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ग्रह · Moon

चंद्र ग्रह ज्योतिष में: मन, माता और जन्म राशि

चंद्र ग्रह ज्योतिष में मन और माता का कारक है और आपकी राशि व नक्षत्र यही तय करता है। वृषभ में उच्च, वृश्चिक में नीच, पक्ष बल, 10 वर्ष की दशा और गोचर पढ़िए।

  • सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम
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चंद्र — एक नज़र में

अन्य नाम
चंद्र, सोम, इंदु
प्रकृति
शुक्ल पक्ष में शुभ; अमावस्या के पास दुर्बल
लिंग
स्त्री
वार
सोमवार
नैसर्गिक मित्र
सूर्य, बुध
नैसर्गिक शत्रु
—
महादशा
10 वर्ष (विंशोत्तरी)
एक राशि में
लगभग सवा दो दिन
पूरा चक्र
लगभग 27⅓ दिन

कारकत्व: मन, माता, भावनाएँ, पोषण, जनता, जल

इस पृष्ठ पर

चंद्र, जिसे सोम और इंदु भी कहते हैं, वैदिक ज्योतिष में मन का ग्रह है: वह भावनाओं, माता, पोषण, जनता और जल का कारक है। चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है, वृषभ में 3 अंश पर उच्च और वृश्चिक में 3 अंश पर नीच होता है, और उसकी महादशा दस वर्ष की होती है।

सूर्य को कुंडली की आत्मा कहें तो चंद्रमा वह हिस्सा है जो जीवन को महसूस करता है। इसीलिए भारतीय ज्योतिष उस पर इतना टिका है। जब कोई पूछता है "आपकी राशि क्या है?", तो उसका मतलब होता है जन्म के समय चंद्रमा की राशि।

चंद्रमा इतना केंद्रीय क्यों है

ज्योतिष के तीन सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले औज़ार चंद्रमा से शुरू होते हैं।

  1. आपकी जन्म राशि चंद्रमा की राशि है। रोज़ और साल भर का राशिफल चंद्र राशि के लिए लिखा जाता है, सूर्य राशि के लिए नहीं।
  2. आपका जन्म नक्षत्र वह नक्षत्र है जिससे जन्म के समय चंद्रमा गुज़र रहा था। नाम का अक्षर, गुण मिलान के गण, योनि और नाड़ी, और स्वभाव की बारीक बनावट इसी से आती है।
  3. विंशोत्तरी दशा उसी नक्षत्र के स्वामी से शुरू होती है, और पहली दशा कितनी बची है यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था।

गोचर का फल भी चंद्रमा से देखा जाता है। साढ़े साती, यानी जन्म चंद्र के ऊपर से शनि का साढ़े सात वर्ष का गोचर, इसका सबसे जाना-पहचाना उदाहरण है। बहुत से ज्योतिषी चंद्र राशि को पहला भाव मानकर कुंडली दोबारा पढ़ते हैं, जिसे चंद्र लग्न कहते हैं, ताकि लग्न कुंडली की बात की पुष्टि हो सके।

चंद्रमा के कारकत्व

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र चंद्रमा को कालपुरुष का मन बताता है। उसके मुख्य कारकत्व यहीं से निकलते हैं।

  • भीतर का मौसम: मनोदशा, भावनाएँ, ग्रहणशीलता, स्मृति, और सुरक्षित महसूस कर पाने की क्षमता।
  • माता और पालन करने वाले लोग। चंद्रमा चतुर्थ भाव का नैसर्गिक कारक है, जो घर और मन के सुख का भी भाव है।
  • हर अर्थ में पोषण: भोजन, देखभाल, आराम, भावनात्मक सहारा।
  • जनता और लोकप्रियता। बलवान चंद्र लोगों के बीच सहजता देता है। ग्रहों के दरबार में सूर्य और चंद्र दोनों राजा हैं, एक आदेश से राज करता है, दूसरा अपनापन देकर।
  • जल, तरल पदार्थ, जल-यात्रा, और वह सब जो घटता-बढ़ता है।

