त्योहार · 2026
भाई दूज 2026 — बुधवार, 11 नवंबर 2026
भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को दीपोत्सव का समापन करता है, जब बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और साथ बैठकर भोजन कराती हैं।
2026 में
बुधवार, 11 नवंबर 2026
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया (शुक्ल): 10 नवंबर, 14:00 – 11 नवंबर, 15:53
- चांद्र मास
- कार्तिक
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 06:40 / 17:29
| पूजा मुहूर्त | 13:09 – 15:19 |
|---|---|
| अपराह्न | 13:09 – 15:19 |
नियम: कार्तिक शुक्ल द्वितीया जो अपराह्न में हो; दोनों दिन हो तो जिस दिन अधिक व्याप्त।
2027 में
रविवार, 31 अक्टूबर 2027
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया (शुक्ल): 30 अक्टूबर, 17:52 – 31 अक्टूबर, 17:13
- चांद्र मास
- कार्तिक
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 06:32 / 17:37
| पूजा मुहूर्त | 13:11 – 15:24 |
|---|---|
| अपराह्न | 13:11 – 15:24 |
नियम: कार्तिक शुक्ल द्वितीया जो अपराह्न में हो; दोनों दिन हो तो जिस दिन अधिक व्याप्त।
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त से। दूसरे शहरों में मुहूर्त कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी तिथि एक दिन। पूरा त्योहार कैलेंडर
भाई दूज क्या है
भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, प्रायः दीपावली के दो दिन बाद आता है और पांच दिनों के दीपोत्सव का समापन करता है। बहनें भाइयों को घर बुलाती हैं, माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाती हैं, आरती उतारती हैं और अपने हाथ से बनाया भोजन कराती हैं। भाई उपहार लाते हैं और रक्षाबंधन की तरह साथ और सहारे का वचन देते हैं।
इस दिन को यम द्वितीया भी कहते हैं। मान्यता है कि यमुना बहुत समय से अपने भाई यमराज को घर बुला रही थीं, और इसी दिन वे आए। यमुना ने तिलक और भोज से उनका स्वागत किया, और प्रसन्न होकर यमराज ने कहा कि इस दिन जो भाई अपनी बहन से तिलक करवाएगा, उसे दीर्घायु का आशीर्वाद मिलेगा। एक अन्य कथा में नरकासुर वध के बाद श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने जाते हैं।
रक्षाबंधन जहां धागे पर केंद्रित है, वहीं भाई दूज मिलने और साथ भोजन करने पर: भाई अपनी बहनों के घर जाते हैं, खासकर विवाहित बहनों के, और पूरा परिवार साथ बैठकर खाता है। बहुतों के लिए यह दीपोत्सव का सबसे आत्मीय दिन है — दीयों, सफ़ाई और खरीदारी की भागदौड़ के बाद एक शांत समापन।
कैसे मनाया जाता है
- भाई अपनी बहनों के घर जाते हैं, प्रायः विवाहित बहनों के ससुराल।
- बहन थाली सजाती है — रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और सूखा नारियल।
- बहन तिलक लगाती है, आरती उतारती है और मिठाई खिलाती है; कुछ क्षेत्रों में कलाई पर कलावा भी बांधती है।
- बहन के हाथ का बना भोजन साथ बैठकर खाया जाता है और भाई उपहार देता है।
- मथुरा में इस दिन भाई-बहन साथ में यमुना स्नान करते हैं।
- जहां भाई न आ सके, वहां कई बहनें उसके नाम से पूजा करती हैं और मिठाई भेज देती हैं।
तिथि कैसे तय होती है
भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया है। परंपरा अपराह्न में, यानी दिन के पांच बराबर भागों में से चौथे भाग में, तिलक को उत्तम मानती है, इसलिए हमारा पंचांग यह पर्व उस दिन रखता है जिस दिन अपराह्न में द्वितीया हो। यदि दोनों दिन अपराह्न में द्वितीया हो, तो वह दिन लिया जाता है जिस दिन वह अपराह्न का अधिक भाग घेरती हो। उस दिन का अपराह्न काल ही तिलक मुहूर्त है।
क्षेत्रीय अंतर
महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में इसे भाऊबीज कहते हैं। बंगाल में यह भाई फोंटा है, जब बहनें भाई के माथे पर चंदन का टीका लगाने तक व्रत रखती हैं। नेपाल में तिहार के दौरान भाई टीका में सात रंगों का टीका और मखमली फूलों की माला होती है। अमांत और पूर्णिमांत दोनों गणनाओं में यह दिन कार्तिक मास में ही पड़ता है।
तिथियाँ और समय हमारा अपना इंजन गणना करता है (सूर्योदय, तिथि और काल नई दिल्ली के लिए, लाहिड़ी अयनांश)। दूसरे शहर में, या किसी दूसरी परंपरा के पंचांग में, तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है — अपने कुल पुरोहित की परंपरा मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाई दूज की कथा क्या है?
मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए, तिलक और भोज से उनका स्वागत हुआ, और उन्होंने इस दिन बहन से तिलक करवाने वाले हर भाई को दीर्घायु का आशीर्वाद दिया।
भाई दूज पर तिलक का सही समय क्या है?
परंपरा अपराह्न को उत्तम मानती है, यानी दिन के पांच भागों में से चौथा भाग। इस वर्ष का समय ऊपर दिया गया है।
क्या भाई दूज, भाऊबीज और भाई फोंटा एक ही हैं?
हां, ये एक ही दिन के क्षेत्रीय नाम हैं: महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में भाऊबीज, बंगाल में भाई फोंटा और नेपाल में भाई टीका।