त्योहार · 2026
हनुमान जयंती 2026 — गुरुवार, 2 अप्रैल 2026
हनुमान जयंती श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के जन्म का उत्सव है, जिसे उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है।
2026 में
गुरुवार, 2 अप्रैल 2026
- तिथि
- पूर्णिमा: 1 अप्रैल, 07:06 – 2 अप्रैल, 07:42
- चांद्र मास
- चैत्र
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 06:10 / 18:39
नियम: सूर्योदय के समय चैत्र पूर्णिमा (उत्तर भारत की तिथि; दक्षिण भारत में अन्य मास)।
2027 में
मंगलवार, 20 अप्रैल 2027
- तिथि
- पूर्णिमा: 20 अप्रैल, 04:51 – 21 अप्रैल, 03:57
- चांद्र मास
- चैत्र
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 05:51 / 18:49
नियम: सूर्योदय के समय चैत्र पूर्णिमा (उत्तर भारत की तिथि; दक्षिण भारत में अन्य मास)।
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त से। दूसरे शहरों में मुहूर्त कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी तिथि एक दिन। पूरा त्योहार कैलेंडर
हनुमान जयंती क्या है
हनुमान जयंती श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के जन्म का पर्व है, जो भारत में सबसे अधिक पूजे जाने वाले देवताओं में हैं। उत्तर भारत में यह चैत्र पूर्णिमा को, राम नवमी के कुछ दिन बाद मनाई जाती है। हनुमान जी बल, साहस, विनम्रता और अटूट भक्ति के प्रतीक हैं, और बहुत-से भक्तों के लिए वे सबसे सुलभ और अपने-से लगने वाले देवता हैं।
परंपरा के अनुसार हनुमान जी माता अंजना और केसरी के पुत्र हैं, और पवनदेव के भी, जिनके माध्यम से अंजना को दैवी आशीर्वाद मिला। बचपन की कथा है कि उन्होंने उगते सूर्य को फल समझकर उसकी ओर छलाँग लगा दी थी। रामायण में वे समुद्र लाँघकर लंका में सीता की खोज करते हैं, लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए संजीवनी सहित पर्वत उठा लाते हैं, और बदले में कुछ माँगे बिना श्रीराम की सेवा करते हैं।
कई भक्त जयंती की जगह जन्मोत्सव शब्द पसंद करते हैं, क्योंकि मान्यता है कि हनुमान जी चिरंजीवी हैं। नाम जो भी हो, यह दिन सेवा और साहस में प्रकट होने वाली भक्ति का है। कई परंपराएँ उनका जन्म सूर्योदय के समय मानती हैं, इसलिए मंदिर भोर से पहले खुल जाते हैं और दिनभर हनुमान चालीसा का पाठ चलता है। परिवार साथ मिलकर दर्शन करते हैं और विनम्रता से जुड़े बल को याद करते हैं।
कैसे मनाया जाता है
- सुबह जल्दी, अक्सर सूर्योदय से पहले, हनुमान मंदिर जाना।
- हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ, कई बार दोहराकर भी।
- हनुमान जी को तेल मिला सिंदूर (चोला) और लाल फूल अर्पित करना।
- बूँदी, लड्डू, भुने चने और गुड़ का भोग लगाना।
- कुछ घरों में दिनभर का व्रत।
- शोभा यात्राओं और रामचरितमानस के सामूहिक पाठ में शामिल होना।
तिथि कैसे तय होती है
हमारा पंचांग उत्तर भारतीय तिथि देता है: चैत्र पूर्णिमा। वह दिन लिया जाता है जिसमें सूर्योदय के समय पूर्णिमा चल रही हो, क्योंकि इस परंपरा में सूर्योदय की तिथि ही दिन की तिथि मानी जाती है। दूसरे क्षेत्रों में हनुमान जी का जन्मोत्सव बिल्कुल अलग तिथियों पर मनाया जाता है, जिनका विवरण नीचे है।
क्षेत्रीय अंतर
तमिलनाडु में हनुमत जयंती तमिल मास मार्गली की अमावस्या को मनाई जाती है, और कर्नाटक में मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मुख्य उत्सव वैशाख कृष्ण दशमी को होता है, जो चैत्र पूर्णिमा से शुरू होने वाली इकतालीस दिन की दीक्षा का समापन है। उत्तर भारत की कुछ परंपराएँ दीपावली से एक दिन पहले कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भी हनुमान जयंती मनाती हैं, इसलिए एक ही वर्ष में भक्त को एक से अधिक हनुमान जयंती मिल सकती हैं।
तिथियाँ और समय हमारा अपना इंजन गणना करता है (सूर्योदय, तिथि और काल नई दिल्ली के लिए, लाहिड़ी अयनांश)। दूसरे शहर में, या किसी दूसरी परंपरा के पंचांग में, तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है — अपने कुल पुरोहित की परंपरा मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हनुमान जयंती की अलग-अलग तिथियाँ क्यों हैं?
हनुमान जी के जन्म को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी परंपराएँ हैं। उत्तर भारत चैत्र पूर्णिमा, तमिलनाडु मार्गली अमावस्या, कर्नाटक मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी और तेलुगु राज्य वैशाख कृष्ण दशमी मानते हैं।
हनुमान जयंती कहें या हनुमान जन्मोत्सव?
दोनों नाम प्रचलित हैं। कुछ भक्त जन्मोत्सव कहना पसंद करते हैं क्योंकि मान्यता है कि हनुमान जी चिरंजीवी हैं, जबकि जयंती अधिक आम नाम है।
हनुमान जयंती पर पूजा किस समय की जाती है?
कई परंपराएँ जन्म सूर्योदय के समय मानती हैं, इसलिए भक्त सुबह जल्दी मंदिर जाते हैं, और पूजा-पाठ दिनभर चलता है। इस वर्ष की तिथि ऊपर दी गई है।