कालपुरुष के प्रतीकात्मक विभाजन में चंद्रमा शरीर के द्रवों और बाईं आँख से जुड़ा है; यह शास्त्रीय प्रतीक है, स्वास्थ्य का आकलन नहीं। चंद्रमा का रंग सफ़ेद, धातु चाँदी, दिन सोमवार है; वह स्त्री ग्रह और सात्त्विक है।

पक्ष बल: हर महीने बदलता चंद्रमा

नौ ग्रहों में केवल चंद्रमा ऐसा है जिसका मूल स्वभाव महीने भर में बदलता है। शुक्ल पक्ष का चंद्रमा, खासकर जब वह सूर्य से काफ़ी दूर हो, नैसर्गिक शुभ है; अमावस्या के पास का चंद्रमा क्षीण माना जाता है और कई कामों के लिए पाप ग्रहों में गिना जाता है। इसे पक्ष बल कहते हैं। अपनी कुंडली में देखिए कि चंद्रमा सूर्य से कितनी राशि आगे है: बहुत आगे हो तो प्रकाशवान, सूर्य के ठीक पास हो तो मंद।

चंद्रमा कभी वक्री नहीं होता, और कुंडली में सबसे तेज़ चलता है। इसीलिए जन्म समय में एक-दो घंटे की भूल से भी वह दूसरे नक्षत्र चरण में जा सकता है।

उच्च, नीच और स्वराशि

स्थितिराशि
उच्चवृषभ, परम उच्च 3° पर
मूलत्रिकोणवृषभ 3° से 30°
स्वराशिकर्क
नीचवृश्चिक, परम नीच 3° पर

पुराण की कथा यहाँ खगोल से सुंदर मेल खाती है। सत्ताईस नक्षत्र दक्ष की पुत्रियाँ और चंद्रमा की पत्नियाँ हैं, और उनमें रोहिणी उसे सबसे प्रिय थी। रोहिणी वृषभ राशि में है, जहाँ चंद्रमा उच्च होता है। शुक्र की इस स्थिर, उपजाऊ राशि में मन शांत और संतुष्ट रहता है। जलीय कर्क में वह अपने घर में है, रक्षा और देखभाल करता हुआ।

वृश्चिक गहराई और तीव्रता की राशि है। यहाँ भावनाएँ प्रबल और निजी होती हैं। नीच चंद्रमा अक्सर ऐसे लोगों में दिखता है जिनमें सच्ची भावनात्मक गहराई है, और जो समय के साथ सीखते हैं कि भावनाओं को भीतर जमा करने के बजाय बहने कैसे दें। नीच भंग के नियम यहाँ भी किसी और ग्रह की तरह लागू होते हैं।

मित्र और सम ग्रह

चंद्रमा के नैसर्गिक मित्र सूर्य और बुध हैं। मंगल, गुरु, शुक्र और शनि उसके लिए सम हैं। सात ग्रहों में केवल चंद्रमा का कोई नैसर्गिक शत्रु नहीं, जो उसके ग्रहणशील स्वभाव के अनुकूल है। उल्टे, बुध चंद्रमा को शत्रु मानता है; इसके पीछे की कथा बुध के पृष्ठ पर है।

दृष्टि और दिग्बल

चंद्रमा केवल सातवीं पूर्ण दृष्टि रखता है। उसे दिग्बल चतुर्थ भाव में मिलता है, कुंडली के सबसे निचले बिंदु पर, जो घर और निजी मन का स्थान है। भावना के ग्रह के लिए यह बिल्कुल स्वाभाविक जगह है।

चंद्रमा की महादशा

चंद्र महादशा दस वर्ष की है, सूर्य के बाद और मंगल से पहले। जिनका चंद्रमा रोहिणी, हस्त या श्रवण नक्षत्र में है, वे चंद्र दशा में जन्म लेते हैं।

चंद्र की दशा ध्यान को घर, परिवार, माता, भावनात्मक ज़रूरतों और आसपास के लोगों की ओर मोड़ती है। घर बदलना, किसी की देखभाल करना, जनता से जुड़ा काम, या बस अपनी भावनाओं को बेहतर समझना, ये इस समय के आम विषय हैं। प्रकाशवान और अच्छी स्थिति का चंद्रमा इन वर्षों को सहज और मिलनसार बनाता है; क्षीण या दबाव में हो तो मन अधिक संवेदनशील रहता है और विश्राम व स्थिरता माँगता है। हर दशा की तरह, लग्न से चंद्रमा जिस भाव में बैठा है और जिसका स्वामी है, वही जीवन का क्षेत्र बताता है।

