हथेली के पर्वत उँगलियों के नीचे और हथेली के किनारों पर उभरे हुए गद्दे हैं, जिन्हें हस्त रेखा परंपरा ग्रहों के नाम देती है — गुरु, शनि, सूर्य, बुध, मंगल, शुक्र और चंद्र — और इनमें स्वभाव के अलग-अलग रंग पढ़ती है। यह परंपरा की पढ़त है, भविष्यवाणी नहीं: कोई पर्वत आपकी क़िस्मत तय नहीं करता, और इनका कुंडली के ग्रहों से सीधा हिसाब नहीं जुड़ता।
पर्वत कहाँ-कहाँ हैं
ऊपर के चित्र में हर पर्वत एक गोले से दिखाया गया है। अपने हाथ पर इन्हें देखने के लिए हथेली को हल्का-सा कप जैसा मोड़िए; गद्दे उभर आएँगे।
- गुरु पर्वत: तर्जनी (पहली उँगली) के नीचे।
- शनि पर्वत: मध्यमा (बीच की उँगली) के नीचे।
- सूर्य पर्वत: अनामिका के नीचे।
- बुध पर्वत: छोटी उँगली के नीचे।
- ऊपरी मंगल: हथेली के बाहरी किनारे पर, बुध पर्वत के नीचे, हृदय और मस्तिष्क रेखा के बीच।
- निचला मंगल: अंगूठे और तर्जनी के बीच, जीवन रेखा की शुरुआत के अंदर, शुक्र पर्वत के ऊपर।
- मंगल का मैदान: हथेली के बीच का गहरा हिस्सा, जो दोनों मंगल पर्वतों के बीच है।
- शुक्र पर्वत: अंगूठे की जड़ का मांसल भाग, जिसे जीवन रेखा घेरती है।
- चंद्र पर्वत: हथेली का निचला बाहरी हिस्सा, छोटी उँगली की सीध में कलाई के ऊपर।
कुछ हिंदी किताबें हथेली के बीच को राहु और कलाई के पास के हिस्से को केतु से भी जोड़ती हैं, पर इनकी जगह को लेकर किताबें आपस में मेल नहीं खातीं, इसलिए ज़्यादातर पढ़ने वाले ऊपर के नौ हिस्सों से ही काम चलाते हैं।
परंपरा हर पर्वत में क्या पढ़ती है
हर पर्वत के तीन रूप देखे जाते हैं: संतुलित उभार, दबा या सपाट, और बहुत ज़्यादा उभरा। परंपरा में संतुलन सबसे अच्छा माना गया है — किसी गुण का न होना और उसकी अति, दोनों को ध्यान देने की बात माना जाता है।
| पर्वत | संतुलित उभार | दबा या सपाट | बहुत ज़्यादा उभरा |
|---|---|---|---|
| गुरु | नेतृत्व, आत्म-विश्वास, सिखाने-समझाने की रुचि | झिझक, आगे आने से बचना | घमंड, दूसरों पर हावी होना |
| शनि | धीरज, अनुशासन, गंभीर सोच | हल्का-फुल्का, कम गंभीर स्वभाव | अकेलापन पसंद, ज़रूरत से ज़्यादा चिंता |
| सूर्य | कला, सौंदर्य-बोध, पहचान | दिखावे से दूर, चुपचाप काम | प्रशंसा की भूख |
| बुध | बोलचाल, व्यापार-बुद्धि, हाज़िरजवाबी | बात कहने में संकोच | चालाकी की ओर झुकाव |
| ऊपरी मंगल | धीरज से टिके रहना, दबाव में शांत | जल्दी हार मान लेना | ज़िद |
| निचला मंगल | साहस, पहल करने का दम | टकराव से बचना | जल्दी ग़ुस्सा |
| मंगल का मैदान | समतल हो तो संतुलित मन | बहुत गहरा हो तो आत्म-विश्वास की कमी | उभरा हो तो बेचैनी |
| शुक्र | स्नेह, गर्मजोशी, जीवन का रस, संगीत-कला | ठंडा, संकोची स्वभाव | भोग-विलास की ओर झुकाव |
