सपने में किसी जीवित अपने को मरा देखना सबसे ज़्यादा घबरा देने वाले सपनों में से है, पर लोक-परंपरा इसे अक्सर उस व्यक्ति की लंबी उम्र और उसकी किसी परेशानी के ख़त्म होने से जोड़ती है। यह मान्यता है, भविष्यवाणी नहीं; आपके सपने से किसी की आयु या सेहत नहीं बदलती।
परंपरा क्या मानती है
गाँव-घरों में जब कोई सुबह घबराकर कहता है "मैंने सपने में अम्मा को मरा देखा", तो बड़े अक्सर यही कहते हैं, "अब उनकी उम्र और लंबी हो गई।" स्वप्न-परंपरा का यह पुराना विचार है कि मृत्यु के सपने का फल उलटा होता है। कई लोक-सूचियाँ इसे उस व्यक्ति के किसी संकट के टलने, या उससे आपके रिश्ते में किसी पुरानी खटास के ख़त्म होने से भी जोड़ती हैं।
पुराणों के स्वप्न-अध्याय सपनों को मोटे तौर पर शुभ-अशुभ में बाँटते हैं; किसके बारे में क्या दिखा, इसके अर्थ बाद की लोक-सूचियों से आए हैं, जो आपस में पूरी तरह नहीं मिलतीं। किसी सपने को किसी के बारे में चेतावनी मानने का कोई आधार नहीं है।
किसे देखा
| सपने में किसे मरा देखा | लोक-मान्यता में अर्थ |
|---|---|
| माँ या पिता | उनकी लंबी उम्र; उनके प्रति आपका लगाव |
| पति या पत्नी | रिश्ते में किसी दूरी का ख़त्म होना |
| भाई-बहन | किसी पुराने मनमुटाव का अंत |
| दोस्त | दोस्ती का नया दौर, या उससे दूरी की चिंता |
| बच्चा | बच्चे के बड़े होने के साथ आने वाला बदलाव; डर की बात नहीं |
| कोई जिससे झगड़ा चल रहा हो | उस झगड़े का ख़त्म होना |
मनोविज्ञान की नज़र से
यह सपना इसलिए आता है क्योंकि वह व्यक्ति आपके लिए मायने रखता है। स्वप्न-विज्ञान कहता है कि सपने हमारी जागती चिंताओं को ही आगे ले जाते हैं। किसी के बीमार होने, बूढ़े होने, दूर चले जाने या उससे झगड़ा होने पर "कहीं मैं उसे खो न दूँ" का डर सपने में मृत्यु का रूप ले लेता है। जिनके घर में हाल में किसी का निधन हुआ हो, उन्हें यह सपना और ज़्यादा आता है।
मन को शांत करने के लिए
यह सपना आपकी परवाह का सबूत है, किसी अनहोनी का नहीं। चाहें तो उस व्यक्ति से बात कर लें या उसके साथ थोड़ा समय बिताएँ। कोई पूजा या उपाय ज़रूरी नहीं। अगर किसी अपने की बीमारी की चिंता रातों की नींद ले रही है, तो उस बोझ को अकेले न उठाएँ — परिवार, दोस्त या किसी परामर्शदाता से बात करें।
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