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अवधि · 2027

भद्रा 2027: महीने-वार समय और भद्रा वास

भद्रा विष्टि करण है — ग्यारह करणों (आधी तिथियों) में से एक — जो हर चांद्र मास में आठ बार आती है और परंपरा में शुभ कामों की शुरुआत के लिए टाली जाती है।

2027 में भद्रा

जनवरी 2027

भद्रा जनवरी 2027
समयवास (चंद्र राशि)
2 जनवरी, 01:43 – 14:24पाताल लोक (तुला)
5 जनवरी, 20:40 – 6 जनवरी, 09:56स्वर्ग लोक (वृश्चिक)से 03:07: पाताल लोक (धनु)
11 जनवरी, 22:32 – 12 जनवरी, 11:29पृथ्वी (मृत्युलोक) (कुंभ)
15 जनवरी, 14:13 – 16 जनवरी, 02:04पृथ्वी (मृत्युलोक) (मीन)से 23:51: स्वर्ग लोक (मेष)
18 जनवरी, 21:13 – 19 जनवरी, 07:49स्वर्ग लोक (वृषभ)
21 जनवरी, 21:30 – 22 जनवरी, 07:38स्वर्ग लोक (मिथुन)से 05:10: पृथ्वी (मृत्युलोक) (कर्क)
24 जनवरी, 21:30 – 25 जनवरी, 08:10पृथ्वी (मृत्युलोक) (सिंह)
28 जनवरी, 03:54 – 15:52पाताल लोक (कन्या)से 12:08: पाताल लोक (तुला)
31 जनवरी, 19:34 – 1 फ़रवरी, 08:41स्वर्ग लोक (वृश्चिक)

फ़रवरी 2027

भद्रा फ़रवरी 2027
समयवास (चंद्र राशि)
4 फ़रवरी, 16:31 – 5 फ़रवरी, 05:50पाताल लोक (धनु)से 22:18: पाताल लोक (मकर)
10 फ़रवरी, 14:46 – 11 फ़रवरी, 03:04पृथ्वी (मृत्युलोक) (मीन)
14 फ़रवरी, 02:07 – 13:28स्वर्ग लोक (मेष)से 11:27: स्वर्ग लोक (वृषभ)
17 फ़रवरी, 06:58 – 17:32स्वर्ग लोक (मिथुन)
20 फ़रवरी, 08:00 – 18:25पृथ्वी (मृत्युलोक) (कर्क)से 16:07: पृथ्वी (मृत्युलोक) (सिंह)
23 फ़रवरी, 10:39 – 21:49पाताल लोक (कन्या)
26 फ़रवरी, 20:43 – 27 फ़रवरी, 09:13पाताल लोक (तुला)से 05:14: स्वर्ग लोक (वृश्चिक)

मार्च 2027

भद्रा मार्च 2027
समयवास (चंद्र राशि)
2 मार्च, 15:24 – 3 मार्च, 04:44पाताल लोक (धनु)
6 मार्च, 12:03 – 7 मार्च, 00:59पाताल लोक (मकर)से 17:34: पृथ्वी (मृत्युलोक) (कुंभ)
12 मार्च, 03:20 – 14:57स्वर्ग लोक (मेष)
15 मार्च, 10:51 – 21:55स्वर्ग लोक (वृषभ)से 20:51: स्वर्ग लोक (मिथुन)
18 मार्च, 15:07 – 19 मार्च, 01:51पृथ्वी (मृत्युलोक) (कर्क)
21 मार्च, 18:21 – 22 मार्च, 05:15पृथ्वी (मृत्युलोक) (सिंह)से 03:44: पाताल लोक (कन्या)
25 मार्च, 00:51 – 12:38पाताल लोक (तुला)
28 मार्च, 15:05 – 29 मार्च, 04:04स्वर्ग लोक (वृश्चिक)से 00:32: पाताल लोक (धनु)

