शरीर पर छिपकली गिरने का अर्थ सबसे विस्तार से दक्षिण भारत के गौली शास्त्र में मिलता है, जहाँ सिर, माथे, कंधे, हाथ और पैर — हर अंग के लिए अलग शुभ-अशुभ फल बताया गया है। ये लोक-परंपरा की सूचियाँ हैं, जो इलाक़े के हिसाब से एक-दूसरे से बहुत अलग हैं; छिपकली गिरने से आपका भविष्य तय नहीं होता।
परंपरा क्या कहती है
तमिलनाडु में इसे "पल्ली विऴुम् पलन्" और तेलुगु इलाक़ों में "बल्ली शास्त्रम्" कहते हैं। पंचांगों और छोटी पुस्तिकाओं में इसकी पूरी तालिका छपती है, जिसमें पुरुष और स्त्री के लिए दाएँ-बाएँ अंग के फल अलग-अलग दिए जाते हैं — ठीक वैसे ही जैसे आँख फड़कने की मान्यता में।
एक आम सूची में मिलने वाले कुछ फल (दूसरी सूचियों में ये उलट भी हो सकते हैं):
| अंग | प्रचलित मान्यता |
|---|---|
| सिर | कहीं झगड़े या चिंता का संकेत, कहीं मान-सम्मान |
| माथा | किसी अपने से मिलना या शुभ समाचार |
| दायाँ कंधा या दायाँ हाथ | विजय, लाभ या काम में सफलता |
| बायाँ हाथ | कई सूचियों में छोटा नुक़सान या ख़र्च |
| पेट या नाभि | गहने, अनाज या धन मिलने की मान्यता |
| पैर | यात्रा का योग |
कुछ सूचियों में कुछ अंगों के लिए डरावने फल भी लिखे हैं; हम उन्हें यहाँ नहीं दोहरा रहे, क्योंकि उनका कोई आधार नहीं और वे बेवजह डर फैलाते हैं।
छिपकली की आवाज़
केरल और दक्षिण भारत में एक और प्यारी मान्यता है: कोई बात कही जाए और उसी पल छिपकली "टिक-टिक" कर दे, तो माना जाता है कि बात सच है। उत्तर भारत में दीपावली की रात घर में छिपकली दिखना कई जगह लक्ष्मी के आने जैसा शुभ समझा जाता है।
यह मान्यता कहाँ से आई
घर की दीवारों पर हमेशा रहने वाला यह जीव अचानक किसी पर गिर जाए तो चौंकना स्वाभाविक है, और हर चौंकाने वाली घटना को संकेत मानने की पुरानी आदत ने इसे एक पूरे "शास्त्र" में बदल दिया। कांचीपुरम के वरदराज पेरुमाल मंदिर में छत पर बनी सोने और चाँदी की छिपकलियों को छूने की परंपरा है — मान्यता है कि इससे छिपकली गिरने का दोष दूर होता है। यह आस्था की बात है; दोष से डरने की ज़रूरत पहले ही नहीं है।
दूसरी संस्कृतियों में भी छिपकली को संकेत माना गया है — दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में गेको की आवाज़ गिनकर शुभ-अशुभ बताने की परंपरा है।
छिपकली असल में क्यों गिरती है
घरेलू छिपकली (हाउस गेको) के पंजों में लाखों बहुत बारीक रोएँ होते हैं, जो दीवार और छत से चिपकने में मदद करते हैं। वह गिरती तब है जब:
- बल्ब या ट्यूबलाइट के पास कीड़े पर झपटते हुए संतुलन बिगड़ जाए,
- छत पर धूल, नमी या चिकनाई हो,
- ठंड में उसकी फुर्ती कम हो जाए,
- पंखे की हवा या किसी हलचल से वह डर जाए।
भारत की घरेलू छिपकली ज़हरीली नहीं होती। वह मच्छर और कीड़े खाकर घर को फ़ायदा ही पहुँचाती है।
छिपकली गिर जाए तो
घबराइए नहीं। त्वचा को साबुन-पानी से धो लीजिए, और अगर वह खाने में गिरी हो तो वह खाना फेंक दीजिए। खाने के बाद उलटी, दस्त या बेचैनी हो तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाइए। किसी पूजा या उपाय की ज़रूरत नहीं।
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