एकादशी · 2027
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2027 — गुरुवार, 12 अगस्त 2027
श्रावण पुत्रदा एकादशी गुरुवार, 12 अगस्त 2027 को है (नई दिल्ली)। पारण 13 अगस्त को 13:45 – 16:23 के बीच।
नई दिल्ली के लिए गणना
गुरुवार, 12 अगस्त 2027
- तिथि
- शुक्ल एकादशी: 12 अगस्त, 00:59 – 13 अगस्त, 03:00
- चांद्र मास
- श्रावण
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 05:48 / 19:03
- अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले)
- 04:12
- हरि वासर समाप्त
- 13 अगस्त, 09:35
| पारण (व्रत खोलने का समय) | 13 अगस्त, 13:45 – 13 अगस्त, 16:23 |
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नियम: स्मार्त नियम: सूर्योदय के समय एकादशी वाला दिन, अगली सुबह पारण के लिए द्वादशी रहे।
स्मार्त और वैष्णव
इस बार दोनों परंपराएँ एक ही दिन व्रत रखती हैं: अरुणोदय (04:12) तक एकादशी शुरू हो चुकी है, इसलिए दिन दशमी-विद्धा नहीं है।
वैष्णव दिन केवल अरुणोदय वाले सरल नियम से है; इस्कॉन अपना कैलेंडर अपने स्थान के लिए बनाता है, इसलिए अपने मंदिर से मिला लें।
पारण कैसे तय हुआ
व्रत अगले दिन द्वादशी में खोला जाता है — हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो 09:35 पर समाप्त होता है) के बाद, हो सके तो प्रातः काल में, और मध्याह्न से बचते हुए। द्वादशी रहते पारण न हो तो उसका पुण्य कम माना जाता है।
सभी समय हमारे अपने इंजन से, नई दिल्ली के सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय पर। दूसरे शहर में समय कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी दिन भी। अपने शहर का पंचांग
श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व
श्रावण पुत्रदा एकादशी श्रावण के शुक्ल पक्ष में आती है और विशेष रूप से संतान की कामना करने वाले दंपती और संतान के कल्याण के लिए माता-पिता रखते हैं; पुत्रदा का अर्थ है “संतान देने वाली”। वैष्णव मंदिरों में इसे पवित्रा एकादशी भी कहते हैं, जब भगवान को पवित्र धागा (पवित्रा) अर्पित किया जाता है।
अन्य नाम: पवित्रा एकादशी
व्रत कथा
माहिष्मती के राजा महीजित अच्छा राज करते थे, पर उनकी कोई संतान नहीं थी। मंत्री लोमश ऋषि के पास गए, जिन्होंने देखा कि पिछले जन्म में वैश्य रहते हुए राजा ने एक प्यासी गाय को तालाब से हटाकर पहले स्वयं पानी पिया था। ऋषि ने प्रजा से श्रावण पुत्रदा एकादशी रखकर उसका पुण्य राजा को देने को कहा। प्रजा ने ऐसा किया और समय आने पर राजा को पुत्र हुआ।
कथा का सार, पद्म पुराण और भविष्योत्तर पुराण के एकादशी माहात्म्य से।
एकादशी कैसे रखें
- व्रत एकादशी के सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक चलता है। बहुत से लोग दशमी की शाम, व्रत शुरू होने से पहले, एक बार सादा और सात्विक भोजन करते हैं।
- परंपरा में अन्न और दालें, खासकर चावल, नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, मेवे और फलाहार — साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू — आम तौर पर लिए जाते हैं; हर परिवार का रिवाज थोड़ा अलग होता है।
- व्रत के कई स्तर हैं: निर्जला (बिना पानी), फलाहार (फल और दूध), या बिना अन्न का एक समय भोजन। जो आपके शरीर के अनुकूल हो, वही चुनें; सबके लिए एक ही नियम ज़रूरी नहीं है।
- दिन भगवान विष्णु की पूजा में बीतता है: तुलसी, दीपक, विष्णु सहस्रनाम या ओम नमो भगवते वासुदेवाय जैसा मंत्र, और उस एकादशी की कथा। तुलसी के पत्ते प्रायः एक दिन पहले तोड़ लिए जाते हैं, क्योंकि बहुत से लोग एकादशी पर तुलसी नहीं तोड़ते।
- कुछ लोग रात में भजन-कीर्तन के साथ जागरण करते हैं, और बहुत से लोग अन्न या भोजन का दान करते हैं।
- पारण द्वादशी को सूची में दिए समय के भीतर होता है: हरि वासर के बाद, हो सके तो सुबह के समय, और द्वादशी समाप्त होने से पहले। व्रत प्रायः किसी हल्की चीज़ से, अक्सर थोड़ा तुलसी-जल लेकर खोला जाता है।
- गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, बुज़ुर्ग, मधुमेह के रोगी, नियमित दवा लेने वाले या अस्वस्थ लोग हल्का व्रत रख सकते हैं — फल और दूध, या एक समय भोजन — या केवल पूजा-पाठ से दिन मना सकते हैं। कोई बीमारी हो तो व्रत से पहले डॉक्टर से पूछ लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2027 कब है?
श्रावण पुत्रदा एकादशी गुरुवार, 12 अगस्त 2027 को है (नई दिल्ली)। शुक्ल एकादशी तिथि 12 अगस्त, 00:59 – 13 अगस्त, 03:00 तक रहती है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी का पारण कब है?
पारण शुक्रवार, 13 अगस्त 2027 को 13:45 – 16:23 के बीच, हरि वासर के बाद और द्वादशी रहते।
क्या वैष्णव श्रावण पुत्रदा एकादशी अलग दिन है?
नहीं। अरुणोदय के समय एकादशी शुरू हो चुकी है, इसलिए स्मार्त और वैष्णव दोनों 12 अगस्त 2027 को व्रत रखते हैं।