पंचांग · नई दिल्ली
14 अगस्त 2026 का पंचांग, शुक्रवार
14 अगस्त 2026, शुक्रवार को नई दिल्ली में सूर्योदय 05:49 और सूर्यास्त 19:01 पर है। सूर्योदय के समय शुक्ल द्वितीया तिथि है (18:47 तक) और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र (15 अगस्त, 03:42 तक)। राहु काल 10:46 से 12:25 तक रहेगा, और अभिजित मुहूर्त 11:59 से 12:52 तक।
पिछले दिन से क्या बदला
- पिछले दिन सूर्योदय पर शुक्ल प्रतिपदा, आज शुक्ल द्वितीया।
- पिछले दिन सूर्योदय पर आश्लेषा, आज पूर्वा फाल्गुनी।
- अगले दिन (15 अगस्त 2026) सूर्योदय पर शुक्ल तृतीया।
इस दिन के व्रत और पर्व
- सावन सोमवार — श्रावण के सोमवार। उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन से श्रावण पूर्णिमा तक; महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण (अमांत) में आषाढ़ अमावस्या के अगले दिन से श्रावण अमावस्या तक। हर सीमा वह दिन जब उसकी तिथि सूर्योदय के समय हो।
पंचांग के पाँच अंग
नई दिल्ली के सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक जो भी तिथि, नक्षत्र, योग और करण रहे, सब अपने समाप्ति समय के साथ।
वार
शुक्रवार
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
तिथि
शुक्ल द्वितीया
18:47 तक
शुक्ल तृतीया
18:47 से 15 अगस्त, 17:29 तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनीस्वामी शुक्र
15 अगस्त, 03:42 तक
उत्तरा फाल्गुनीस्वामी सूर्य
15 अगस्त, 03:42 से 16 अगस्त, 03:25 तक
योग
परिघ
09:28 तक
शिव
09:28 से 15 अगस्त, 07:09 तक
करण
बालव
07:40 तक
कौलव
07:40 से 18:47 तक
तैतिल
18:47 से 15 अगस्त, 06:03 तक
चंद्र राशि
- सिंह15 अगस्त, 09:34 तक
सूर्य राशि: कर्क
टालने योग्य समय
- राहु काल10:46 – 12:25
- यमगंड15:43 – 17:22
- गुलिक काल07:28 – 09:07
- दुर्मुहूर्त 108:28 – 09:20
- दुर्मुहूर्त 212:52 – 13:44
शुभ समय
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:52
- पक्ष
- शुक्ल
- माह (अमांत / पूर्णिमांत)
- श्रावण / श्रावण
- संवत
- विक्रम 2083 · शक 1948
- ऋतु · अयन
- वर्षा · दक्षिणायन
- दिनमान
- 13 घं 12 मि
- अयनांश
- लाहिड़ी (चित्रपक्ष) 24°13′54″
चौघड़िया
दिन और रात, प्रत्येक आठ भागों में; अमृत, शुभ, लाभ शुभ; चर सामान्य; रोग, काल, उद्वेग त्याज्य।
दिन का चौघड़िया
- चरसामान्य05:49 – 07:28
- लाभअनुकूल07:28 – 09:07
- अमृतअनुकूल09:07 – 10:46
- कालत्याज्य10:46 – 12:25
- शुभअनुकूल12:25 – 14:04
- रोगत्याज्य14:04 – 15:43
- उद्वेगत्याज्य15:43 – 17:22
- चरसामान्य17:22 – 19:01
रात का चौघड़िया
- रोगत्याज्य19:01 – 20:22
- कालत्याज्य20:22 – 21:43
- लाभअनुकूल21:43 – 23:04
- उद्वेगत्याज्य23:04 – 00:25
- शुभअनुकूल00:25 – 01:47
- अमृतअनुकूल01:47 – 03:08
- चरसामान्य03:08 – 04:29
- रोगत्याज्य04:29 – 05:50
होरा
हर होरा का स्वामी ग्रह और आरंभ समय।
दिन की होरा
- शुक्र05:49
- बुध06:55
- चंद्र08:01
- शनि09:07
- गुरु10:13
- मंगल11:19
- सूर्य12:25
- शुक्र13:31
- बुध14:37
- चंद्र15:43
- शनि16:49
- गुरु17:55
रात की होरा
- मंगल19:01
- सूर्य19:55
- शुक्र20:49
- बुध21:43
- चंद्र22:37
- शनि23:31
- गुरु00:25
- मंगल01:20
- सूर्य02:14
- शुक्र03:08
- बुध04:02
- चंद्र04:56
14 अगस्त 2026, नई दिल्ली (28.62, 77.21), समय क्षेत्र Asia/Kolkata। सूर्योदय: ऊपरी किनारा, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। अमृत काल और वर्ज्य नहीं दिए गए — उनकी घटी-तालिकाएँ स्रोतों में भिन्न हैं।
14 अगस्त 2026: प्रश्न
14 अगस्त 2026 को कौन सी तिथि है?