अप्रैल 2027

भद्रा अप्रैल 2027
समयवास (चंद्र राशि)
1 अप्रैल, 11:33 – 2 अप्रैल, 00:45पाताल लोक (मकर)
5 अप्रैल, 05:23 – 17:37पृथ्वी (मृत्युलोक) (कुंभ)से 11:32: पृथ्वी (मृत्युलोक) (मीन)
10 अप्रैल, 12:37 – 23:40स्वर्ग लोक (वृषभ)
13 अप्रैल, 17:29 – 14 अप्रैल, 04:26स्वर्ग लोक (मिथुन)
16 अप्रैल, 22:24 – 17 अप्रैल, 09:28पृथ्वी (मृत्युलोक) (सिंह)
20 अप्रैल, 04:51 – 16:21पाताल लोक (कन्या)
23 अप्रैल, 15:54 – 24 अप्रैल, 04:21स्वर्ग लोक (वृश्चिक)
27 अप्रैल, 09:57 – 23:13पाताल लोक (धनु)से 21:11: पाताल लोक (मकर)

मई 2027

भद्रा मई 2027
समयवास (चंद्र राशि)
1 मई, 06:08 – 18:54पृथ्वी (मृत्युलोक) (कुंभ)
4 मई, 19:31 – 5 मई, 06:58पृथ्वी (मृत्युलोक) (मीन)से 03:15: स्वर्ग लोक (मेष)
9 मई, 19:43 – 10 मई, 06:23स्वर्ग लोक (मिथुन)
12 मई, 23:13 – 13 मई, 10:13पृथ्वी (मृत्युलोक) (कर्क)
16 मई, 05:43 – 17:13पाताल लोक (कन्या)
19 मई, 16:03 – 20 मई, 04:12पाताल लोक (तुला)
23 मई, 07:41 – 20:42पाताल लोक (धनु)
27 मई, 04:05 – 17:18पाताल लोक (मकर)
30 मई, 21:55 – 31 मई, 10:02पृथ्वी (मृत्युलोक) (मीन)

जून 2027

भद्रा जून 2027
समयवास (चंद्र राशि)
3 जून, 06:34 – 17:24स्वर्ग लोक (मेष)से 16:37: स्वर्ग लोक (वृषभ)
8 जून, 01:52 – 12:22पृथ्वी (मृत्युलोक) (कर्क)
11 जून, 05:14 – 16:26पृथ्वी (मृत्युलोक) (सिंह)
14 जून, 14:07 – 15 जून, 02:08पाताल लोक (तुला)
18 जून, 04:35 – 17:21स्वर्ग लोक (वृश्चिक)
21 जून, 23:50 – 22 जून, 13:07पाताल लोक (मकर)
25 जून, 20:17 – 26 जून, 09:09पृथ्वी (मृत्युलोक) (कुंभ)
29 जून, 10:33 – 22:04स्वर्ग लोक (मेष)

जुलाई 2027

भद्रा जुलाई 2027
समयवास (चंद्र राशि)
2 जुलाई, 15:23 – 3 जुलाई, 01:47स्वर्ग लोक (वृषभ)
7 जुलाई, 08:13 – 18:44पृथ्वी (मृत्युलोक) (सिंह)
10 जुलाई, 12:37 – 11 जुलाई, 00:09पाताल लोक (कन्या)
14 जुलाई, 00:36 – 13:10स्वर्ग लोक (वृश्चिक)
17 जुलाई, 18:48 – 18 जुलाई, 08:00पाताल लोक (धनु)
21 जुलाई, 15:35 – 22 जुलाई, 04:47पृथ्वी (मृत्युलोक) (कुंभ)
25 जुलाई, 09:53 – 22:14पृथ्वी (मृत्युलोक) (मीन)
28 जुलाई, 20:30 – 29 जुलाई, 07:34स्वर्ग लोक (वृषभ)
31 जुलाई, 22:58 – 1 अगस्त, 09:10स्वर्ग लोक (मिथुन)

अगस्त 2027

भद्रा अगस्त 2027
समयवास (चंद्र राशि)
5 अगस्त, 15:44 – 6 अगस्त, 02:27पाताल लोक (कन्या)
8 अगस्त, 22:24 – 9 अगस्त, 10:24पाताल लोक (तुला)
12 अगस्त, 13:56 – 13 अगस्त, 03:00पाताल लोक (धनु)
16 अगस्त, 10:29 – 23:45पाताल लोक (मकर)
20 अगस्त, 06:08 – 18:53पृथ्वी (मृत्युलोक) (मीन)
23 अगस्त, 20:53 – 24 अगस्त, 08:43स्वर्ग लोक (मेष)
27 अगस्त, 04:36 – 15:25स्वर्ग लोक (मिथुन)
30 अगस्त, 06:12 – 16:27पृथ्वी (मृत्युलोक) (कर्क)

