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कल का पंचांग · पंजाब

बठिंडा का कल का पंचांग — सोमवार, 19 अक्टूबर 2026

19 अक्टूबर 2026, सोमवार को बठिंडा में सूर्योदय 06:34 और सूर्यास्त 17:55 पर है। सूर्योदय के समय शुक्ल अष्टमी तिथि है (10:52 तक) और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र (15:38 तक)। राहु काल 07:59 से 09:24 तक रहेगा, और अभिजित मुहूर्त 11:52 से 12:37 तक।

सूर्योदय06:34
सूर्यास्त17:55
चंद्रोदय13:57
चंद्रास्तआज नहीं

कल का व्रत / पर्व

  • शारदीय नवरात्रि — शुक्ल प्रतिपदा जो दिन के पहले तिहाई भाग (घटस्थापना काल) को छुए, उस दिन आरंभ; महा नवमी पर पूर्ण; अगले दिन दशहरा।
  • दुर्गा पूजा — आश्विन शुक्ल षष्ठी से दशमी। षष्ठी (बोधन) और महा सप्तमी — हर एक वह दिन जब उसकी तिथि सूर्योदय के समय हो; दो सूर्योदयों पर हो तो बाद वाला दिन। महा अष्टमी दुर्गा अष्टमी का दिन (सूर्योदय वाली अष्टमी), महा नवमी वह दिन जब नवमी अपराह्न में हो, और विजया दशमी (विसर्जन, सिंदूर खेला) वह दिन जब दशमी सूर्योदय के समय हो। संधि पूजा अष्टमी के अंतिम 24 और नवमी के पहले 24 मिनट में।
  • दुर्गा अष्टमी — सूर्योदय के समय आश्विन शुक्ल अष्टमी; क्षय हो तो जिस दिन आरंभ हो।
  • महा नवमी — आश्विन शुक्ल नवमी जो अपराह्न में हो; दोनों दिन हो तो पहला दिन (अष्टमी-युक्त नवमी श्रेष्ठ)।

पंचांग के पाँच अंग

बठिंडा के सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक जो भी तिथि, नक्षत्र, योग और करण रहे, सब अपने समाप्ति समय के साथ।

वार

सोमवार

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

तिथि

  • शुक्ल अष्टमी

    10:52 तक

  • शुक्ल नवमी

    10:52 से 20 अक्टूबर, 12:50 तक

नक्षत्र

  • उत्तराषाढ़ास्वामी सूर्य

    15:38 तक

  • श्रवणस्वामी चंद्र

    15:38 से 20 अक्टूबर, 18:02 तक

योग

  • धृति

    20 अक्टूबर, 00:35 तक

  • शूल

    20 अक्टूबर, 00:35 से 21 अक्टूबर, 00:49 तक

करण

  • बव

    10:52 तक

  • बालव

    10:52 से 23:55 तक

  • कौलव

    23:55 से 20 अक्टूबर, 12:50 तक

चंद्र राशि

  • मकर21 अक्टूबर, 07:00 तक

सूर्य राशि: तुला

टालने योग्य समय

  • राहु काल07:59 – 09:24
  • यमगंड10:49 – 12:15
  • गुलिक काल13:40 – 15:05
  • दुर्मुहूर्त 112:37 – 13:23
  • दुर्मुहूर्त 214:53 – 15:39

शुभ समय

  • अभिजित मुहूर्त11:52 – 12:37
पक्ष
शुक्ल
माह (अमांत / पूर्णिमांत)
आश्विन / आश्विन
संवत
विक्रम 2083 · शक 1948
ऋतु · अयन
शरद · दक्षिणायन
दिनमान
11 घं 21 मि
अयनांश
लाहिड़ी (चित्रपक्ष) 24°14′01″

चौघड़िया

दिन और रात, प्रत्येक आठ भागों में; अमृत, शुभ, लाभ शुभ; चर सामान्य; रोग, काल, उद्वेग त्याज्य।

दिन का चौघड़िया

  • अमृतअनुकूल06:34 – 07:59
  • कालत्याज्य07:59 – 09:24
  • शुभअनुकूल09:24 – 10:49
  • रोगत्याज्य10:49 – 12:15
  • उद्वेगत्याज्य12:15 – 13:40
  • चरसामान्य13:40 – 15:05
  • लाभअनुकूल15:05 – 16:30
  • अमृतअनुकूल16:30 – 17:55

रात का चौघड़िया

  • चरसामान्य17:55 – 19:30
  • रोगत्याज्य19:30 – 21:05
  • कालत्याज्य21:05 – 22:40
  • लाभअनुकूल22:40 – 00:15
  • उद्वेगत्याज्य00:15 – 01:50
  • शुभअनुकूल01:50 – 03:25
  • अमृतअनुकूल03:25 – 05:00
  • चरसामान्य05:00 – 06:35

होरा

हर होरा का स्वामी ग्रह और आरंभ समय।

दिन की होरा

  • चंद्र06:34
  • शनि07:31
  • गुरु08:28
  • मंगल09:24
  • सूर्य10:21
  • शुक्र11:18
  • बुध12:15
  • चंद्र13:11
  • शनि14:08
  • गुरु15:05
  • मंगल16:01
  • सूर्य16:58