| चंद्र | कल्पना, अंतर्ज्ञान, यात्रा की चाह | व्यावहारिक, कम कल्पनाशील | दिवास्वप्न, मन का भटकना |
पर्वत का खिसकना
पढ़ने वाले यह भी देखते हैं कि पर्वत का सबसे ऊँचा हिस्सा ठीक उँगली के नीचे है या बगल वाली उँगली की ओर सरका हुआ है। जैसे गुरु पर्वत शनि की ओर झुका हो तो नेतृत्व में गंभीरता जुड़ती है, और सूर्य पर्वत बुध की ओर झुका हो तो कला में कारोबारी समझ। यह बारीक पढ़त है और अनुभवी पढ़ने वालों में भी इस पर राय अलग-अलग है।
पर्वत और रेखाएँ साथ
पर्वत अकेले नहीं पढ़े जाते। जीवन रेखा शुक्र को घेरती है, मस्तिष्क रेखा चंद्र की ओर झुकती है, भाग्य रेखा शनि की ओर चढ़ती है, सूर्य रेखा सूर्य पर्वत पर रुकती है। किसी पर्वत पर कोई साफ़ चिह्न — जैसे तारा या वर्ग — हो, तो उसे भी साथ में देखा जाता है।
पर्वत क्या नहीं बता सकते
- कुंडली का ग्रह-दोष: दबा शनि या मंगल पर्वत "शनि दोष" या "मांगलिक" होने का सबूत नहीं। वह कुंडली की अलग गणना है।
- सेहत: पर्वतों का उभार मांसपेशियों, उम्र, वज़न और हाथ से किए काम पर निर्भर है। कोई पर्वत बीमारी नहीं बताता।
- अमीरी या नाकामी: पर्वत स्वभाव का रंग दिखाते हैं, नतीजा नहीं।
- हमेशा के लिए कुछ: हाथ से मेहनत करने वालों के पर्वत समय के साथ बदलते हैं; इसलिए इन्हें पक्की छाप मानना ठीक नहीं।
भारतीय और पश्चिमी पढ़त
पर्वतों के ग्रह-नाम भारतीय और पश्चिमी दोनों परंपराओं में लगभग एक जैसे हैं — पश्चिम में ग्रीक-रोमन देवताओं के नाम (जुपिटर, सैटर्न, अपोलो, मर्करी, वीनस, मार्स, ल्यूना), भारत में नवग्रहों के। कीरो ने मंगल को दो पर्वतों में बाँटा और बीच के मैदान को अलग रखा; कई हिंदी किताबों ने यही ढाँचा अपना लिया। भारतीय पढ़त में इनके साथ अंगूठे और उँगलियों की लंबाई पर ज़्यादा ज़ोर है।
अपने पर्वत कैसे देखें
- कौन-सा हाथ: आम शिक्षा में काम वाला हाथ आज के कर्म को और दूसरा जन्म के स्वभाव को दिखाता है। पर्वतों में फ़र्क़ अक्सर काम वाले हाथ में ज़्यादा दिखता है, क्योंकि उसकी मांसपेशियाँ ज़्यादा चलती हैं।
- तुलना: एक पर्वत को दूसरे पर्वत से तौलिए, दूसरे व्यक्ति के हाथ से नहीं।
- रोशनी: बगल से आती रोशनी में उभार की छाया साफ़ दिखती है।
- छूकर: अंगूठे से हल्का दबाएँ — भरा और लचीला गद्दा "उभरा" माना जाता है, सपाट और सख़्त "दबा"।
आगे पढ़ें
पर्वतों पर दिखने वाले चिह्नों के लिए हथेली के चिह्न पढ़ें, और सूर्य रेखा व जीवन रेखा देखें। पूरी सूची हस्त रेखा ज्ञान में है। हाथ का आकार, पर्वत और रेखाएँ साथ में समझनी हों तो हस्त रेखा का लंबा लेख पढ़ें, या फ़ोटो से अपना पाठ चाहें तो ऑनलाइन हस्त रेखा पाठ है।