सितंबर 2027

भद्रा सितंबर 2027
समयवास (चंद्र राशि)
4 सितंबर, 01:17 – 12:26पाताल लोक (कन्या)से 03:16: पाताल लोक (तुला)
7 सितंबर, 11:28 – 8 सितंबर, 00:01स्वर्ग लोक (वृश्चिक)
11 सितंबर, 06:17 – 19:36पाताल लोक (धनु)से 06:37: पाताल लोक (मकर)
15 सितंबर, 02:48 – 15:44पृथ्वी (मृत्युलोक) (कुंभ)
18 सितंबर, 19:00 – 19 सितंबर, 07:09स्वर्ग लोक (मेष)
22 सितंबर, 05:52 – 17:17स्वर्ग लोक (वृषभ)
25 सितंबर, 11:45 – 22:31पृथ्वी (मृत्युलोक) (कर्क)
28 सितंबर, 13:55 – 29 सितंबर, 00:24पृथ्वी (मृत्युलोक) (सिंह)

अक्टूबर 2027

भद्रा अक्टूबर 2027
समयवास (चंद्र राशि)
3 अक्टूबर, 13:42 – 4 अक्टूबर, 01:28पाताल लोक (तुला)से 17:56: स्वर्ग लोक (वृश्चिक)
7 अक्टूबर, 04:13 – 17:17पाताल लोक (धनु)
11 अक्टूबर, 00:57 – 14:09पाताल लोक (मकर)से 02:55: पृथ्वी (मृत्युलोक) (कुंभ)
14 अक्टूबर, 18:49 – 15 अक्टूबर, 07:07पृथ्वी (मृत्युलोक) (मीन)
18 अक्टूबर, 06:20 – 17:52स्वर्ग लोक (वृषभ)
21 अक्टूबर, 13:42 – 22 अक्टूबर, 00:50स्वर्ग लोक (मिथुन)
24 अक्टूबर, 18:48 – 25 अक्टूबर, 05:40पृथ्वी (मृत्युलोक) (सिंह)
27 अक्टूबर, 22:50 – 28 अक्टूबर, 09:47पाताल लोक (कन्या)

नवंबर 2027

भद्रा नवंबर 2027
समयवास (चंद्र राशि)
2 नवंबर, 05:33 – 18:02स्वर्ग लोक (वृश्चिक)से 11:06: पाताल लोक (धनु)
6 नवंबर, 00:09 – 13:29पाताल लोक (मकर)
9 नवंबर, 20:28 – 10 नवंबर, 09:11पृथ्वी (मृत्युलोक) (कुंभ)से 22:57: पृथ्वी (मृत्युलोक) (मीन)
13 नवंबर, 09:55 – 21:29स्वर्ग लोक (मेष)
16 नवंबर, 16:43 – 17 नवंबर, 03:42स्वर्ग लोक (वृषभ)से 17:22: स्वर्ग लोक (मिथुन)
19 नवंबर, 21:20 – 20 नवंबर, 08:18पृथ्वी (मृत्युलोक) (कर्क)
23 नवंबर, 02:35 – 13:45पाताल लोक (कन्या)
26 नवंबर, 09:48 – 21:24पाताल लोक (तुला)

दिसंबर 2027

भद्रा दिसंबर 2027
समयवास (चंद्र राशि)
2 दिसंबर, 00:38 – 13:44पाताल लोक (धनु)से 06:24: पाताल लोक (मकर)
5 दिसंबर, 21:37 – 6 दिसंबर, 10:52पृथ्वी (मृत्युलोक) (कुंभ)
9 दिसंबर, 15:15 – 10 दिसंबर, 03:20पृथ्वी (मृत्युलोक) (मीन)से 17:27: स्वर्ग लोक (मेष)
12 दिसंबर, 23:55 – 13 दिसंबर, 10:50स्वर्ग लोक (वृषभ)
16 दिसंबर, 02:47 – 13:22स्वर्ग लोक (मिथुन)से 03:45: पृथ्वी (मृत्युलोक) (कर्क)
19 दिसंबर, 05:36 – 16:32पृथ्वी (मृत्युलोक) (सिंह)
22 दिसंबर, 12:05 – 23:41पाताल लोक (कन्या)से 12:14: पाताल लोक (तुला)
25 दिसंबर, 23:32 – 26 दिसंबर, 11:54स्वर्ग लोक (वृश्चिक)
31 दिसंबर, 21:33 – 1 जनवरी, 10:55पाताल लोक (मकर)से 02:40: पृथ्वी (मृत्युलोक) (कुंभ)

