ग्रहण · 2027
वलयाकार सूर्य ग्रहण 6 फ़रवरी 2027
वलयाकार सूर्य ग्रहण, 6 फ़रवरी 2027 — परमग्रास 21:29 (IST), मकर राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में। यह भारत के किसी भी नगर से नहीं दिखेगा, इसलिए परंपरा के अनुसार यहाँ सूतक भी नहीं माना जाता।
वलयाकार · सूर्य ग्रहण
मुख्य तथ्य
- परमग्रास (IST)
- 21:29
- 6 फ़रवरी 2027
- परिमाण
- 0.928
- सूर्य का व्यास, परमग्रास पर
- राशि · नक्षत्र
- मकर · धनिष्ठा
- स्वामी मंगल
- भारत में
- 28 में से 0 नगर
- सूतक नहीं
- पृथ्वी पर आरंभ
- 6 फ़रवरी 2027, 18:27
- परमग्रास
- 6 फ़रवरी 2027, 21:29
- पृथ्वी पर समाप्त
- 7 फ़रवरी 2027, 00:31
ये पृथ्वी पर कहीं भी ग्रहण के आरंभ और अंत के समय हैं; आपके नगर का समय नीचे की तालिका में है।
भारत के नगरों में समय
स्पर्श से मोक्ष तक वह भाग जो सूर्य के क्षितिज के ऊपर रहते दिखता है। समय IST में, समुद्र तल पर।
| नगर | स्पर्श (आरंभ) | मध्य (परमग्रास) | मोक्ष (समाप्ति) | अवधि | ग्रास |
|---|---|---|---|---|---|
| दिल्लीनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| मुंबईनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| कोलकातानहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| चेन्नईनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| बेंगलुरुनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| हैदराबादनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| अहमदाबादनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| पुणेनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| जयपुरनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| लखनऊनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| पटनानहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| भोपालनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| इंदौरनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| उज्जैननहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| नागपुरनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| वाराणसीनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| प्रयागराजनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| चंडीगढ़नहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| अमृतसरनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| श्रीनगरनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| देहरादूननहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| गुवाहाटीनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| भुवनेश्वरनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| रायपुरनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| राँचीनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| सूरतनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| कोच्चिनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
| तिरुवनंतपुरमनहीं दिखेगा | यहाँ से नहीं दिखेगा — इसलिए परंपरा के अनुसार सूतक भी लागू नहीं। | ||||
सूतक: परंपरा क्या कहती है
सूतक ग्रहण से पहले का वह समय है जिसमें परंपरा भोजन पकाने-खाने, पूजा-मूर्ति स्पर्श और शुभ कार्य आरंभ करने से बचने को कहती है। सूर्य ग्रहण में यह ग्रहण आरंभ से 12 घंटे (चार प्रहर) और चंद्र ग्रहण में 9 घंटे (तीन प्रहर) पहले से माना जाता है, और ग्रहण समाप्त होने पर उतरता है। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों के लिए अधिकांश परिवार इसमें ढील देते हैं।
सूतक केवल वहीं माना जाता है जहाँ ग्रहण दिखता है। जो नगर ऊपर ‘नहीं दिखेगा’ है, वहाँ सूतक नहीं; उपच्छाया चंद्र ग्रहण का सूतक सामान्यतः नहीं माना जाता। तालिका का सूतक आपके नगर के ग्रहण-आरंभ से गिना गया है। इसे मानना या न मानना आपकी पारिवारिक परंपरा का विषय है।
सूर्य ग्रहण को कभी सीधी आँख या धूप के चश्मे से न देखें — ISO 12312-2 प्रमाणित सौर चश्मा या पिनहोल प्रोजेक्टर प्रयोग करें।
यह ग्रहण मकर राशि में है — मकर राशिफल
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या वलयाकार सूर्य ग्रहण 6 फ़रवरी 2027 भारत में दिखेगा?
नहीं। ग्रहण के समय भारत में सूर्य क्षितिज के नीचे है या छाया यहाँ तक नहीं पहुँचती।
क्या सूर्य ग्रहण देखना सुरक्षित है?
सीधी आँख, धूप के चश्मे, एक्स-रे फ़िल्म या पानी में प्रतिबिंब से कभी नहीं — आंशिक ग्रहण में भी आँख को स्थायी क्षति हो सकती है। ISO 12312-2 प्रमाणित सौर चश्मा या पिनहोल प्रोजेक्टर प्रयोग करें।
यह ग्रहण किस राशि और नक्षत्र में है?
मकर राशि, धनिष्ठा नक्षत्र (सूर्य की निरयन स्थिति, परमग्रास के समय)। भारत से न दिखने के कारण परंपरा यहाँ न सूतक मानती है, न ग्रहण के नियम।
सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में। निरयन राशियाँ, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश; राहु स्पष्ट (true) पात, केतु ठीक सामने। हमारे अपने खगोलीय इंजन से गणना — स्विस एफ़ेमेरिस से मिलान पर राशि प्रवेश का अंतर 2 मिनट से कम (राहु-केतु 15 मिनट से कम)। ग्रहण हमारे इंजन के सूर्य और चंद्रमा से गिने जाते हैं; नगरों के समय स्विस एफ़ेमेरिस से मिलाए गए हैं (1–2 मिनट के भीतर; सूर्योदय/चंद्रोदय के समय कुछ मिनट)। नगर निर्देशांक: GeoNames।