पंचांग · नई दिल्ली
17 नवंबर 2025 का पंचांग, सोमवार
17 नवंबर 2025, सोमवार को नई दिल्ली में सूर्योदय 06:45 और सूर्यास्त 17:26 पर है। सूर्योदय के समय कृष्ण त्रयोदशी तिथि है (18 नवंबर, 07:12 तक) और चित्रा नक्षत्र (18 नवंबर, 05:01 तक)। राहु काल 08:05 से 09:25 तक रहेगा, और अभिजित मुहूर्त 11:44 से 12:27 तक।
पिछले दिन से क्या बदला
- पिछले दिन सूर्योदय पर कृष्ण द्वादशी, आज कृष्ण त्रयोदशी।
- पिछले दिन सूर्योदय पर हस्त, आज चित्रा।
- अगले दिन (18 नवंबर 2025) सूर्योदय पर कृष्ण त्रयोदशी।
इस दिन के व्रत और पर्व
- सोम प्रदोष — त्रयोदशी जो प्रदोष काल (सूर्यास्त से रात्रि का पाँचवाँ भाग) में हो; दोनों दिन हो तो जिस दिन अधिक।
पंचांग के पाँच अंग
नई दिल्ली के सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक जो भी तिथि, नक्षत्र, योग और करण रहे, सब अपने समाप्ति समय के साथ।
वार
सोमवार
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी
18 नवंबर, 07:12 तक
नक्षत्र
चित्रास्वामी मंगल
18 नवंबर, 05:01 तक
स्वातिस्वामी राहु
18 नवंबर, 05:01 से 19 नवंबर, 07:59 तक
योग
प्रीति
07:22 तक
आयुष्मान
07:22 से 18 नवंबर, 08:09 तक
करण
गर
17:59 तक
वणिज
17:59 से 18 नवंबर, 07:12 तक
चंद्र राशि
- कन्या15:35 तक
- तुला20 नवंबर, 04:14 तक
सूर्य राशि: वृश्चिक
टालने योग्य समय
- राहु काल08:05 – 09:25
- यमगंड10:45 – 12:05
- गुलिक काल13:26 – 14:46
- दुर्मुहूर्त 112:27 – 13:10
- दुर्मुहूर्त 214:35 – 15:18
शुभ समय
- अभिजित मुहूर्त11:44 – 12:27
- पक्ष
- कृष्ण
- माह (अमांत / पूर्णिमांत)
- कार्तिक / मार्गशीर्ष
- संवत
- विक्रम 2082 · शक 1947
- ऋतु · अयन
- शरद · दक्षिणायन
- दिनमान
- 10 घं 41 मि
- अयनांश
- लाहिड़ी (चित्रपक्ष) 24°13′10″
चौघड़िया
दिन और रात, प्रत्येक आठ भागों में; अमृत, शुभ, लाभ शुभ; चर सामान्य; रोग, काल, उद्वेग त्याज्य।
दिन का चौघड़िया
- अमृतअनुकूल06:45 – 08:05
- कालत्याज्य08:05 – 09:25
- शुभअनुकूल09:25 – 10:45
- रोगत्याज्य10:45 – 12:05
- उद्वेगत्याज्य12:05 – 13:26
- चरसामान्य13:26 – 14:46
- लाभअनुकूल14:46 – 16:06
- अमृतअनुकूल16:06 – 17:26
रात का चौघड़िया
- चरसामान्य17:26 – 19:06
- रोगत्याज्य19:06 – 20:46
- कालत्याज्य20:46 – 22:26
- लाभअनुकूल22:26 – 00:06
- उद्वेगत्याज्य00:06 – 01:46
- शुभअनुकूल01:46 – 03:26
- अमृतअनुकूल03:26 – 05:06
- चरसामान्य05:06 – 06:46
होरा
हर होरा का स्वामी ग्रह और आरंभ समय।
दिन की होरा
- चंद्र06:45
- शनि07:38
- गुरु08:32
- मंगल09:25
- सूर्य10:19
- शुक्र11:12
- बुध12:05
- चंद्र12:59
- शनि13:52
- गुरु14:46
- मंगल15:39
- सूर्य16:33
रात की होरा
- शुक्र17:26
- बुध18:33
- चंद्र19:39
- शनि20:46
- गुरु21:53
- मंगल22:59
- सूर्य00:06
- शुक्र01:12
- बुध02:19
- चंद्र03:26
- शनि04:32
- गुरु05:39
17 नवंबर 2025, नई दिल्ली (28.62, 77.21), समय क्षेत्र Asia/Kolkata। सूर्योदय: ऊपरी किनारा, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। अमृत काल और वर्ज्य नहीं दिए गए — उनकी घटी-तालिकाएँ स्रोतों में भिन्न हैं।
17 नवंबर 2025: प्रश्न
17 नवंबर 2025 को कौन सी तिथि है?