समय नई दिल्ली की घड़ी (IST) में, हमारे अपने इंजन से, लाहिड़ी अयनांश।

भद्रा क्या है

करण तिथि का आधा भाग है। ग्यारह करणों में से सात महीने भर दोहराते रहते हैं, और उनमें से एक विष्टि है, जिसे भद्रा कहते हैं। यह शुक्ल चतुर्थी व एकादशी तथा कृष्ण तृतीया व दशमी के उत्तरार्ध में, और शुक्ल अष्टमी व पूर्णिमा तथा कृष्ण सप्तमी व चतुर्दशी के पूर्वार्ध में आती है — साल में लगभग 99 बार, हर बार लगभग आधे दिन की।

मुहूर्त चिंतामणि चंद्रमा की राशि से भद्रा का वास तीन लोकों में बताती है: चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन में हो तो पृथ्वी पर; मेष, वृषभ, मिथुन या वृश्चिक में हो तो स्वर्ग में; और कन्या, तुला, धनु या मकर में हो तो पाताल में। परंपरा पृथ्वी की भद्रा को सबसे अधिक टालती है; बहुत से पंचांग स्वर्ग या पाताल की भद्रा को धरती के कामों के लिए हानिरहित मानते हैं।

भद्रा दो त्योहारों से सबसे अधिक जानी जाती है। राखी भद्रा के बाहर बाँधी जाती है, और होलिका दहन भी भद्रा के बाहर होता है — इसीलिए इनके मुहूर्त कभी-कभी देर शाम तक खिसक जाते हैं।

परंपरा में क्या टाला जाता है

ये रिवाज हैं, नियम नहीं; परिवारों और क्षेत्रों में मान्यता अलग है।

  • शुभ संस्कारों की शुरुआत: विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या नया व्यापार।
  • राखी बाँधना और होलिका दहन।
  • यात्रा या बड़ी ख़रीदारी की शुरुआत — उनके लिए जो मुहूर्त का बारीकी से पालन करते हैं।

रोज़ का काम, पूजा और पढ़ाई चलती रहती है। ग्रंथ भद्रा में साहस के काम, मुक़दमे और उपचार की अनुमति भी देते हैं, और किसी त्योहार का दूसरा समय न हो तो बहुत से आचार्य भद्रा के अंतिम भाग (भद्रा पुच्छ) का उपयोग करते हैं।

हम इसे कैसे निकालते हैं

हम चंद्र-सूर्य के अंतर से करण निकालते हैं (हर करण 6° का) और हर विष्टि की सूची देते हैं। किसी भद्रा के दौरान चंद्रमा राशि बदले तो पंक्ति में दोनों भाग अपने वास के साथ दिखते हैं। हम भद्रा को मुख और पुच्छ में नहीं बाँटते।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भद्रा कितनी देर रहती है?

लगभग आधा दिन: एक करण, यानी आधी तिथि, जो चंद्रमा की गति के अनुसार प्रायः 11 से 13 घंटे की होती है।

क्या स्वर्ग या पाताल की भद्रा भी टालनी चाहिए?

बहुत से पंचांग कहते हैं कि केवल पृथ्वी की भद्रा (चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन में) धरती के कामों पर असर डालती है। परिवारों में मान्यता अलग है; तालिका में वास दिया है ताकि आप अपनी परंपरा मान सकें।

भद्रा में राखी क्यों नहीं बाँधते?

परंपरा में भद्रा शुभ शुरुआत के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती, और त्योहार के ग्रंथ राखी भद्रा के बाहर बाँधने को कहते हैं। हमारे रक्षा बंधन पृष्ठ पर भद्रा-रहित मुहूर्त दिया है।