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नक्षत्र मिलान · Purva Phalguni

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र मिलान: सभी 27 से गुण

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र मिलान, हर जोड़ी के असली गुण: मघा के साथ सबसे ऊँचा अंक क्यों, राक्षस गण से शून्य, बिल्ली योनि का वैर और मध्य नाड़ी।

  • सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम
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मिलान में पूर्वा फाल्गुनी — एक नज़र में

स्वामी ग्रह
शुक्र
गण
मनुष्य
योनि
मूषक (स्त्री)
नाड़ी
मध्य (पित्त)
राशि (चरण)
सिंह (1, 2, 3, 4)
वर पूर्वा फाल्गुनी हो तो
5.5 से 34 तक; 25 या अधिक प्रायः 6 नक्षत्रों से
वधू पूर्वा फाल्गुनी हो तो
4.5 से 34 तक; 25 या अधिक प्रायः 5 नक्षत्रों से
एक ही नाड़ी
भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का 27 नक्षत्रों से मिलान (36 में से)
दूसरा नक्षत्रतारा (3)योनि (4)गण (6) वर/वधूनाड़ी (8)राशि वाले 4 कूट (15)वर पूर्वा फाल्गुनीवधू पूर्वा फाल्गुनी
अश्विनी3अति मित्र / संपत्25 / 686.524.525.5
भरणी3जन्म / जन्म260एक नाड़ी6.517.517.5
कृत्तिका3संपत् / अति मित्र1086.5–8.5 / 6.5–7.518.5–20.5प्रायः 20.518.5–19.5प्रायः 19.5
रोहिणी1.5विपत् / मित्र1688.5 / 7.52524
मृगशिरा1.5क्षेम / वध15 / 60एक नाड़ी8.5–12 / 7.5–1116–19.5प्रायः 19.516–19.5प्रायः 19.5
आर्द्रा1.5प्रत्यरि / साधक16812 / 1128.527.5
पुनर्वसु1.5साधक / प्रत्यरि05 / 686–12 / 7–1120.5–26.5प्रायः 26.522.5–26.5प्रायः 26.5
पुष्य1.5वध / क्षेम15 / 60एक नाड़ी6 / 713.515.5
आश्लेषा1.5मित्र / विपत्0086 / 715.516.5
मघा3अति मित्र / संपत्408153030
पूर्वा फाल्गुनी3जन्म / जन्म460एक नाड़ी152828
उत्तरा फाल्गुनी3संपत् / अति मित्र2685–15 / 4–1524–34प्रायः 2423–34प्रायः 23
हस्त1.5विपत् / मित्र25 / 685 / 421.521.5
चित्रा1.5क्षेम / वध200एक नाड़ी5–8 / 4–78.5–11.5प्रायः 11.57.5–10.5प्रायः 10.5
स्वाति1.5प्रत्यरि / साधक25 / 688 / 724.524.5
विशाखा1.5साधक / प्रत्यरि2088–12 / 7–1319.5–23.5प्रायः 19.518.5–24.5प्रायः 18.5
अनुराधा1.5वध / क्षेम25 / 60एक नाड़ी12 / 1320.522.5
ज्येष्ठा1.5मित्र / विपत्20812 / 1323.524.5
मूल3अति मित्र / संपत्10861818
पूर्वाषाढ़ा3जन्म / जन्म260एक नाड़ी6–6.517–17.5प्रायः 17.517–17.5प्रायः 17.5
उत्तराषाढ़ा3संपत् / अति मित्र1681.5–6.5 / 0.5–6.519.5–24.5प्रायः 19.518.5–24.5प्रायः 18.5
श्रवण1.5विपत् / मित्र25 / 681.5–2 / 0.5–118–18.5प्रायः 18.518–18.5प्रायः 18.5
धनिष्ठा1.5क्षेम / वध200एक नाड़ी2–8 / 1–75.5–11.5प्रायः 11.54.5–10.5प्रायः 10.5
शतभिषा1.5प्रत्यरि / साधक2088 / 719.518.5
पूर्वा भाद्रपद1.5साधक / प्रत्यरि2686–8 / 723.5–25.5प्रायः 25.524.5
उत्तरा भाद्रपद1.5वध / क्षेम260एक नाड़ी6 / 715.516.5
रेवती1.5मित्र / विपत्25 / 686 / 722.524.5

