नक्षत्र क्या है?
बारह राशियों से भी पहले भारतीय खगोलविदों ने चंद्रमा के मार्ग को 27 नक्षत्रों में बाँटा था — आकाश की परिक्रमा में चंद्रमा के हर दिन के लिए एक। हर नक्षत्र 13 अंश 20 कला का है और अपने पास के तारे या तारा-समूह के नाम पर है — अश्विनी, भरणी, कृत्तिका से लेकर रेवती तक।
हर नक्षत्र 3 अंश 20 कला के चार चरणों (पादों) में बँटा है। नौ चरण मिलकर एक राशि बनाते हैं — इसी तरह नक्षत्र और बारह राशियाँ आपस में जुड़ते हैं।
नक्षत्र स्वामी और आपकी दशा
नक्षत्रों के स्वामी नौ ग्रह एक दोहराते क्रम में हैं: केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध। विंशोत्तरी पद्धति में आपके जन्म नक्षत्र का स्वामी ही जीवन की पहली महादशा है, और चंद्रमा उस नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था, इससे तय होता है कि जन्म के समय उस दशा का कितना भाग शेष था। आपकी पूरी कुंडली यहीं से 120 वर्ष का पूरा क्रम दिखाती है।
देवता, गण, योनि और नाड़ी
परंपरा हर नक्षत्र को कुछ गुण देती है। कैलकुलेटर आपके दिखाता है:
- देवता: नक्षत्र के अधिष्ठाता वैदिक देवता — कृत्तिका के अग्नि, पुष्य के बृहस्पति, श्रवण के विष्णु।
- गण: स्वभाव — देव (सौम्य), मनुष्य (मिश्रित) या राक्षस (तीव्र, स्वतंत्र)। मिलान में गण कूट (6 अंक) के लिए।
- योनि: चौदह पशु प्रतीकों में से एक, नर या मादा — योनि कूट (4 अंक) के लिए, स्वाभाविक अनुकूलता का माप।
- नाड़ी: आदि, मध्य या अंत्य। गुण मिलान में नाड़ी कूट का भार सबसे अधिक है (36 में से 8 अंक)।
नामाक्षर: नाम का अक्षर
हर नक्षत्र के हर चरण का अपना अक्षर है — कुल 108। नामकरण की परंपरा में बच्चे का नाम जन्म के समय चंद्रमा के चरण के अक्षर से आरंभ होता है; जैसे रोहिणी के चरणों से ओ, वा, वी और वू। कैलकुलेटर आपके चरण का अक्षर और आपके नक्षत्र के चारों अक्षर दिखाता है। ये अक्षर प्रचलित उत्तर भारतीय तालिका से हैं; कुछ क्षेत्रीय पंचांगों में थोड़ा अंतर होता है।
गणना कैसे होती है
चंद्रमा का निरयण भोगांश (लाहिड़ी अयनांश) हमारे अपने इंजन से आता है, कुछ आर्कसेकंड तक सटीक। नक्षत्र उसी भोगांश को 27 बराबर भागों में बाँटकर, और चरण 108 भागों में बाँटकर मिलता है। जन्म समय जन्म स्थान के समय-क्षेत्र में पढ़ा जाता है। पारंपरिक गुण निश्चित शास्त्रीय तालिकाओं से हैं। गणना में AI का कोई उपयोग नहीं है।