कान बजने या अचानक गरम होने पर प्रचलित मान्यता है कि कोई कहीं आपके बारे में बात कर रहा है — दायाँ कान बजे तो तारीफ़, बायाँ बजे तो बुराई। यह मान्यता है, भविष्यवाणी नहीं; कान का बजना या गरम होना ज़्यादातर शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया है।
परंपरा क्या कहती है
| स्थिति | प्रचलित मान्यता |
|---|---|
| दायाँ कान बजना | कोई आपकी तारीफ़ कर रहा है, अच्छी ख़बर |
| बायाँ कान बजना | कोई पीठ पीछे बुराई कर रहा है |
| दोनों कान एक साथ बजना | किसी चर्चा के बीच में आपका नाम |
| कान अचानक गरम या लाल होना | कोई आपको याद कर रहा है या आपकी बात हो रही है |
| कान में खुजली | कहीं-कहीं कोई ख़बर मिलने की बात |
कुछ घरों में यह भी कहा जाता है कि बायाँ कान बजे तो उसे हल्का-सा खींच दें या कान में उँगली घुमा दें, ताकि "बुराई करने वाले की ज़ुबान रुक जाए" — यह घरेलू मज़ाक़ से ज़्यादा कुछ नहीं। कुछ इलाक़ों में दाएँ-बाएँ का अर्थ उलटा भी बताया जाता है।
यह मान्यता कहाँ से आई
यह मान्यता बहुत पुरानी और दुनिया भर में है। पहली सदी के रोमन लेखक प्लिनी ने लिखा था कि लोग मानते हैं कि कान जलें तो कोई उनके बारे में बात कर रहा है। अंग्रेज़ी में आज भी "माई इयर्स आर बर्निंग" मुहावरा इसी अर्थ में बोला जाता है। कारण सीधा है: कान वह अंग है जिससे हम बातें सुनते हैं, इसलिए उसमें अचानक हलचल हो तो लगता है जैसे कहीं से कोई बात "सुनाई" दे रही है। दाएँ-बाएँ का बँटवारा बाक़ी अंग-शकुनों जैसा ही है।
असली कारण
कान गरम या लाल होना: शर्म, घबराहट, ग़ुस्सा, धूप, गरम चाय या कसरत में कानों की पतली त्वचा में ख़ून का बहाव बढ़ जाता है, इसलिए कान लाल और गरम लगते हैं — मज़े की बात है कि जब हमें लगता है कि कोई हमारी बात कर रहा है, तो उस घबराहट से भी कान लाल हो सकते हैं।
कान बजना (सीटी, घंटी या भिनभिनाहट): चिकित्सा में इसे टिनिटस कहा जाता है। कुछ सेकंड के लिए यह लगभग सबको होता है। आम कारण:
- तेज़ आवाज़ के बाद (शादी का डीजे, पटाख़े, हेडफ़ोन)
- कान में मैल जमना
- सर्दी-ज़ुकाम में कान बंद होना
- तनाव और थकान
डॉक्टर को कब दिखाएँ: अगर आवाज़ लगातार बनी रहे या बार-बार लौटे, केवल एक कान में हो, साथ में सुनाई कम दे, चक्कर आएँ, कान में दर्द या पानी आए — तब ईएनटी डॉक्टर से मिलें। कान में माचिस की तीली या पिन न डालें।
एक शांत सलाह
अगर दायाँ कान बजे और आप सोचें कि कोई तारीफ़ कर रहा है, तो मुस्कुरा लें। पर बायाँ कान बजने पर किसी पर शक करने की ज़रूरत नहीं — किसी रिश्ते को एक सनसनाहट के भरोसे न तौलें। और तेज़ आवाज़ से कानों को बचाना इस शकुन की सबसे काम की सीख है।
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