पंचांग · नई दिल्ली
21 अक्टूबर 2025 का पंचांग, मंगलवार
21 अक्टूबर 2025, मंगलवार को नई दिल्ली में सूर्योदय 06:25 और सूर्यास्त 17:45 पर है। सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि है (17:55 तक) और चित्रा नक्षत्र (22:58 तक)। राहु काल 14:55 से 16:20 तक रहेगा, और अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:28 तक।
पिछले दिन से क्या बदला
- पिछले दिन सूर्योदय पर कृष्ण चतुर्दशी, आज अमावस्या।
- पिछले दिन सूर्योदय पर हस्त, आज चित्रा।
- अगले दिन (22 अक्टूबर 2025) सूर्योदय पर शुक्ल प्रतिपदा।
इस दिन के व्रत और पर्व
- कार्तिक अमावस्या — सूर्योदय के समय अमावस्या वाला दिन (नहीं तो जिस दिन आरंभ हो)। दर्श अमावस्या — व्रत और श्राद्ध का दिन — वह पहला दिन जब अमावस्या मध्याह्न को छुए।
पंचांग के पाँच अंग
नई दिल्ली के सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक जो भी तिथि, नक्षत्र, योग और करण रहे, सब अपने समाप्ति समय के साथ।
वार
मंगलवार
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
तिथि
अमावस्या
17:55 तक
शुक्ल प्रतिपदा
17:55 से 22 अक्टूबर, 20:17 तक
नक्षत्र
चित्रास्वामी मंगल
22:58 तक
स्वातिस्वामी राहु
22:58 से 23 अक्टूबर, 01:51 तक
योग
विष्कुम्भ
22 अक्टूबर, 03:16 तक
प्रीति
22 अक्टूबर, 03:16 से 23 अक्टूबर, 04:05 तक
करण
नाग
17:55 तक
किंस्तुघ्न
17:55 से 22 अक्टूबर, 07:04 तक
चंद्र राशि
- कन्या09:36 तक
- तुला23 अक्टूबर, 22:05 तक
सूर्य राशि: तुला
टालने योग्य समय
- राहु काल14:55 – 16:20
- यमगंड09:15 – 10:40
- गुलिक काल12:05 – 13:30
- दुर्मुहूर्त 108:41 – 09:26
- दुर्मुहूर्त 222:49 – 23:40
शुभ समय
- अभिजित मुहूर्त11:42 – 12:28
- पक्ष
- कृष्ण
- माह (अमांत / पूर्णिमांत)
- आश्विन / कार्तिक
- संवत
- विक्रम 2082 · शक 1947
- ऋतु · अयन
- शरद · दक्षिणायन
- दिनमान
- 11 घं 20 मि
- अयनांश
- लाहिड़ी (चित्रपक्ष) 24°13′06″
चौघड़िया
दिन और रात, प्रत्येक आठ भागों में; अमृत, शुभ, लाभ शुभ; चर सामान्य; रोग, काल, उद्वेग त्याज्य।
दिन का चौघड़िया
- रोगत्याज्य06:25 – 07:50
- उद्वेगत्याज्य07:50 – 09:15
- चरसामान्य09:15 – 10:40
- लाभअनुकूल10:40 – 12:05
- अमृतअनुकूल12:05 – 13:30
- कालत्याज्य13:30 – 14:55
- शुभअनुकूल14:55 – 16:20
- रोगत्याज्य16:20 – 17:45
रात का चौघड़िया
- कालत्याज्य17:45 – 19:20
- लाभअनुकूल19:20 – 20:55
- उद्वेगत्याज्य20:55 – 22:30
- शुभअनुकूल22:30 – 00:05
- अमृतअनुकूल00:05 – 01:40
- चरसामान्य01:40 – 03:16
- रोगत्याज्य03:16 – 04:51
- कालत्याज्य04:51 – 06:26
होरा
हर होरा का स्वामी ग्रह और आरंभ समय।
दिन की होरा
- मंगल06:25
- सूर्य07:22
- शुक्र08:18
- बुध09:15
- चंद्र10:12
- शनि11:08
- गुरु12:05
- मंगल13:02
- सूर्य13:58
- शुक्र14:55
- बुध15:52
- चंद्र16:48
रात की होरा
- शनि17:45
- गुरु18:48
- मंगल19:52
- सूर्य20:55
- शुक्र21:59
- बुध23:02
- चंद्र00:05
- शनि01:09
- गुरु02:12
- मंगल03:16
- सूर्य04:19
- शुक्र05:22
21 अक्टूबर 2025, नई दिल्ली (28.62, 77.21), समय क्षेत्र Asia/Kolkata। सूर्योदय: ऊपरी किनारा, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। अमृत काल और वर्ज्य नहीं दिए गए — उनकी घटी-तालिकाएँ स्रोतों में भिन्न हैं।
21 अक्टूबर 2025: प्रश्न
21 अक्टूबर 2025 को कौन सी तिथि है?
