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ग्रहण · 2025

पूर्ण चंद्र ग्रहण 14 मार्च 2025

पूर्ण चंद्र ग्रहण, 14 मार्च 2025 — परमग्रास 12:28 (IST), सिंह राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में। यह भारत के किसी भी नगर से नहीं दिखेगा, इसलिए परंपरा के अनुसार यहाँ सूतक भी नहीं माना जाता।

पूर्ण · चंद्र ग्रहण

मुख्य तथ्य

परमग्रास (IST)
12:28
14 मार्च 2025
परिमाण
1.182
प्रच्छाया में चंद्र व्यास
राशि · नक्षत्र
सिंह · उत्तरा फाल्गुनी
स्वामी सूर्य
भारत में
28 में से 0 नगर
सूतक नहीं
उपच्छाया आरंभ
14 मार्च 2025, 09:27
स्पर्श (आंशिक आरंभ)
14 मार्च 2025, 10:39
पूर्णता आरंभ
14 मार्च 2025, 11:55
परमग्रास
14 मार्च 2025, 12:28
पूर्णता समाप्त
14 मार्च 2025, 13:01
मोक्ष (आंशिक समाप्त)
14 मार्च 2025, 14:18
उपच्छाया समाप्त
14 मार्च 2025, 15:30

चंद्र ग्रहण के संपर्क-क्षण पूरी पृथ्वी पर एक ही होते हैं; नगर केवल यह तय करता है कि उस समय चंद्रमा क्षितिज के ऊपर है या नहीं।

भारत के नगरों में समय

स्पर्श से मोक्ष तक वह भाग जो चंद्रमा के क्षितिज के ऊपर रहते दिखता है (प्रच्छाया वाला भाग; उपच्छाया ग्रहण में उपच्छाया)। समय IST में, समुद्र तल पर।

नगरस्पर्श (आरंभ)मध्य (परमग्रास)मोक्ष (समाप्ति)अवधि
दिल्लीनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
मुंबईनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
कोलकातानहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
चेन्नईनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
बेंगलुरुनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
हैदराबादनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
अहमदाबादनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
पुणेनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
जयपुरनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
लखनऊनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
पटनानहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
भोपालनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
इंदौरनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
उज्जैननहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
नागपुरनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
वाराणसीनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
प्रयागराजनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
चंडीगढ़नहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
अमृतसरनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
श्रीनगरनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
देहरादूननहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
गुवाहाटीनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
भुवनेश्वरनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
रायपुरनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
राँचीनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
सूरतनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
कोच्चिनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।
तिरुवनंतपुरमनहीं दिखेगायहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं।

सूतक: परंपरा क्या कहती है

सूतक ग्रहण से पहले का वह समय है जिसमें परंपरा भोजन पकाने-खाने, पूजा-मूर्ति स्पर्श और शुभ कार्य आरंभ करने से बचने को कहती है। सूर्य ग्रहण में यह ग्रहण आरंभ से 12 घंटे (चार प्रहर) और चंद्र ग्रहण में 9 घंटे (तीन प्रहर) पहले से माना जाता है, और ग्रहण समाप्त होने पर उतरता है। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों के लिए अधिकांश परिवार इसमें ढील देते हैं।

सूतक केवल वहीं माना जाता है जहाँ ग्रहण दिखता है। जो नगर ऊपर ‘नहीं दिखेगा’ है, वहाँ सूतक नहीं; उपच्छाया चंद्र ग्रहण का सूतक सामान्यतः नहीं माना जाता। तालिका का सूतक आपके नगर के ग्रहण-आरंभ से गिना गया है। इसे मानना या न मानना आपकी पारिवारिक परंपरा का विषय है।

यह ग्रहण सिंह राशि में है — सिंह राशिफल

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पूर्ण चंद्र ग्रहण 14 मार्च 2025 भारत में दिखेगा?

नहीं। ग्रहण के समय भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे है या छाया यहाँ तक नहीं पहुँचती।

क्या चंद्र ग्रहण देखना सुरक्षित है?

हाँ। चंद्र ग्रहण को खुली आँख, दूरबीन या टेलीस्कोप से देखना पूरी तरह सुरक्षित है।

यह ग्रहण किस राशि और नक्षत्र में है?

सिंह राशि, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र (चंद्रमा की निरयन स्थिति, परमग्रास के समय)। भारत से न दिखने के कारण परंपरा यहाँ न सूतक मानती है, न ग्रहण के नियम।

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में। निरयन राशियाँ, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश; राहु स्पष्ट (true) पात, केतु ठीक सामने। हमारे अपने खगोलीय इंजन से गणना — स्विस एफ़ेमेरिस से मिलान पर राशि प्रवेश का अंतर 2 मिनट से कम (राहु-केतु 15 मिनट से कम)। ग्रहण हमारे इंजन के सूर्य और चंद्रमा से गिने जाते हैं; नगरों के समय स्विस एफ़ेमेरिस से मिलाए गए हैं (1–2 मिनट के भीतर; सूर्योदय/चंद्रोदय के समय कुछ मिनट)। नगर निर्देशांक: GeoNames।