तारा का नीचे का नाम: वधू का नक्षत्र वर से गिनकर / वर का वधू से गिनकर; तीसरी, पाँचवीं और सातवीं तारा प्रतिकूल मानी जाती है। गण और राशि वाले कूट वर-वधू के क्रम से बदल सकते हैं, इसलिए जहाँ अलग हैं वहाँ दोनों दिए हैं (पहला: पूर्वा फाल्गुनी वर)। जहाँ पूरा अंक एक सीमा है, वहाँ नक्षत्र का कोई चरण दूसरी राशि में पड़ता है; "प्रायः" वाला अंक दोनों नक्षत्रों के अधिकतर भाग का है।

नाड़ी: पूर्वा फाल्गुनी के साथ एक ही नाड़ी वाले नक्षत्र

पूर्वा फाल्गुनी मध्य (पित्त) नाड़ी का नक्षत्र है। इसी नाड़ी के किसी नक्षत्र से मिलान में नाड़ी कूट 8 में से 0 देता है — इसे नाड़ी दोष कहा जाता है। ग्रंथ इसके अपवाद भी बताते हैं, और ज्योतिषी इस पर एकमत नहीं कि अपवाद दोष को कितना हल्का करता है। नीचे हर जोड़ी के साथ वे अपवाद हैं जो दोनों चंद्रमाओं की किसी स्थिति में लागू हो सकते हैं; असली कुंडलियों में कौन सा लागू है, यह कुंडली मिलान बताता है।

  • भरणी — दोनों नक्षत्र कभी एक राशि में नहीं पड़ते, इसलिए ये तीनों अपवाद यहाँ लागू नहीं होते
  • मृगशिरा — दोनों नक्षत्र कभी एक राशि में नहीं पड़ते, इसलिए ये तीनों अपवाद यहाँ लागू नहीं होते
  • पुष्य — दोनों नक्षत्र कभी एक राशि में नहीं पड़ते, इसलिए ये तीनों अपवाद यहाँ लागू नहीं होते
  • पूर्वा फाल्गुनी — संभव अपवाद: एक नक्षत्र, भिन्न चरण
  • चित्रा — दोनों नक्षत्र कभी एक राशि में नहीं पड़ते, इसलिए ये तीनों अपवाद यहाँ लागू नहीं होते
  • अनुराधा — दोनों नक्षत्र कभी एक राशि में नहीं पड़ते, इसलिए ये तीनों अपवाद यहाँ लागू नहीं होते
  • पूर्वाषाढ़ा — दोनों नक्षत्र कभी एक राशि में नहीं पड़ते, इसलिए ये तीनों अपवाद यहाँ लागू नहीं होते
  • धनिष्ठा — दोनों नक्षत्र कभी एक राशि में नहीं पड़ते, इसलिए ये तीनों अपवाद यहाँ लागू नहीं होते
  • उत्तरा भाद्रपद — दोनों नक्षत्र कभी एक राशि में नहीं पड़ते, इसलिए ये तीनों अपवाद यहाँ लागू नहीं होते

विस्तार से: नाड़ी दोष — अर्थ और अपवाद.

पूर्वा फाल्गुनी में जन्मे व्यक्ति का गुण मिलान मनुष्य गण, मादा मूषक योनि, मध्य नाड़ी और पूरी तरह सिंह राशि में बैठे चंद्रमा पर चलता है। ऊपर की तालिका में वर के रूप में इसके कुल अंक 5.5 से 34 तक और वधू के रूप में 4.5 से 34 तक जाते हैं, हालाँकि दोनों ओर सबसे ऊँचा सामान्य अंक 30 ही है।

34 और 30 का यह अंतर तालिका को समझने का एक सूत्र है: कुछ साथी नक्षत्र दो राशियों में फैले हैं, और उनके छोटे-से हिस्से में अंक बाक़ी हिस्से से ऊपर चले जाते हैं। पहले सामान्य अंक पढ़ें, सीमा बाद में।

