सपने में छिपकली देखने को उत्तर भारत की ज़्यादातर लोक-सूचियाँ हल्की चेतावनी की तरह पढ़ती हैं — किसी की चालाकी या घर में छोटी खटपट की चिंता — जबकि दक्षिण भारत में छिपकली को कई जगह शुभ और "आगे की बात बताने वाली" माना जाता है। यह मान्यता है, भविष्यवाणी नहीं।
छिपकली और परंपरा
छिपकली भारतीय घरों की सबसे आम साथी है — ट्यूबलाइट के पास कीड़े पकड़ती हुई। दक्षिण भारत में "गौली शास्त्र" नाम की पूरी परंपरा है, जिसमें छिपकली के बोलने की दिशा और शरीर के किस अंग पर गिरी, इससे फल बताए जाते हैं (इस पर हमारा अलग पृष्ठ है: छिपकली का गिरना)। कांचीपुरम के वरदराज पेरुमल मंदिर में सोने-चाँदी की छिपकली को छूने की परंपरा भी है। उत्तर भारत में वही छिपकली दीपावली की रात दिखे तो शुभ मानी जाती है, पर बाक़ी समय उसे कई लोग घिन या हल्के अपशकुन से जोड़ते हैं।
सपने के अलग रूप
| सपने में क्या दिखा | लोक-मान्यता में अर्थ |
|---|---|
| दीवार पर चलती छिपकली | किसी बात पर नज़र रखने की ज़रूरत |
| छिपकली का शरीर पर गिरना | कोई अचानक ख़बर |
| छिपकली कीड़ा पकड़ती हुई | किसी मौक़े को लपक लेना |
| दो छिपकलियाँ लड़ती हुई | घर में छोटा झगड़ा या बहस |
| छिपकली को मारना | किसी परेशानी पर जीत |
| मरी हुई छिपकली | किसी चिंता का ख़त्म होना (कुछ सूचियों में) |
| छिपकली की कटी पूँछ | कुछ छोड़कर आगे बढ़ना |
मनोविज्ञान क्या कहता है
छिपकली के साथ ज़्यादातर लोगों का रिश्ता हल्की घिन और चौंकने का होता है — वह अचानक दिखती है, तेज़ भागती है। सपनों में वह अक्सर किसी ऐसी चीज़ का प्रतीक बनती है जो आपको खटकती है पर ख़तरनाक नहीं — कोई चुभती बात, कोई असहज रिश्ता। छिपकली की पूँछ टूटकर फिर उग आती है, और यह छवि कुछ पीछे छोड़कर बच निकलने की भावना से भी जुड़ती है। अगर हाल में घर में छिपकली देखी या उससे चौंके, तो सपना सीधे वहीं से आया हो सकता है।
एक शांत बात
छिपकली का सपना डरने की चीज़ नहीं। अगर मन में कोई छोटी-सी खटक है, तो उसे पहचानकर सीधे बात कर लेना सबसे अच्छा रास्ता है।
आगे पढ़ें
सपने में चूहा, सपने में बिच्छू और सपने में साँप भी पढ़ें, या सपनों के अर्थ की पूरी सूची देखें।