14 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय शुक्ल द्वितीया तिथि (शुक्ल पक्ष) है, 18:47 तक; फिर शुक्ल तृतीया। माह श्रावण (अमांत) / श्रावण (पूर्णिमांत)।
14 अगस्त 2026 को कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय के समय पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, 15 अगस्त, 03:42 तक; फिर उत्तरा फाल्गुनी।
14 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में राहु काल कब है?
10:46 से 12:25 तक। यमगंड 15:43–17:22 और गुलिक 07:28–09:07।
14 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय 05:49 और सूर्यास्त 19:01 पर — सूर्य का ऊपरी किनारा, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित; यही परिपाटी भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) और दृक पंचांग की है। जो पंचांग सूर्य के केंद्र का समय बिना अपवर्तन के छापते हैं, उनमें सूर्योदय लगभग 3–4 मिनट बाद और सूर्यास्त उतना ही पहले होता है।
14 अगस्त 2026 को कोई व्रत या पर्व है?
सावन सोमवार: श्रावण के सोमवार। उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन से श्रावण पूर्णिमा तक; महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण (अमांत) में आषाढ़ अमावस्या के अगले दिन से श्रावण अमावस्या तक। हर सीमा वह दिन जब उसकी तिथि सूर्योदय के समय हो।
ये समय नई दिल्ली के हैं। इसी तारीख का पंचांग किसी और शहर के लिए: पंचांग खोज। शुभ कार्य का समय चाहिए? मुहूर्त खोजें.
पंचांग पढ़ना
- तिथि
- चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12° का अंतर एक तिथि है — एक चांद्र मास में 30 तिथियाँ, शुक्ल और कृष्ण पक्ष में 15-15। दिन की तिथि वह मानी जाती है जो सूर्योदय के समय चल रही हो; कभी एक तिथि सूर्योदय को छूती ही नहीं (क्षय) और कभी दो सूर्योदयों तक रहती है (वृद्धि)।
- नक्षत्र
- राशिचक्र के 27 बराबर भाग, हर एक 13°20′ का। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है। मुहूर्त और नामकरण में नक्षत्र सबसे अधिक देखा जाता है।
- योग
- सूर्य और चंद्रमा के निरयण अंशों का योग, 13°20′ के 27 भागों में। विष्कुंभ से वैधृति तक; व्यतीपात और वैधृति को शुभ कार्यों में टाला जाता है।
- करण
- तिथि का आधा भाग — एक दिन में प्रायः दो करण। विष्टि (भद्रा) करण में शुभ कार्य नहीं किए जाते।
- वार
- हिंदू वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से नहीं।
- राहु काल, यमगंड, गुलिक
- दिन के प्रकाश को आठ भागों में बाँटकर, वार के अनुसार एक-एक भाग। नया कार्य आरंभ करने के लिए इन्हें परंपरा में टाला जाता है; रोज़मर्रा का काम चलता रहता है।
- चौघड़िया और होरा
- चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है; होरा हर घंटे (दिन के बारहवें भाग) का स्वामी ग्रह बताती है। व्यापार और यात्रा के लिए इनका उपयोग आम है।
सारी गणना हमारा अपना इंजन करता है (VSOP87 / ELP, लाहिड़ी अयनांश), स्विस एफ़ेमेरिस से मिलाकर जाँचा गया; तिथि-नक्षत्र के समाप्ति समय लगभग 2 मिनट तक सटीक।