पूर्वा फाल्गुनी की चार तय बातें

पूर्वा फाल्गुनी का स्वामी शुक्र है, देवता भग (सौभाग्य और आनंद के देव) और प्रतीक पलंग के आगे के दो पाए। मिलान में इसका अर्थ है:

  1. मनुष्य गण, जिससे 6 अंकों का गण कूट तय होता है।
  2. मूषक योनि (मादा), जिसका जोड़ मघा का नर मूषक है; इससे 4 अंकों का योनि कूट तय होता है।
  3. मध्य नाड़ी, जिससे 8 अंकों का नाड़ी कूट तय होता है।
  4. चारों चरण सिंह में, जिससे वर्ण, वश्य, ग्रह मैत्री और भकूट राशि और उसके स्वामी सूर्य से तय होते हैं।

बचे 3 अंक तारा के हैं, जो दोनों नक्षत्रों के बीच गिनती से आते हैं।

अंक क्या कहते हैं

वर पूर्वा फाल्गुनी हो तो सामान्य अंकों में 7 जोड़ियाँ 18 से नीचे, 14 जोड़ियाँ 18 से 24.5 के बीच, 6 जोड़ियाँ 25 से 32 के बीच और कोई 32 से ऊपर नहीं। वधू के रूप में यह 7, 15, 5 और 0 है। यानी इंजन के वर्गों के हिसाब से इस नक्षत्र की ज़्यादातर जोड़ियाँ औसत हैं, और ऊपर एक छोटा समूह है।

उस समूह में सबसे आगे मघा 30 पर है, फिर आर्द्रा (वर में 28.5, वधू में 27.5), फिर पूर्वा फाल्गुनी स्वयं 28 पर। पुनर्वसु दोनों भूमिकाओं में सामान्य 26.5 तक पहुँचता है, पर सीमा के साथ (वर में 20.5–26.5, वधू में 22.5–26.5), क्योंकि पुनर्वसु का अंतिम चरण कर्क में जाता है और राशियों का संबंध बदल देता है। वर के रूप में पूर्वा भाद्रपद भी 25.5 (सीमा 23.5–25.5) पर ऊपर दिखता है; वधू के रूप में यह जगह अश्विनी की है, 25.5 पर।

पूर्वा फाल्गुनी वर के साथ सबसे कम सामान्य अंक चित्रा और धनिष्ठा के हैं, दोनों 11.5, और फिर पुष्य 13.5।

गण: राक्षस नक्षत्र नीचे क्यों

पूर्वा फाल्गुनी मनुष्य गण है। दूसरे मनुष्य नक्षत्र के साथ गण पूरे 6 देता है। देव नक्षत्र के साथ पूर्वा फाल्गुनी वर हो तो 5 और वधू हो तो 6 — यह उन छोटी जगहों में से है जहाँ तालिका दोनों ओर एक जैसी नहीं है। किसी भी राक्षस नक्षत्र के साथ दोनों भूमिकाओं में 0 मिलता है। ये नौ हैं: कृत्तिका, आश्लेषा, मघा, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, धनिष्ठा और शतभिषा।

मघा इसी सूची में है, फिर भी वह पूर्वा फाल्गुनी की सबसे अच्छी जोड़ी है। दोनों की योनि मूषक है, चंद्रमा सिंह में है और नाड़ियाँ अलग हैं; ये मिलकर गण के खोए 6 अंकों से ज़्यादा दे देते हैं। यह याद दिलाता है कि कोई एक कूट विवाह तय नहीं करता।

योनि और तारा

मूषक का शत्रु मार्जार है, जिसके नक्षत्र पुनर्वसु और आश्लेषा हैं; दोनों के साथ योनि 4 में से 0 देती है। पूर्वा फाल्गुनी से तारा गिनें तो विपत रोहिणी, हस्त और श्रवण पर पड़ता है; प्रत्यरि आर्द्रा, स्वाति और शतभिषा पर; वध पुष्य, अनुराधा और उत्तरा भाद्रपद पर। हर दिशा के 1.5 अंक हैं। कुछ परंपराएँ केवल वधू के नक्षत्र से गिनती हैं, और दक्षिण भारत की पोरुथम पद्धतियाँ इस पूरे हिस्से को अपने ढंग से देखती हैं।

