मुख्य सामग्री पर जाएँ
सतमार्ग ज्योतिषSatmarg Astro

शकुन शास्त्र · पशु-पक्षी

घर में चींटियाँ आना: काली और लाल चींटी की मान्यता

घर में चींटियाँ आना शुभ है या अशुभ? काली और लाल चींटियों की लोक-मान्यता, अंडे ले जाती चींटियाँ और बारिश, और चींटियाँ असल में घर में क्यों आती हैं।

  • सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम
  • अद्यतन
  • 3 मिनट में पढ़ें

ये पुरानी शकुन मान्यताएँ हैं, मान्यता के रूप में बताई गई हैं, और साथ में रोज़मर्रा का कारण भी। कोई शकुन यह तय नहीं करता कि आपके साथ क्या होगा, और किसी के लिए पैसे वाले उपाय की ज़रूरत नहीं।

इस पृष्ठ पर

लोक-मान्यता है कि घर में काली चींटियों का आना शुभ और बरकत का संकेत है, जबकि लाल चींटियाँ झगड़े या ख़र्च की ओर इशारा करती हैं। यह घर-गृहस्थी की एक पुरानी मान्यता है, कोई भविष्यवाणी नहीं — चींटियाँ ज़्यादातर मीठे, नमी या मौसम के कारण आती हैं।

परंपरा क्या कहती है

चींटी हमारे यहाँ मेहनत और धीरज की मिसाल है। कई घरों में सुबह चींटियों के बिल के पास आटा और चीनी डाली जाती है, और जैन परंपरा में चींटी जैसे छोटे जीव को भी न सताने पर ख़ास ज़ोर है। इसलिए चींटियों का घर में आना अक्सर बुरा नहीं, अच्छा माना गया।

आम मान्यताएँ, जो इलाक़े के हिसाब से थोड़ी बदलती हैं:

स्थितिप्रचलित मान्यता
काली चींटियाँ कतार में आएँधन या बरकत आने का संकेत
चावल या अनाज के डिब्बे से निकलेंघर में अनाज बढ़ने की मान्यता
लाल चींटियाँ आएँकुछ सूचियों में झगड़ा, ख़र्च या कोई परेशानी
चींटियाँ अंडे लेकर ऊँची जगह जाएँजल्दी बारिश होने की मान्यता
छत या ऊपर की ओर से आएँकहीं-कहीं ऊँचे पद या लाभ का संकेत
उड़ने वाली चींटियाँ निकलेंबारिश का मौसम आने का संकेत

"चींटी के पर निकलना"

हिंदी में मुहावरा है — "चींटी के पर निकल आए हैं", यानी किसी का घमंड बढ़ गया है और अब उसका पतन क़रीब है। यह मुहावरा बारिश के दिनों में निकलने वाली पंखदार चींटियों को देखकर बना, जो कुछ ही समय में पंख गिराकर ज़मीन पर आ जाती हैं। यह घमंड पर एक कहावत है, किसी घर के लिए शकुन नहीं।

यह मान्यता कहाँ से आई

खेती वाले समाज में चींटियाँ मौसम की घड़ी थीं। किसान देखते थे कि बारिश से पहले चींटियाँ अंडे उठाकर ऊँची जगह जाती हैं, और गोदाम में चींटियाँ आएँ तो समझते थे कि अनाज भरा है — यानी चींटी और बरकत का रिश्ता वहीं से बना। लाल चींटी काटती है और दर्द देती है, इसलिए उसे परेशानी से जोड़ना स्वाभाविक था।

दूसरी संस्कृतियों में भी चींटी मेहनत का प्रतीक है — ईसप की "चींटी और टिड्डा" कहानी में चींटी जाड़े के लिए दाना जमा करती है, और बाइबिल की नीति-वचनों में आलसी को चींटी से सीखने की सलाह दी गई है।

चींटियाँ असल में क्यों आती हैं

एक चींटी को खाना मिल जाए तो वह लौटते हुए ज़मीन पर एक गंध की लकीर (फ़ेरोमोन) छोड़ती है, और बाक़ी चींटियाँ उसी पर चलकर कतार बना लेती हैं। घर में चींटियों के आम कारण:

  • मीठा, तेल या खाने के कण खुले रह जाना,
  • रसोई या बाथरूम में नमी और रिसाव,
  • बारिश में बिल में पानी भर जाना, जिससे वे सूखी जगह खोजती हैं,
  • गर्मी में पानी की तलाश।

चींटियाँ दिखें तो

खाना ढककर रखें, कतार को साबुन-पानी या सिरके से पोंछ दें ताकि गंध की लकीर मिट जाए, और रिसाव ठीक करवाएँ। लाल चींटी काट ले तो ठंडा पानी लगाएँ; सूजन बहुत बढ़े या साँस लेने में तकलीफ़ हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ। किसी उपाय की ज़रूरत नहीं।

आगे पढ़ें

छिपकली का गिरना, घर में चिड़िया का घोंसला और सपने में चींटी देखना भी पढ़ें, या शकुन-अपशकुन की पूरी सूची देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घर में काली चींटियाँ आना शुभ है या अशुभ?

लोक-मान्यता में काली चींटियों का आना शुभ और घर में बरकत का संकेत माना जाता है। यह केवल मान्यता है; चींटियाँ आमतौर पर खाने की महक या नमी के पीछे आती हैं।

लाल चींटियाँ आना क्या दर्शाता है?

कई जगह लाल चींटियों को झगड़े, ख़र्च या परेशानी का संकेत माना जाता है, पर इसका कोई आधार नहीं। लाल चींटियाँ काटती हैं, इसलिए उनसे बचना व्यावहारिक समझदारी है, शकुन नहीं।

चींटियाँ अंडे लेकर जाएँ तो क्या बारिश आती है?

गाँवों की यह मान्यता काफ़ी हद तक अनुभव पर आधारित है — नमी बढ़ने और बिल में पानी भरने के डर से चींटियाँ अक्सर बारिश से पहले ऊँची जगह की ओर चलती हैं। पर यह पक्का मौसम-पूर्वानुमान नहीं है।

इनसे जुड़े पृष्ठ

आगे पढ़ें

स्रोत

  • उत्तर भारत की लोक-परंपरा और शकुन-मान्यताएँ
  • जैन और हिंदू घरों में चींटियों को आटा डालने की रीति
  • चींटियों के व्यवहार पर कीट-विज्ञान की सामान्य जानकारी

यह पृष्ठ सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम ने लिखा है। हम परंपरा को परंपरा के रूप में बताते हैं, जहाँ सूचियाँ आपस में भिन्न हैं वहाँ यह कहते हैं, और साथ में आज की समझ भी रखते हैं। यह चिकित्सकीय, विधिक या वित्तीय सलाह नहीं है। हमारी पद्धति