लोक-मान्यता में रात को कुत्ते का रोना, यानी लंबी आवाज़ में हूकना, अशुभ माना जाता है, और कई लोग इसे किसी अनहोनी का संकेत समझकर घबरा जाते हैं। यह केवल एक पुरानी मान्यता है — कुत्ते के रोने से किसी का बुरा नहीं होता, और इसके पीछे लगभग हमेशा कोई सीधा-सादा कारण होता है।
परंपरा क्या कहती है
गाँवों और क़स्बों में आज भी रात को कुत्ता रोए तो बड़े-बूढ़े उसे भगाने को कहते हैं। पुरानी मान्यता यह है कि कुत्ते वह देख लेते हैं जो इंसान की आँख नहीं देख पाती, इसलिए उनके रोने को किसी बीमारी, विपत्ति या बुरी ख़बर से जोड़ दिया गया। यह डरावनी बात है, इसलिए साफ़ कह दें: इस मान्यता का कोई आधार नहीं है, और किसी कुत्ते के रोने को चेतावनी मानने की ज़रूरत नहीं।
इस मान्यता के कुछ आम रूप:
| स्थिति | प्रचलित मान्यता |
|---|---|
| आधी रात को घर के सामने रोए | सबसे अशुभ माना जाता है |
| आसमान की ओर मुँह करके रोए | कुछ सूचियों में अनहोनी का संकेत |
| ज़मीन सूँघते हुए रोए | कहीं-कहीं धन मिलने या खोई चीज़ मिलने की मान्यता |
| दिन में रोए | कम महत्व, कई जगह कोई अर्थ नहीं |
| कई कुत्ते साथ में रोएँ | मौसम बदलने या किसी हलचल की मान्यता |
दिलचस्प यह है कि वही परंपरा कुत्ते को बहुत सम्मान भी देती है। कुत्ता भैरव बाबा का वाहन माना जाता है, कई घरों में पहली रोटी गाय की और आख़िरी कुत्ते की निकाली जाती है, और नेपाल में तिहार के दौरान कुकुर तिहार पर कुत्तों को माला पहनाकर पूजा जाता है।
यह मान्यता कहाँ से आई
पुराने समय में रात में घर के आसपास की हर आवाज़ पर ध्यान रहता था। कुत्ते अक्सर किसी बीमार जानवर, जंगली जानवर या अजनबी को भाँपकर शोर करते थे, और जिस रात घर में कोई बीमार होता, उसी रात कुत्ते का रोना याद रह जाता। धीरे-धीरे दोनों बातें जुड़ गईं।
यह मान्यता केवल भारत की नहीं है। इंग्लैंड, आयरलैंड और यूरोप के कई हिस्सों की लोक-कथाओं में भी रात को कुत्ते का हूकना बुरी ख़बर से जोड़ा गया। अलग-अलग देशों में एक-सी मान्यता यह बताती है कि रात का अँधेरा और एक उदास-सी आवाज़ हर जगह इंसान के मन में डर जगाती है।
कुत्ते असल में क्यों रोते हैं
कुत्ते भेड़ियों के वंशज हैं, और हूकना उनकी पुरानी भाषा है। आम कारण:
- सायरन और ऊँची आवाज़ें: एंबुलेंस, पुलिस गाड़ी, प्रेशर हॉर्न, शंख या कुछ संगीत — ऊँची, खिंची हुई आवाज़ उन्हें दूसरे कुत्ते की पुकार जैसी लगती है।
- दूसरे कुत्तों का जवाब: एक कुत्ता हूके तो मोहल्ले के बाक़ी भी साथ देने लगते हैं; यह इलाक़े और झुंड की बातचीत है।
- अकेलापन: पालतू कुत्ता अकेला छूट जाए, या परिवार का कोई सदस्य बाहर गया हो, तो वह बेचैनी में रोता है।
- दर्द या बीमारी: चोट, पेट दर्द या बुढ़ापे की तकलीफ़ में भी कुत्ते कराहते और हूकते हैं।
- ठंड, भूख या डर: सर्दी की रातों में और पटाख़ों के दिनों में आवारा कुत्ते ज़्यादा रोते हैं।
रात में शहर शांत होता है, इसलिए यही आवाज़ दूर तक और ज़्यादा उदास सुनाई देती है।
कुत्ता रोए तो क्या करें
डरने के बजाय कुत्ते को देखें। पालतू हो तो जाँचें कि कहीं चोट या दर्द तो नहीं; लगातार कई दिन रोए तो पशु-चिकित्सक को दिखाएँ। आवारा कुत्ता हो तो उसे पत्थर मारकर न भगाएँ — पानी रख दें, और घायल लगे तो किसी पशु-कल्याण संस्था को ख़बर करें। कोई टोटका या पूजा ज़रूरी नहीं।
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