21 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि (कृष्ण पक्ष) है, 17:55 तक; फिर शुक्ल प्रतिपदा। माह आश्विन (अमांत) / कार्तिक (पूर्णिमांत)।
21 अक्टूबर 2025 को कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय के समय चित्रा नक्षत्र, 22:58 तक; फिर स्वाति।
21 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में राहु काल कब है?
14:55 से 16:20 तक। यमगंड 09:15–10:40 और गुलिक 12:05–13:30।
21 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय 06:25 और सूर्यास्त 17:45 पर — सूर्य का ऊपरी किनारा, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित; यही परिपाटी भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) और दृक पंचांग की है। जो पंचांग सूर्य के केंद्र का समय बिना अपवर्तन के छापते हैं, उनमें सूर्योदय लगभग 3–4 मिनट बाद और सूर्यास्त उतना ही पहले होता है।
21 अक्टूबर 2025 को कोई व्रत या पर्व है?
कार्तिक अमावस्या: सूर्योदय के समय अमावस्या वाला दिन (नहीं तो जिस दिन आरंभ हो)। दर्श अमावस्या — व्रत और श्राद्ध का दिन — वह पहला दिन जब अमावस्या मध्याह्न को छुए।
ये समय नई दिल्ली के हैं। इसी तारीख का पंचांग किसी और शहर के लिए: पंचांग खोज। शुभ कार्य का समय चाहिए? मुहूर्त खोजें.
पंचांग पढ़ना
- तिथि
- चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12° का अंतर एक तिथि है — एक चांद्र मास में 30 तिथियाँ, शुक्ल और कृष्ण पक्ष में 15-15। दिन की तिथि वह मानी जाती है जो सूर्योदय के समय चल रही हो; कभी एक तिथि सूर्योदय को छूती ही नहीं (क्षय) और कभी दो सूर्योदयों तक रहती है (वृद्धि)।
- नक्षत्र
- राशिचक्र के 27 बराबर भाग, हर एक 13°20′ का। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है। मुहूर्त और नामकरण में नक्षत्र सबसे अधिक देखा जाता है।
- योग
- सूर्य और चंद्रमा के निरयण अंशों का योग, 13°20′ के 27 भागों में। विष्कुंभ से वैधृति तक; व्यतीपात और वैधृति को शुभ कार्यों में टाला जाता है।
- करण
- तिथि का आधा भाग — एक दिन में प्रायः दो करण। विष्टि (भद्रा) करण में शुभ कार्य नहीं किए जाते।
- वार
- हिंदू वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से नहीं।
- राहु काल, यमगंड, गुलिक
- दिन के प्रकाश को आठ भागों में बाँटकर, वार के अनुसार एक-एक भाग। नया कार्य आरंभ करने के लिए इन्हें परंपरा में टाला जाता है; रोज़मर्रा का काम चलता रहता है।
- चौघड़िया और होरा
- चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है; होरा हर घंटे (दिन के बारहवें भाग) का स्वामी ग्रह बताती है। व्यापार और यात्रा के लिए इनका उपयोग आम है।
सारी गणना हमारा अपना इंजन करता है (VSOP87 / ELP, लाहिड़ी अयनांश), स्विस एफ़ेमेरिस से मिलाकर जाँचा गया; तिथि-नक्षत्र के समाप्ति समय लगभग 2 मिनट तक सटीक।