सपने में बंदर देखने के परंपरा में दो तरह के अर्थ मिलते हैं: शांत बैठा बंदर हनुमान जी से जुड़ाव के कारण शुभ माना जाता है, जबकि उछलता-झपटता बंदर कई सूचियों में बेकार के झगड़े या चंचल मन का संकेत है। यह मान्यता है, भविष्यवाणी नहीं।
बंदर और भारतीय कथाएँ
रामायण में वानर सेना ने समुद्र पर सेतु बाँधा, और हनुमान जी — जो ख़ुद वानर रूप में हैं — भक्ति और बल के सबसे बड़े प्रतीक बने। मंगलवार को बहुत से लोग बंदरों को चना-गुड़ खिलाते हैं। दूसरी ओर रोज़ के जीवन में बंदर छत से कपड़े उठा ले जाने, फल छीनने और शरारत करने वाला जानवर भी है। "बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद" और "बंदर के हाथ में उस्तरा" जैसी कहावतें इसी चंचलता से बनीं। यही दो छवियाँ सपनों के अर्थ में भी चलती हैं।
सपने के अलग रूप
| सपने में क्या दिखा | लोक-मान्यता में अर्थ |
|---|---|
| शांत बैठा या आशीर्वाद देता बंदर | हनुमान जी की कृपा का भाव, हिम्मत |
| उछलता-कूदता बंदर | मन की बेचैनी, ध्यान भटकना |
| बंदर का सामान छीनना | किसी की चालाकी से छोटा नुक़सान होने की चिंता |
| बंदर का काटना या नोचना | दोस्त या पड़ोसी से कहा-सुनी |
| बंदर का पीछा करना | किसी झंझट से पीछा न छूटने की भावना |
| बंदरों का झुंड | भीड़, शोर, कई काम एक साथ |
| बंदर को खाना खिलाना | दया और भक्ति का भाव |
मनोविज्ञान क्या कहता है
बंदर का व्यवहार इंसानों से बहुत मिलता है, इसलिए सपनों में वह अक्सर हमारे ही स्वभाव का आईना बनता है। ध्यान-परंपरा में "मंकी माइंड" (बंदर जैसा मन) शब्द उस मन के लिए है जो एक विचार से दूसरे पर कूदता रहता है। अगर आप इन दिनों बहुत सारी बातों में उलझे हैं, नींद पूरी नहीं हो रही, या फ़ोन पर घंटों बीत रहे हैं, तो उछलता बंदर उसी बेचैनी की तस्वीर हो सकता है। शहरों में जहाँ बंदर सचमुच परेशान करते हैं, वहाँ यह सपना सीधे दिन के अनुभव से भी आता है।
एक शांत सलाह
अगर सपना बेचैनी भरा था, तो सोने से पहले थोड़ी देर फ़ोन से दूर रहें और मन को एक काम पर टिकाने की कोशिश करें। अगर बंदर शांत था और मन को अच्छा लगा, तो उसे उसी भाव से रखें। किसी उपाय की ज़रूरत नहीं।
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