पंचांग · नई दिल्ली
29 सितंबर 2027 का पंचांग, बुधवार
29 सितंबर 2027, बुधवार को नई दिल्ली में सूर्योदय 06:12 और सूर्यास्त 18:09 पर है। सूर्योदय के समय कृष्ण चतुर्दशी तिथि है (10:55 तक) और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र (30 सितंबर, 04:00 तक)। राहु काल 12:11 से 13:41 तक रहेगा, और अभिजित मुहूर्त 11:47 से 12:35 तक।
पिछले दिन से क्या बदला
- पिछले दिन सूर्योदय पर कृष्ण त्रयोदशी, आज कृष्ण चतुर्दशी।
- पिछले दिन सूर्योदय पर मघा, आज उत्तरा फाल्गुनी।
- अगले दिन (30 सितंबर 2027) सूर्योदय पर अमावस्या।
इस दिन के व्रत और पर्व
- पितृ पक्ष — भाद्रपद पूर्णिमा के बाद की कृष्ण प्रतिपदा के श्राद्ध से सर्व पितृ अमावस्या तक (पूर्णिमांत में आश्विन कृष्ण); हर श्राद्ध तिथि अपराह्न व्यापिनी ली जाती है।
पंचांग के पाँच अंग
नई दिल्ली के सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक जो भी तिथि, नक्षत्र, योग और करण रहे, सब अपने समाप्ति समय के साथ।
वार
बुधवार
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी
10:55 तक
अमावस्या
10:55 से 30 सितंबर, 08:06 तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनीस्वामी सूर्य
30 सितंबर, 04:00 तक
हस्तस्वामी चंद्र
30 सितंबर, 04:00 से 1 अक्टूबर, 02:11 तक
योग
शुक्ल
30 सितंबर, 00:26 तक
ब्रह्म
30 सितंबर, 00:26 से 30 सितंबर, 21:09 तक
करण
शकुनि
10:55 तक
चतुष्पद
10:55 से 21:29 तक
नाग
21:29 से 30 सितंबर, 08:06 तक
चंद्र राशि
- सिंह11:34 तक
- कन्या1 अक्टूबर, 13:26 तक
सूर्य राशि: कन्या
टालने योग्य समय
- राहु काल12:11 – 13:41
- यमगंड07:42 – 09:12
- गुलिक काल10:41 – 12:11
- दुर्मुहूर्त11:47 – 12:35
शुभ समय
- अभिजित मुहूर्तबुधवार को परंपरा में इसका उपयोग नहीं होता।11:47 – 12:35
- पक्ष
- कृष्ण
- माह (अमांत / पूर्णिमांत)
- भाद्रपद / आश्विन
- संवत
- विक्रम 2084 · शक 1949
- ऋतु · अयन
- वर्षा · दक्षिणायन
- दिनमान
- 11 घं 57 मि
- अयनांश
- लाहिड़ी (चित्रपक्ष) 24°14′54″
चौघड़िया
दिन और रात, प्रत्येक आठ भागों में; अमृत, शुभ, लाभ शुभ; चर सामान्य; रोग, काल, उद्वेग त्याज्य।
दिन का चौघड़िया
- लाभअनुकूल06:12 – 07:42
- अमृतअनुकूल07:42 – 09:12
- कालत्याज्य09:12 – 10:41
- शुभअनुकूल10:41 – 12:11
- रोगत्याज्य12:11 – 13:41
- उद्वेगत्याज्य13:41 – 15:10
- चरसामान्य15:10 – 16:40
- लाभअनुकूल16:40 – 18:09
रात का चौघड़िया
- उद्वेगत्याज्य18:09 – 19:40
- शुभअनुकूल19:40 – 21:10
- अमृतअनुकूल21:10 – 22:41
- चरसामान्य22:41 – 00:11
- रोगत्याज्य00:11 – 01:42
- कालत्याज्य01:42 – 03:12
- लाभअनुकूल03:12 – 04:42
- उद्वेगत्याज्य04:42 – 06:13
होरा
हर होरा का स्वामी ग्रह और आरंभ समय।
दिन की होरा
- बुध06:12
- चंद्र07:12
- शनि08:12
- गुरु09:12
- मंगल10:11
- सूर्य11:11
- शुक्र12:11
- बुध13:11
- चंद्र14:10
- शनि15:10
- गुरु16:10
- मंगल17:10
रात की होरा
- सूर्य18:09
- शुक्र19:10
- बुध20:10
- चंद्र21:10
- शनि22:11
- गुरु23:11
- मंगल00:11
- सूर्य01:11
- शुक्र02:12
- बुध03:12
- चंद्र04:12
- शनि05:13
29 सितंबर 2027, नई दिल्ली (28.62, 77.21), समय क्षेत्र Asia/Kolkata। सूर्योदय: ऊपरी किनारा, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। अमृत काल और वर्ज्य नहीं दिए गए — उनकी घटी-तालिकाएँ स्रोतों में भिन्न हैं।
29 सितंबर 2027: प्रश्न
29 सितंबर 2027 को कौन सी तिथि है?