17 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय कृष्ण त्रयोदशी तिथि (कृष्ण पक्ष) है, 18 नवंबर, 07:12 तक। माह कार्तिक (अमांत) / मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)।
17 नवंबर 2025 को कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय के समय चित्रा नक्षत्र, 18 नवंबर, 05:01 तक; फिर स्वाति।
17 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में राहु काल कब है?
08:05 से 09:25 तक। यमगंड 10:45–12:05 और गुलिक 13:26–14:46।
17 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय 06:45 और सूर्यास्त 17:26 पर — सूर्य का ऊपरी किनारा, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित; यही परिपाटी भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) और दृक पंचांग की है। जो पंचांग सूर्य के केंद्र का समय बिना अपवर्तन के छापते हैं, उनमें सूर्योदय लगभग 3–4 मिनट बाद और सूर्यास्त उतना ही पहले होता है।
17 नवंबर 2025 को कोई व्रत या पर्व है?
सोम प्रदोष: त्रयोदशी जो प्रदोष काल (सूर्यास्त से रात्रि का पाँचवाँ भाग) में हो; दोनों दिन हो तो जिस दिन अधिक।
ये समय नई दिल्ली के हैं। इसी तारीख का पंचांग किसी और शहर के लिए: पंचांग खोज। शुभ कार्य का समय चाहिए? मुहूर्त खोजें.
पंचांग पढ़ना
- तिथि
- चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12° का अंतर एक तिथि है — एक चांद्र मास में 30 तिथियाँ, शुक्ल और कृष्ण पक्ष में 15-15। दिन की तिथि वह मानी जाती है जो सूर्योदय के समय चल रही हो; कभी एक तिथि सूर्योदय को छूती ही नहीं (क्षय) और कभी दो सूर्योदयों तक रहती है (वृद्धि)।
- नक्षत्र
- राशिचक्र के 27 बराबर भाग, हर एक 13°20′ का। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है। मुहूर्त और नामकरण में नक्षत्र सबसे अधिक देखा जाता है।
- योग
- सूर्य और चंद्रमा के निरयण अंशों का योग, 13°20′ के 27 भागों में। विष्कुंभ से वैधृति तक; व्यतीपात और वैधृति को शुभ कार्यों में टाला जाता है।
- करण
- तिथि का आधा भाग — एक दिन में प्रायः दो करण। विष्टि (भद्रा) करण में शुभ कार्य नहीं किए जाते।
- वार
- हिंदू वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से नहीं।
- राहु काल, यमगंड, गुलिक
- दिन के प्रकाश को आठ भागों में बाँटकर, वार के अनुसार एक-एक भाग। नया कार्य आरंभ करने के लिए इन्हें परंपरा में टाला जाता है; रोज़मर्रा का काम चलता रहता है।
- चौघड़िया और होरा
- चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है; होरा हर घंटे (दिन के बारहवें भाग) का स्वामी ग्रह बताती है। व्यापार और यात्रा के लिए इनका उपयोग आम है।
सारी गणना हमारा अपना इंजन करता है (VSOP87 / ELP, लाहिड़ी अयनांश), स्विस एफ़ेमेरिस से मिलाकर जाँचा गया; तिथि-नक्षत्र के समाप्ति समय लगभग 2 मिनट तक सटीक।