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व्रत · 2026

प्रदोष व्रत 2026 — सभी तिथियाँ

प्रदोष व्रत भगवान शिव के लिए महीने में दो बार त्रयोदशी को रखा जाता है, और इसकी पूजा सूर्यास्त के बाद संध्या में होती है।

2026 की तिथियाँ

प्रदोष व्रत 2026
नामतिथितिथि का समयप्रदोष पूजा
गुरु प्रदोष1 जनवरी 2026गुरुवार1 जनवरी, 01:48 – 1 जनवरी, 22:2217:35 – 20:19
शुक्र प्रदोष16 जनवरी 2026शुक्रवार15 जनवरी, 20:17 – 16 जनवरी, 22:2217:46 – 20:28
शुक्र प्रदोष30 जनवरी 2026शुक्रवार30 जनवरी, 11:09 – 31 जनवरी, 08:2617:58 – 20:36
शनि प्रदोष14 फ़रवरी 2026शनिवार14 फ़रवरी, 16:02 – 15 फ़रवरी, 17:0518:10 – 20:44
रवि प्रदोष1 मार्च 2026रविवार28 फ़रवरी, 20:43 – 1 मार्च, 19:0918:20 – 19:09
सोम प्रदोष16 मार्च 2026सोमवार16 मार्च, 09:41 – 17 मार्च, 09:2318:29 – 20:53
सोम प्रदोष30 मार्च 2026सोमवार30 मार्च, 07:10 – 31 मार्च, 06:5618:37 – 20:56
बुध प्रदोष15 अप्रैल 2026बुधवार15 अप्रैल, 00:12 – 15 अप्रैल, 22:3118:46 – 21:00
भौम प्रदोष28 अप्रैल 2026मंगलवार28 अप्रैल, 18:52 – 29 अप्रैल, 19:5218:54 – 21:04
गुरु प्रदोष14 मई 2026गुरुवार14 मई, 11:21 – 15 मई, 08:3119:04 – 21:09
गुरु प्रदोष28 मई 2026गुरुवार28 मई, 07:57 – 29 मई, 09:5119:12 – 21:14
शुक्र प्रदोष12 जून 2026शुक्रवार12 जून, 19:37 – 13 जून, 16:0819:37 – 21:19
शनि प्रदोष27 जून 2026शनिवार26 जून, 22:22 – 28 जून, 00:4319:22 – 21:23
रवि प्रदोष12 जुलाई 2026रविवार12 जुलाई, 02:04 – 12 जुलाई, 22:3019:21 – 21:23
रवि प्रदोष26 जुलाई 2026रविवार26 जुलाई, 13:58 – 27 जुलाई, 16:1519:15 – 21:20
सोम प्रदोष10 अगस्त 2026सोमवार10 अगस्त, 08:01 – 11 अगस्त, 04:5419:05 – 21:13
भौम प्रदोष25 अगस्त 2026मंगलवार25 अगस्त, 06:21 – 26 अगस्त, 07:5918:50 – 21:03
भौम प्रदोष8 सितंबर 2026मंगलवार8 सितंबर, 14:43 – 9 सितंबर, 12:3118:34 – 20:52
गुरु प्रदोष24 सितंबर 2026गुरुवार23 सितंबर, 22:50 – 24 सितंबर, 23:1818:15 – 20:38
गुरु प्रदोष8 अक्टूबर 2026गुरुवार7 अक्टूबर, 23:16 – 8 अक्टूबर, 22:1617:59 – 20:27
शुक्र प्रदोष23 अक्टूबर 2026शुक्रवार23 अक्टूबर, 14:36 – 24 अक्टूबर, 13:3717:43 – 20:16
शुक्र प्रदोष6 नवंबर 2026शुक्रवार6 नवंबर, 10:31 – 7 नवंबर, 10:4817:32 – 20:09
रवि प्रदोष22 नवंबर 2026रविवार22 नवंबर, 04:56 – 23 नवंबर, 02:3717:25 – 20:05
रवि प्रदोष6 दिसंबर 2026रविवार6 दिसंबर, 00:52 – 7 दिसंबर, 02:2217:23 – 20:07
सोम प्रदोष21 दिसंबर 2026सोमवार21 दिसंबर, 17:36 – 22 दिसंबर, 14:2417:36 – 20:12