मध्य नाड़ी और उसके अपवाद

मध्य नाड़ी में भरणी, मृगशिरा, पुष्य, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा और उत्तरा भाद्रपद भी हैं। इनमें से किसी के साथ नाड़ी 0 होती है, जिसे ग्रंथ नाड़ी दोष कहते हैं। शास्त्र अपवाद बताते हैं, पर हमारा इंजन जिन तीन की जाँच करता है, उनमें से कोई इन आठ जोड़ियों पर नहीं बैठता: नक्षत्र अलग हैं और इनमें से कोई सिंह राशि में नहीं है।

दो पूर्वा फाल्गुनी चंद्रमा इसका अपवाद हैं। चरण अलग हों तो एक-नक्षत्र वाला नियम लागू हो सकता है। हमारा इंजन इसका संकेत दिखाता है पर अंक 0 ही रखता है, क्योंकि इससे कितनी राहत मिलती है, इस पर मत बँटे हुए हैं। कुछ क्षेत्रीय रीतियाँ भी कुछ नक्षत्रों के लिए नाड़ी को अलग ढंग से देखती हैं।

कुल अंक से आगे

शुक्र के नक्षत्र को अक्सर स्नेही और मिलनसार माना जाता है, और एक आदर्श अंक खोजने का मन होता है। पर गुण मिलान केवल एक कसौटी है। सावधान कुंडली मिलान में मांगलिक स्थिति, सातवाँ भाव, नवांश और दोनों की चल रही दशा भी जुड़ती है। बाक़ी जोड़ियाँ नक्षत्र मिलान पन्ने पर हैं, और आठ कूट मिलकर 36 कैसे बनते हैं, यह हमारे गुण मिलान लेख में है।

अपना असली मिलान — निःशुल्क कुंडली मिलान

नक्षत्र से अंक का अनुमान मिलता है; दोनों के जन्म विवरण से ठीक चरण, राशि, नाड़ी-भकूट के अपवाद और मांगलिक विचार मिलते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वा फाल्गुनी के लिए कौन-सा नक्षत्र सबसे अच्छा है?

मघा के साथ पूर्वा फाल्गुनी का सामान्य अंक सबसे ऊँचा है, दोनों भूमिकाओं में 36 में से 30। उसके बाद आर्द्रा (वर पूर्वा फाल्गुनी हो तो 28.5, वधू हो तो 27.5) और फिर पूर्वा फाल्गुनी-पूर्वा फाल्गुनी 28। ऊँचा अंक बताता है कि जोड़ी एक पारंपरिक कसौटी पर अच्छी तरह खरी उतरती है; इससे प्रेम, भरोसा या दो परिवारों का मेल नहीं मापा जाता।

क्या पूर्वा फाल्गुनी और चित्रा में नाड़ी दोष है?

हाँ। दोनों मध्य नाड़ी के हैं, इसलिए नाड़ी 8 में से 0 है। चित्रा राक्षस गण भी है, जिससे गण भी 0 होता है, और पूर्वा फाल्गुनी वर के साथ यह सबसे कम जोड़ियों में है, सामान्य 11.5। हमारा इंजन जिन तीन अपवादों को जाँचता है, उनमें से कोई यहाँ लागू नहीं होता।

क्या दो पूर्वा फाल्गुनी वालों का विवाह हो सकता है?

इस जोड़ी के 36 में से 28 अंक हैं। नाड़ी एक है, इसलिए नाड़ी 0 है, पर दोनों के चंद्रमा अलग चरणों में हों तो एक मान्य अपवाद लागू हो सकता है। इसे कितना वज़न दिया जाए, इस पर ज्योतिषियों की राय बँटी हुई है।

स्रोत

  • मुहूर्त चिंतामणि

यह पृष्ठ सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम ने परंपरा के आधार पर लिखा है; हर अंक और तालिका कोड से गणना हुई है, AI से नहीं। जहाँ परंपराएँ भिन्न हैं, वहाँ हमने यह स्पष्ट कहा है। यह विचार के लिए मार्गदर्शन है — भविष्यवाणी या चिकित्सकीय, विधिक, वित्तीय सलाह नहीं। हमारी पद्धति