार, 26 मार्च 2026
- तिथि
- शुक्ल नवमी (शुक्ल): 26 मार्च, 11:49 – 27 मार्च, 10:07
- चांद्र मास
- चैत्र
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 06:18 / 18:35
- मध्याह्न क्षण
- 12:27
| पूजा मुहूर्त | 11:49 – 13:40 |
|---|---|
| मध्याह्न | 11:13 – 13:40 |
नियम: चैत्र शुक्ल नवमी जो मध्याह्न (दिन का मध्य पाँचवाँ भाग) में हो — श्रीराम का जन्म-काल।
2027 में
गुरुवार, 15 अप्रैल 2027
- तिथि
- शुक्ल नवमी (शुक्ल): 14 अप्रैल, 15:24 – 15 अप्रैल, 13:21
- चांद्र मास
- चैत्र
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 05:56 / 18:46
- मध्याह्न क्षण
- 12:21
| पूजा मुहूर्त | 11:04 – 13:21 |
|---|---|
| मध्याह्न | 11:04 – 13:38 |
नियम: चैत्र शुक्ल नवमी जो मध्याह्न (दिन का मध्य पाँचवाँ भाग) में हो — श्रीराम का जन्म-काल।
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त से। दूसरे शहरों में मुहूर्त कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी तिथि एक दिन। पूरा त्योहार कैलेंडर
राम नवमी क्या है
राम नवमी भगवान विष्णु के सातवें अवतार और रामायण के नायक श्रीराम के जन्म का पर्व है। यह चैत्र शुक्ल नवमी को आती है और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों को पूर्ण करती है। मान्यता है कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर मध्याह्न में हुआ था, इसलिए इस दिन की मुख्य पूजा दोपहर के समय होती है।
रामायण बताती है कि संतान की कामना से राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया और उसके बाद राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। वनवास, कर्तव्य के प्रति निष्ठा और अयोध्या लौटने तक का श्रीराम का जीवन उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाता है, यानी ऐसे आदर्श पुरुष जो धर्म की सीमाओं में रहते हैं। बहुत-से भक्तों के लिए उनका नाम ही प्रार्थना है।
राम नवमी उन आदर्शों पर ठहरकर सोचने का दिन है: सत्य, वचन का पालन और परिवार व समाज के प्रति दायित्व। मंदिरों में इससे पहले के दिनों में रामायण और रामचरितमानस का पाठ होता है, और दोपहर में घंटे, शंख और भजनों के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है। अयोध्या में इस दिन सरयू तट और नगर के मंदिरों में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं।
कैसे मनाया जाता है
- मध्याह्न तक या पूरे दिन व्रत, और दोपहर की पूजा के बाद पारण।
- मध्याह्न में बाल राम की प्रतिमा को पालने में रखकर जन्मोत्सव मनाना।
- रामचरितमानस या वाल्मीकि रामायण का पाठ, जो अक्सर नवरात्रि के नौ दिनों में पूरा किया जाता है।
- मंदिरों और घरों में राम नाम का जप और भजन।
- दक्षिण भारत के घरों और मंदिरों में पानकम (गुड़ का शरबत) और नीर मोर (मसालेदार छाछ) का प्रसाद।
- राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की झाँकियों के साथ शोभा यात्रा।
- अयोध्या में सरयू स्नान और मंदिरों के दर्शन।
तिथि कैसे तय होती है
राम नवमी चैत्र शुक्ल नवमी है, यानी चैत्र के शुक्ल पक्ष की नौवीं तिथि। चूँकि श्रीराम का जन्म मध्याह्न में माना जाता है, इसलिए निर्णायक समय मध्याह्न है: सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिनमान को पाँच बराबर भागों में बाँटने पर बीच का भाग। जिस दिन मध्याह्न में नवमी हो, वही राम नवमी है; यदि दो दिनों के मध्याह्न में नवमी हो, तो पहला दिन लिया जाता है।
क्षेत्रीय अंतर
राम नवमी पूरे भारत में मनाई जाती है, पर इसका रंग अलग-अलग है: उत्तर भारत में बड़ी शोभा यात्राएँ, अयोध्या में दोपहर का जन्मोत्सव, और आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में राम-सीता का दिव्य विवाह (सीता राम कल्याणम्), जो भद्राचलम में विशेष रूप से प्रसिद्ध है। तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में नौ या अधिक दिनों तक संगीत और प्रवचन होते हैं, जो कभी-कभी नवमी के बाद भी चलते हैं। जब नवमी दो दिनों में बँटी हो, तो स्मार्त और वैष्णव पंचांग अष्टमी से जुड़े अपने-अपने नियमों के कारण कभी-कभी अलग दिन चुनते हैं।
तिथियाँ और समय हमारा अपना इंजन गणना करता है (सूर्योदय, तिथि और काल नई दिल्ली के लिए, लाहिड़ी अयनांश)। दूसरे शहर में, या किसी दूसरी परंपरा के पंचांग में, तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है — अपने कुल पुरोहित की परंपरा मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राम नवमी दोपहर में क्यों मनाई जाती है?
मान्यता है कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में मध्याह्न के समय हुआ था। मुख्य पूजा मध्याह्न में होती है, और हमारा पंचांग भी इसी समय के आधार पर तिथि तय करता है।
क्या राम नवमी चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन है?
हाँ। चैत्र नवरात्रि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी पर पूरी होती है, और यही नवमी राम नवमी है।
क्या अलग-अलग पंचांगों में राम नवमी अलग दिन हो सकती है?
कभी-कभी, हाँ। जब नवमी दो दिनों में फैली हो, तो थोड़े अलग नियम मानने वाले पंचांग, जैसे कुछ वैष्णव परंपराएँ, दूसरा दिन चुन सकते हैं।