समय नई दिल्ली के लिए (हमारी अपनी गणना, लाहिड़ी अयनांश)। पूरा त्योहार कैलेंडर

2027 की तिथियाँ

प्रदोष व्रत 2027
नामतिथितिथि का समयप्रदोष पूजा
भौम प्रदोष5 जनवरी 2027मंगलवार4 जनवरी, 18:16 – 5 जनवरी, 20:4017:38 – 20:21
बुध प्रदोष20 जनवरी 2027बुधवार20 जनवरी, 04:41 – 21 जनवरी, 01:1217:50 – 20:30
बुध प्रदोष3 फ़रवरी 2027बुधवार3 फ़रवरी, 13:50 – 4 फ़रवरी, 16:3118:01 – 20:38
गुरु प्रदोष18 फ़रवरी 2027गुरुवार18 फ़रवरी, 14:28 – 19 फ़रवरी, 11:1418:13 – 20:45
शुक्र प्रदोष5 मार्च 2027शुक्रवार5 मार्च, 09:54 – 6 मार्च, 12:0318:23 – 20:50
शनि प्रदोष20 मार्च 2027शनिवार19 मार्च, 23:17 – 20 मार्च, 20:4518:32 – 20:45
रवि प्रदोष4 अप्रैल 2027रविवार4 अप्रैल, 04:27 – 5 अप्रैल, 05:2318:40 – 20:57
रवि प्रदोष18 अप्रैल 2027रविवार18 अप्रैल, 07:42 – 19 अप्रैल, 06:0818:48 – 21:01
सोम प्रदोष3 मई 2027सोमवार3 मई, 20:04 – 4 मई, 19:3120:04 – 21:05
सोम प्रदोष17 मई 2027सोमवार17 मई, 16:28 – 18 मई, 16:0419:05 – 21:10
बुध प्रदोष2 जून 2027बुधवार2 जून, 08:29 – 3 जून, 06:3419:14 – 21:16
बुध प्रदोष16 जून 2027बुधवार16 जून, 02:31 – 17 जून, 03:2019:20 – 21:21
गुरु प्रदोष1 जुलाई 2027गुरुवार1 जुलाई, 18:15 – 2 जुलाई, 15:2319:23 – 21:23
गुरु प्रदोष15 जुलाई 2027गुरुवार15 जुलाई, 14:40 – 16 जुलाई, 16:3519:20 – 21:23
शनि प्रदोष31 जुलाई 2027शनिवार31 जुलाई, 02:18 – 31 जुलाई, 22:5819:13 – 21:18
शनि प्रदोष14 अगस्त 2027शनिवार14 अगस्त, 05:21 – 15 अगस्त, 07:5419:01 – 21:11
रवि प्रदोष29 अगस्त 2027रविवार29 अगस्त, 09:36 – 30 अगस्त, 06:1218:46 – 21:00
सोम प्रदोष13 सितंबर 2027सोमवार12 सितंबर, 22:13 – 14 सितंबर, 00:4018:29 – 20:48
सोम प्रदोष27 सितंबर 2027सोमवार27 सितंबर, 16:55 – 28 सितंबर, 13:5518:12 – 20:36
भौम प्रदोष12 अक्टूबर 2027मंगलवार12 अक्टूबर, 16:14 – 13 अक्टूबर, 17:4817:55 – 20:24
बुध प्रदोष27 अक्टूबर 2027बुधवार27 अक्टूबर, 01:03 – 27 अक्टूबर, 22:5017:40 – 20:14
गुरु प्रदोष11 नवंबर 2027गुरुवार11 नवंबर, 10:07 – 12 नवंबर, 10:2117:29 – 20:07
गुरु प्रदोष25 नवंबर 2027गुरुवार25 नवंबर, 10:51 – 26 नवंबर, 09:4817:24 – 20:05
शनि प्रदोष11 दिसंबर 2027शनिवार11 दिसंबर, 02:53 – 12 दिसंबर, 01:4317:24 – 20:08
शनि प्रदोष25 दिसंबर 2027शनिवार24 दिसंबर, 23:08 – 25 दिसंबर, 23:3217:30 – 20:14

प्रदोष व्रत क्या है

प्रदोष व्रत त्रयोदशी, यानी तेरहवीं तिथि, को रखा जाता है — शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों में — इसलिए यह महीने में लगभग दो बार आता है। सूर्यास्त के बाद का संध्या समय प्रदोष काल कहलाता है, और व्रत की पूजा इसी समय होती है। हर प्रदोष अपने वार के नाम से जाना जाता है: सोमवार को सोम प्रदोष, मंगलवार को भौम प्रदोष, बीच के दिनों में बुध, गुरु और शुक्र प्रदोष, शनिवार को शनि प्रदोष और रविवार को रवि प्रदोष। सोम और शनि प्रदोष विशेष माने जाते हैं।

प्रदोष की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। मंथन से जब हलाहल विष निकला, तो संसार को बचाने के लिए शिव ने उसे पी लिया। मान्यता है कि त्रयोदशी की संध्या को, जब देवता संकट से उबर गए, शिव ने कैलाश पर आनंद में नृत्य किया। इसीलिए प्रदोष काल को वह समय माना जाता है जब शिव सबसे प्रसन्न और सुलभ होते हैं, और कहा जाता है कि इस समय देवता भी उनकी आराधना के लिए जुटते हैं। एक और कथा एक निर्धन विधवा और उसके पुत्र की है, जिनके दिन यह व्रत रखने के बाद बदल गए।

