तिथि · नई दिल्ली
आज की तिथि: शुक्ल अष्टमी
19 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इस समय शुक्ल अष्टमी तिथि है — 18 अक्टूबर, 08:28 से 10:52 तक। इसके बाद शुक्ल नवमी, 20 अक्टूबर, 12:50 तक।
अभी
शुक्ल अष्टमी
18 अक्टूबर, 08:28 से 10:52 तक
इसके बाद
शुक्ल नवमी
10:52 से 20 अक्टूबर, 12:50 तक
फिर
शुक्ल दशमी
20 अक्टूबर, 12:50 से 21 अक्टूबर, 14:12 तक
समय नई दिल्ली के स्थानीय समय (IST) में हैं; "अभी" इस पन्ने के बनने के समय का है।
आज सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- शुक्ल अष्टमीसूर्योदय पर18 अक्टूबर, 08:28 से 10:52 तक
- शुक्ल नवमी10:52 से 20 अक्टूबर, 12:50 तक
आने वाले दिनों में सूर्योदय पर तिथि
| दिन | तिथि | समाप्ति |
|---|---|---|
| 19 अक्टूबर सोमवार | शुक्ल अष्टमी | 10:52 |
| 20 अक्टूबर मंगलवार | शुक्ल नवमी | 12:50 |
| 21 अक्टूबर बुधवार | शुक्ल दशमी | 14:12 |
| 22 अक्टूबर गुरुवार | शुक्ल एकादशी | 14:48 |
| 23 अक्टूबर शुक्रवार | शुक्ल द्वादशी | 14:36 |
| 24 अक्टूबर शनिवार | शुक्ल त्रयोदशी | 13:37 |
| 25 अक्टूबर रविवार | शुक्ल चतुर्दशी | 11:56 |
| 26 अक्टूबर सोमवार | पूर्णिमा | 09:41 |
अगले तिथि-व्रत
- पापांकुशा एकादशी — 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार
- आश्विन पूर्णिमा — 26 अक्टूबर 2026, सोमवार
- कार्तिक अमावस्या — 9 नवंबर 2026, सोमवार
प्रश्न
आज कौन सी तिथि है?
19 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इस समय शुक्ल अष्टमी तिथि है — 18 अक्टूबर, 08:28 से 10:52 तक। इसके बाद शुक्ल नवमी, 20 अक्टूबर, 12:50 तक।
अगली तिथि कब शुरू होगी?
शुक्ल नवमी 10:52 पर शुरू होकर 20 अक्टूबर, 12:50 तक रहेगी (नई दिल्ली का समय)।
क्या तिथि हर शहर में एक ही समय बदलती है?
हाँ — तिथि सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोण से तय होती है, इसलिए बदलने का क्षण पूरे विश्व में एक है; केवल घड़ी का समय क्षेत्र बदलता है। पर दिन की (सूर्योदय की) तिथि हर शहर के अपने सूर्योदय से तय होती है, इसलिए कभी-कभी शहरों में अलग हो सकती है।
तिथि क्या है
चंद्रमा सूर्य से हर 12° आगे बढ़ने पर एक तिथि पूरी करता है। एक चांद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं — शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से पूर्णिमा तक और कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से अमावस्या तक। चंद्रमा की गति बदलती रहती है, इसलिए एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है।
व्रत और पर्व के लिए दिन की तिथि वह मानी जाती है जो सूर्योदय के समय चल रही हो (उदया तिथि)। इसलिए कभी एक तिथि दो दिन सूर्योदय पर रहती है (वृद्धि), और कभी कोई तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती (क्षय)। कुछ व्रत — जैसे प्रदोष या संकष्टी — सूर्यास्त या चंद्रोदय के समय की तिथि से देखे जाते हैं।
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