चंद्रमा का गोचर

चंद्रमा हर राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है और लगभग 27⅓ दिन में पूरा राशिचक्र घूम लेता है, यानी मोटे तौर पर रोज़ एक नक्षत्र। इसी गति के कारण वह रोज़ के पंचांग की धुरी है: तिथि, नक्षत्र और योग सब उसी पर टिके हैं। मुहूर्त चुनते समय जन्म चंद्र से गोचर चंद्र की स्थिति (चंद्र बल) और जन्म नक्षत्र से दिन के नक्षत्र की गिनती (तारा बल) देखी जाती है।

शास्त्र जन्म चंद्र से पहले, तीसरे, छठे, सातवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में चंद्र गोचर को शुभ मानते हैं।

जानने योग्य योग

जब गुरु चंद्रमा से केंद्र में (पहले, चौथे, सातवें या दसवें) हो तो गजकेसरी योग बनता है, जिसे बुद्धि और प्रतिष्ठा के लिए सराहा गया है।

भावों में चंद्रमा, संक्षेप में

  • प्रथम भाव: संवेदनशील, अभिव्यक्त, वातावरण से जल्दी प्रभावित।
  • चतुर्थ: दिग्बली; घर और माता से गहरा लगाव।
  • सप्तम: भावनात्मक ज़रूरतें साझेदारी से पूरी करने की चाह।
  • दशम: जनता के साथ या जनता के लिए काम।
  • द्वादश: समृद्ध भीतरी जीवन; एकांत की ज़रूरत।

ये केवल रूपरेखा है। चंद्रमा का फल उसकी कला, राशि, नक्षत्र और उसे छूने वाले ग्रहों से बनता है, और कोई एक बात पूरी कुंडली का फ़ैसला नहीं करती।

अपना चंद्रमा खोजिए

मुफ़्त कुंडली कुछ ही क्षणों में आपकी चंद्र राशि, नक्षत्र और चरण दिखा देती है। फिर राशियों में अपनी राशि का पृष्ठ पढ़िए, और चंद्रमा की तुलना उसके साथी राजा सूर्य से कीजिए। सभी नौ ग्रह ग्रह परिचय पृष्ठ पर हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में होता है वही आपकी जन्म राशि है, जिस नक्षत्र में होता है वही जन्म नक्षत्र, और उसी नक्षत्र के स्वामी से विंशोत्तरी दशा शुरू होती है। साढ़े साती जैसे गोचर भी जन्म चंद्र से ही गिने जाते हैं।

चंद्रमा किस राशि में उच्च और किसमें नीच है?

चंद्रमा वृषभ में 3 अंश पर परम उच्च और वृश्चिक में 3 अंश पर परम नीच होता है। कर्क उसकी स्वराशि है और वृषभ के 3 से 30 अंश उसका मूलत्रिकोण।

चंद्रमा शुभ ग्रह है या अशुभ?

शुक्ल पक्ष का, सूर्य से दूर और प्रकाशवान चंद्रमा शुभ माना जाता है; अमावस्या के पास का चंद्रमा दुर्बल। कला के अनुसार मिलने वाले इस बल को पक्ष बल कहते हैं।

चंद्र महादशा कितने साल की होती है?

दस वर्ष। विंशोत्तरी क्रम में यह सूर्य की छह वर्ष की दशा के बाद और मंगल की सात वर्ष की दशा से पहले आती है।

अपनी कुंडली में देखें

स्रोत

  • बृहत् पाराशर होरा शास्त्र
  • फलदीपिका
  • मुहूर्त चिंतामणि

यह पृष्ठ सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम ने शास्त्रीय ग्रंथों (मुख्यतः बृहत् पाराशर होरा शास्त्र) के आधार पर लिखा है। जहाँ परंपराएँ भिन्न हैं, वहाँ हमने यह स्पष्ट कहा है। ज्योतिष विचार के लिए मार्गदर्शन है — चिकित्सकीय, विधिक या वित्तीय सलाह नहीं। हमारी पद्धति