रात की होरा

  • शुक्र17:55
  • बुध18:58
  • चंद्र20:02
  • शनि21:05
  • गुरु22:08
  • मंगल23:12
  • सूर्य00:15
  • शुक्र01:18
  • बुध02:22
  • चंद्र03:25
  • शनि04:28
  • गुरु05:32

19 अक्टूबर 2026, बठिंडा (30.21, 74.94), समय क्षेत्र Asia/Kolkata। सूर्योदय: ऊपरी किनारा, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। अमृत काल और वर्ज्य नहीं दिए गए — उनकी घटी-तालिकाएँ स्रोतों में भिन्न हैं।

बठिंडा: कल के प्रश्न

कल कौन सी तिथि है?

19 अक्टूबर 2026 को बठिंडा में सूर्योदय के समय शुक्ल अष्टमी तिथि (शुक्ल पक्ष) है, 10:52 तक; फिर शुक्ल नवमी। माह आश्विन (अमांत) / आश्विन (पूर्णिमांत)।

कल कौन सा नक्षत्र है?

सूर्योदय के समय उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, 15:38 तक; फिर श्रवण।

कल बठिंडा में राहु काल कब है?

07:59 से 09:24 तक। यमगंड 10:49–12:15 और गुलिक 13:40–15:05।

कल बठिंडा में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय 06:34 और सूर्यास्त 17:55 पर — सूर्य का ऊपरी किनारा, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित; यही परिपाटी भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) और दृक पंचांग की है। जो पंचांग सूर्य के केंद्र का समय बिना अपवर्तन के छापते हैं, उनमें सूर्योदय लगभग 3–4 मिनट बाद और सूर्यास्त उतना ही पहले होता है।

कल कोई व्रत या पर्व है?

शारदीय नवरात्रि: शुक्ल प्रतिपदा जो दिन के पहले तिहाई भाग (घटस्थापना काल) को छुए, उस दिन आरंभ; महा नवमी पर पूर्ण; अगले दिन दशहरा। दुर्गा पूजा: आश्विन शुक्ल षष्ठी से दशमी। षष्ठी (बोधन) और महा सप्तमी — हर एक वह दिन जब उसकी तिथि सूर्योदय के समय हो; दो सूर्योदयों पर हो तो बाद वाला दिन। महा अष्टमी दुर्गा अष्टमी का दिन (सूर्योदय वाली अष्टमी), महा नवमी वह दिन जब नवमी अपराह्न में हो, और विजया दशमी (विसर्जन, सिंदूर खेला) वह दिन जब दशमी सूर्योदय के समय हो। संधि पूजा अष्टमी के अंतिम 24 और नवमी के पहले 24 मिनट में। दुर्गा अष्टमी: सूर्योदय के समय आश्विन शुक्ल अष्टमी; क्षय हो तो जिस दिन आरंभ हो। महा नवमी: आश्विन शुक्ल नवमी जो अपराह्न में हो; दोनों दिन हो तो पहला दिन (अष्टमी-युक्त नवमी श्रेष्ठ)।

बठिंडा के पास के शहरों का कल का पंचांग

यही दिन नई दिल्ली के लिए, पिछले-अगले दिन और पूरे महीने के साथ: 19 अक्टूबर 2026 का पंचांग.

बठिंडा के समय दूसरे शहरों से अलग क्यों हैं

बठिंडा 30.2° उत्तर अक्षांश और 74.9° पूर्व देशांतर पर है। भारतीय मानक समय 82.5° पूर्व की देशांतर रेखा से चलता है; बठिंडा उससे 7.6° पश्चिम है, इसलिए यहाँ का औसत सूर्य घड़ी से लगभग 30 मिनट पीछे चलता है। आज यहाँ मध्याह्न (सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक बीच) 12:15 पर है और दिन 11 घंटे 21 मिनट का है; सूर्योदय से गिने जाने वाले सारे समय — राहु काल, चौघड़िया, होरा — इसी के साथ खिसकते हैं।

नई दिल्ली की तुलना में आज बठिंडा में सूर्योदय 10 मिनट बाद और सूर्यास्त 8 मिनट बाद होता है; यहाँ दिन 2 मिनट छोटा है (11 घंटे 21 मिनट, नई दिल्ली में 11 घंटे 23 मिनट)। बठिंडा नई दिल्ली से 1.6° उत्तर है: भूमध्य रेखा के जितना पास, दिन साल भर 12 घंटे के उतना पास रहता है; जितना उत्तर, गर्मी और सर्दी के दिनों का अंतर उतना बड़ा।

पंचांग पढ़ना

ऊपर की तिथि, नक्षत्र, योग और करण इसी शहर के सूर्योदय पर देखे गए हैं, और वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। हर अंग का अर्थ, क्षय और वृद्धि तिथि, और राहु काल कैसे बनता है: पंचांग पढ़ने की पूरी जानकारी; शब्दों के अर्थ शब्दकोश में।