29 सितंबर 2027 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय कृष्ण चतुर्दशी तिथि (कृष्ण पक्ष) है, 10:55 तक; फिर अमावस्या। माह भाद्रपद (अमांत) / आश्विन (पूर्णिमांत)।
29 सितंबर 2027 को कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय के समय उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, 30 सितंबर, 04:00 तक; फिर हस्त।
29 सितंबर 2027 को नई दिल्ली में राहु काल कब है?
12:11 से 13:41 तक। यमगंड 07:42–09:12 और गुलिक 10:41–12:11।
29 सितंबर 2027 को नई दिल्ली में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय 06:12 और सूर्यास्त 18:09 पर — सूर्य का ऊपरी किनारा, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित; यही परिपाटी भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) और दृक पंचांग की है। जो पंचांग सूर्य के केंद्र का समय बिना अपवर्तन के छापते हैं, उनमें सूर्योदय लगभग 3–4 मिनट बाद और सूर्यास्त उतना ही पहले होता है।
29 सितंबर 2027 को कोई व्रत या पर्व है?
पितृ पक्ष: भाद्रपद पूर्णिमा के बाद की कृष्ण प्रतिपदा के श्राद्ध से सर्व पितृ अमावस्या तक (पूर्णिमांत में आश्विन कृष्ण); हर श्राद्ध तिथि अपराह्न व्यापिनी ली जाती है।
ये समय नई दिल्ली के हैं। इसी तारीख का पंचांग किसी और शहर के लिए: पंचांग खोज। शुभ कार्य का समय चाहिए? मुहूर्त खोजें.
पंचांग पढ़ना
- तिथि
- चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12° का अंतर एक तिथि है — एक चांद्र मास में 30 तिथियाँ, शुक्ल और कृष्ण पक्ष में 15-15। दिन की तिथि वह मानी जाती है जो सूर्योदय के समय चल रही हो; कभी एक तिथि सूर्योदय को छूती ही नहीं (क्षय) और कभी दो सूर्योदयों तक रहती है (वृद्धि)।
- नक्षत्र
- राशिचक्र के 27 बराबर भाग, हर एक 13°20′ का। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है। मुहूर्त और नामकरण में नक्षत्र सबसे अधिक देखा जाता है।
- योग
- सूर्य और चंद्रमा के निरयण अंशों का योग, 13°20′ के 27 भागों में। विष्कुंभ से वैधृति तक; व्यतीपात और वैधृति को शुभ कार्यों में टाला जाता है।
- करण
- तिथि का आधा भाग — एक दिन में प्रायः दो करण। विष्टि (भद्रा) करण में शुभ कार्य नहीं किए जाते।
- वार
- हिंदू वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से नहीं।
- राहु काल, यमगंड, गुलिक
- दिन के प्रकाश को आठ भागों में बाँटकर, वार के अनुसार एक-एक भाग। नया कार्य आरंभ करने के लिए इन्हें परंपरा में टाला जाता है; रोज़मर्रा का काम चलता रहता है।
- चौघड़िया और होरा
- चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है; होरा हर घंटे (दिन के बारहवें भाग) का स्वामी ग्रह बताती है। व्यापार और यात्रा के लिए इनका उपयोग आम है।
सारी गणना हमारा अपना इंजन करता है (VSOP87 / ELP, लाहिड़ी अयनांश), स्विस एफ़ेमेरिस से मिलाकर जाँचा गया; तिथि-नक्षत्र के समाप्ति समय लगभग 2 मिनट तक सटीक।