लोग प्रदोष को शिव भक्ति के नियमित अभ्यास के रूप में, महीने में दो बार, रखते हैं। वार के साथ परंपरागत मान्यताएँ भी जुड़ी हैं: सोम प्रदोष शांति और कल्याण के लिए, शनि प्रदोष संतान की कामना या कठिनाइयों से राहत के लिए, और भौम प्रदोष स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। ये परंपरा से चली आ रही मान्यताएँ हैं; बहुत से लोग हर प्रदोष बस व्रत के संयम और संध्या पूजा की शांति के लिए रखते हैं।

कैसे मनाया जाता है

  • व्रत सूर्योदय से रखा जाता है, प्रायः फल, दूध या केवल जल के साथ, और शाम की पूजा के बाद खोला जाता है।
  • सूर्यास्त से पहले फिर से स्नान करें या हाथ-मुँह धो लें, और सूची में दिए प्रदोष काल में पूजा करें।
  • शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और घी चढ़ाया जाता है, और बेलपत्र, धतूरा, सफ़ेद फूल और चंदन अर्पित किए जाते हैं; नंदी की भी पूजा होती है।
  • उस वार की प्रदोष कथा पढ़ी जाती है, फिर ओम नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जप और आरती होती है।
  • बहुत से लोग संध्या को शिव मंदिर जाते हैं; दक्षिण भारत में प्रदोष का अभिषेक मंदिरों का बड़ा आयोजन होता है।
  • खान-पान का रिवाज अलग-अलग है: कुछ लोग पूजा के बाद बिना अन्न का एक समय भोजन करते हैं, कुछ सामान्य सात्विक भोजन।
  • गर्भवती, बुज़ुर्ग, मधुमेह के रोगी या दवा लेने वाले लोग हल्का व्रत रखें या न रखें, और शाम की पूजा करें। कोई बीमारी हो तो डॉक्टर से पूछ लें।

तिथि कैसे तय होती है

प्रदोष व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन प्रदोष काल में — यानी सूर्यास्त से लेकर उसके बाद की रात के पहले पाँचवें भाग तक — त्रयोदशी तिथि चल रही हो। यह जाँच शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की त्रयोदशी के लिए होती है। अगर लगातार दो दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी हो, तो व्रत उस दिन होता है जिस दिन वह प्रदोष काल का अधिक भाग घेरती है। चुने गए दिन के वार से प्रदोष का नाम तय होता है।

क्षेत्रीय अंतर

तमिलनाडु और दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में प्रदोषम मंदिरों का प्रमुख आयोजन है: संध्या में नंदी और शिव का अभिषेक होता है और भक्त सोमसूत्र प्रदक्षिणा नाम की विशेष परिक्रमा करते हैं। उत्तर भारत में यह ज़्यादातर घर पर कथा के साथ रखा जाता है। कुछ परंपराओं में प्रदोष व्रत की शुरुआत सोम या शनि प्रदोष से करने का रिवाज है, और कुछ लोग केवल शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी रखते हैं।

तिथियाँ और समय हमारा अपना इंजन गणना करता है (सूर्योदय, तिथि और काल नई दिल्ली के लिए, लाहिड़ी अयनांश)। दूसरे शहर में, या किसी दूसरी परंपरा के पंचांग में, तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है — अपने कुल पुरोहित की परंपरा मानें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रदोष की पूजा किस समय करें?

प्रदोष काल में, यानी सूर्यास्त से शुरू होने वाले संध्या समय में। सूची में हर तारीख के साथ आपके स्थान के लिए यह समय दिया गया है।

क्या प्रदोष व्रत में कुछ खा सकते हैं?

अधिकतर लोग दिन में फल, दूध और पानी लेते हैं और शाम की पूजा के बाद भोजन करते हैं। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं; यह अपनी इच्छा है, अनिवार्य नहीं।

कौन-सा प्रदोष सबसे महत्वपूर्ण है?

परंपरा में सोम प्रदोष (सोमवार) और शनि प्रदोष (शनिवार) सबसे विशेष माने जाते हैं, पर हर प्रदोष की पूजा एक जैसी ही होती है।

प्रदोष और मासिक शिवरात्रि में क्या अंतर है?

प्रदोष दोनों पक्षों की त्रयोदशी को होता है और इसकी पूजा संध्या में होती है। मासिक शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को, यानी कृष्ण त्रयोदशी के अगले दिन, होती है और इसकी पूजा रात में होती है।