मुख्य सामग्री पर जाएँ
सतमार्ग ज्योतिषSatmarg Astro

राहु काल · पश्चिम बंगाल

महेशतला में आज का राहु काल

रविवार, 27 सितंबर 2026 को महेशतला में राहु काल 15:58 – 17:28 है — रविवार होने से दिन के आठ भागों में आठवाँ, सूर्योदय 05:27 और सूर्यास्त 17:28 के बीच।

रविवार, 27 सितंबर 2026

सूर्योदय 05:27सूर्यास्त 17:28दिनमान 12 घं 2 मि · हर भाग 90 मिनटरात्रिमान 11 घं 59 मि · हर भाग 90 मिनट
  • राहु कालनया आरंभ टालें15:58 – 17:28
  • यमगंडनया आरंभ टालें11:27 – 12:58
  • गुलिक कालकम महत्व14:28 – 15:58
  • अभिजित मुहूर्तशुभ11:03 – 11:51

समय महेशतला के स्थानीय समय (IST) में; "अभी" आपके उपकरण की घड़ी से।

महेशतला: अगले 7 दिन का राहु काल

वार बदलते ही राहु काल दिन के दूसरे भाग में चला जाता है; साथ ही सूर्योदय के साथ कुछ मिनट खिसकता है।

महेशतला का 7 दिन का राहु काल
दिनराहु कालयमगंडगुलिकसूर्योदय / सूर्यास्त
27 सितंबररविवार15:58 – 17:28दिन के आठ भागों में आठवाँ11:27 – 12:5814:28 – 15:5805:27 / 17:28
28 सितंबरसोमवार06:57 – 08:27दिन के आठ भागों में दूसरा09:57 – 11:2712:57 – 14:2705:27 / 17:27
29 सितंबरमंगलवार14:26 – 15:56दिन के आठ भागों में सातवाँ08:27 – 09:5711:27 – 12:5705:27 / 17:26
30 सितंबरबुधवार11:26 – 12:56दिन के आठ भागों में पाँचवाँ06:57 – 08:2709:57 – 11:2605:28 / 17:25
1 अक्टूबरगुरुवार12:56 – 14:25दिन के आठ भागों में छठा05:28 – 06:5708:27 – 09:5705:28 / 17:24
2 अक्टूबरशुक्रवार09:56 – 11:26दिन के आठ भागों में चौथा14:25 – 15:5406:58 – 08:2705:28 / 17:23
3 अक्टूबरशनिवार08:27 – 09:56दिन के आठ भागों में तीसरा12:55 – 14:2405:28 – 06:5805:28 / 17:22

महेशतला: राहु काल के प्रश्न

आज महेशतला में राहु काल कब है?

27 सितंबर 2026 (रविवार) को 15:58 – 17:28 — दिन के आठ भागों में आठवाँ। यमगंड 11:27 – 12:58 और गुलिक काल 14:28 – 15:58।

कल महेशतला में राहु काल कब है?

28 सितंबर 2026 (सोमवार) को 06:57 – 08:27।

क्या राहु काल में काम कर सकते हैं?

हाँ। परंपरा केवल नया आरंभ टालती है — यात्रा पर निकलना, ख़रीदारी, हस्ताक्षर। पहले से चल रहा काम, नौकरी, पढ़ाई या रोज़ का काम रोकने की ज़रूरत नहीं। कोई शुरुआत टाली न जा सके, तो उसे राहु काल से थोड़ा पहले या बाद में करें।

महेशतला के पास के शहरों का राहु काल

राहु काल क्या है

राहु काल हर दिन के दिनमान का आठवाँ भाग है, लगभग डेढ़ घंटा, जिसमें परंपरा नया आरंभ टालती है: यात्रा पर निकलना, ख़रीदारी, हस्ताक्षर, किसी काम की शुरुआत। इससे दिन का बाकी सामान्य काम अशुभ नहीं हो जाता, और जो काम पहले से चल रहा हो उसे रोकने की ज़रूरत नहीं।

यमगंड (यम से जुड़ा) और गुलिक काल (शनि-पुत्र गुलिक से जुड़ा) दिन के दो और आठवें भाग हैं, जिन्हें इसी तरह पर कम महत्व से देखा जाता है। बहुत से परिवार राहु काल और यमगंड देखते हैं; गुलिक का विचार दक्षिण भारत में अधिक होता है।

ये समय कैसे निकाले गए

इस शहर के सूर्योदय से सूर्यास्त तक का दिनमान (सूर्य का ऊपरी किनारा, सामान्य अपवर्तन, हमारे इंजन से) आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। कौन-सा भाग राहु काल होगा, यह केवल वार पर निर्भर है: सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ, यानी सूर्यास्त से पहले का अंतिम भाग। यमगंड और गुलिक का अपना-अपना वार क्रम है।

हर भाग इसी शहर के अपने दिन का अंश है, इसलिए प्रचलित तय सूची ("सोमवार 7:30 से 9:00") केवल विषुव के दिन, लगभग 82.5° पूर्व देशांतर वाले स्थान पर ही सही बैठती है। यहाँ समय हर सूर्योदय के साथ बदलता है — इसीलिए पूरब और पश्चिम के शहरों में, और सर्दी-गर्मी में, कई मिनट का अंतर आता है।

सप्ताह की तालिका

सप्ताह की तालिका में वार के साथ राहु काल का घूमना एक नज़र में दिखता है, ताकि आप कुछ दिन आगे की यात्रा या मुलाक़ात तय कर सकें। अगर शुरुआत टाली न जा सके, तो परंपरा की अपनी सलाह यही है कि उस समय से थोड़ा पहले या बाद में आरंभ करें।