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एकादशी · 2027

निर्जला एकादशी 2027 — सोमवार, 14 जून 2027

निर्जला एकादशी सोमवार, 14 जून 2027 को है (नई दिल्ली)। पारण 15 जून को 13:45 – 16:32 के बीच।

नई दिल्ली के लिए गणना

सोमवार, 14 जून 2027

तिथि
शुक्ल एकादशी: 14 जून, 02:12 – 15 जून, 02:08
चांद्र मास
ज्येष्ठ
सूर्योदय / सूर्यास्त
05:22 / 19:19
अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले)
03:46
हरि वासर समाप्त
15 जून, 08:14
मुहूर्त और काल
पारण (व्रत खोलने का समय)15 जून, 13:45 – 15 जून, 16:32
  • वैष्णव एकादशी: 15 जून 2027

नियम: स्मार्त नियम: सूर्योदय के समय एकादशी वाला दिन, अगली सुबह पारण के लिए द्वादशी रहे।

स्मार्त और वैष्णव

इस बार दिन अलग हैं। 14 जून 2027 को अरुणोदय (03:46) के समय दशमी चल रही है, और एकादशी 02:12 पर शुरू होती है। स्मार्त (गृहस्थ) परंपरा सूर्योदय की एकादशी देखती है और व्रत 14 जून 2027 को रखती है; वैष्णव (इस्कॉन आदि) परंपरा दशमी-विद्धा दिन छोड़कर व्रत मंगलवार, 15 जून 2027 को रखती है।

वैष्णव दिन केवल अरुणोदय वाले सरल नियम से है; इस्कॉन अपना कैलेंडर अपने स्थान के लिए बनाता है, इसलिए अपने मंदिर से मिला लें।

पारण कैसे तय हुआ

व्रत अगले दिन द्वादशी में खोला जाता है — हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो 08:14 पर समाप्त होता है) के बाद, हो सके तो प्रातः काल में, और मध्याह्न से बचते हुए। द्वादशी रहते पारण न हो तो उसका पुण्य कम माना जाता है।

सभी समय हमारे अपने इंजन से, नई दिल्ली के सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय पर। दूसरे शहर में समय कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी दिन भी। अपने शहर का पंचांग

निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी ज्येष्ठ के शुक्ल पक्ष में आती है और परंपरा में सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक बिना भोजन और बिना पानी रखी जाती है; निर्जला का अर्थ ही है “बिना जल”। माना जाता है कि इसे रखने से साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य मिलता है। यह सबसे गर्म दिनों में आती है, इसलिए दूसरों को जल, घड़े, पंखे और फल देना भी इस दिन का उतना ही हिस्सा है जितना व्रत। भीषण गर्मी में बिना पानी का व्रत शरीर पर भारी पड़ता है; बुज़ुर्ग, गर्भवती, मधुमेह के रोगी या दवा लेने वाले पानी पिएँ या हल्का व्रत रखें।

अन्य नाम: भीमसेनी एकादशी, पांडव एकादशी

व्रत कथा

पांडवों में भीम के लिए उपवास सबसे कठिन था, क्योंकि उनकी भूख उनके बल जितनी ही बड़ी थी, और वे महीने में दो बार एकादशी नहीं रख पाते थे। उन्होंने व्यास मुनि से उपाय पूछा। व्यास जी ने कहा कि वे केवल ज्येष्ठ की एक एकादशी बिना जल के रखें, उसी से बाकी सबका पुण्य मिल जाएगा। भीम ने यह व्रत रखा, और तब से इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं।

कथा का सार, पद्म पुराण और भविष्योत्तर पुराण के एकादशी माहात्म्य से।

एकादशी कैसे रखें

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक चलता है। बहुत से लोग दशमी की शाम, व्रत शुरू होने से पहले, एक बार सादा और सात्विक भोजन करते हैं।
  • परंपरा में अन्न और दालें, खासकर चावल, नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, मेवे और फलाहार — साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू — आम तौर पर लिए जाते हैं; हर परिवार का रिवाज थोड़ा अलग होता है।
  • व्रत के कई स्तर हैं: निर्जला (बिना पानी), फलाहार (फल और दूध), या बिना अन्न का एक समय भोजन। जो आपके शरीर के अनुकूल हो, वही चुनें; सबके लिए एक ही नियम ज़रूरी नहीं है।
  • दिन भगवान विष्णु की पूजा में बीतता है: तुलसी, दीपक, विष्णु सहस्रनाम या ओम नमो भगवते वासुदेवाय जैसा मंत्र, और उस एकादशी की कथा। तुलसी के पत्ते प्रायः एक दिन पहले तोड़ लिए जाते हैं, क्योंकि बहुत से लोग एकादशी पर तुलसी नहीं तोड़ते।
  • कुछ लोग रात में भजन-कीर्तन के साथ जागरण करते हैं, और बहुत से लोग अन्न या भोजन का दान करते हैं।
  • पारण द्वादशी को सूची में दिए समय के भीतर होता है: हरि वासर के बाद, हो सके तो सुबह के समय, और द्वादशी समाप्त होने से पहले। व्रत प्रायः किसी हल्की चीज़ से, अक्सर थोड़ा तुलसी-जल लेकर खोला जाता है।
  • गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, बुज़ुर्ग, मधुमेह के रोगी, नियमित दवा लेने वाले या अस्वस्थ लोग हल्का व्रत रख सकते हैं — फल और दूध, या एक समय भोजन — या केवल पूजा-पाठ से दिन मना सकते हैं। कोई बीमारी हो तो व्रत से पहले डॉक्टर से पूछ लें।

एकादशी: पूरी जानकारी और सभी तिथियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्जला एकादशी 2027 कब है?

निर्जला एकादशी सोमवार, 14 जून 2027 को है (नई दिल्ली)। शुक्ल एकादशी तिथि 14 जून, 02:12 – 15 जून, 02:08 तक रहती है।

निर्जला एकादशी का पारण कब है?

पारण मंगलवार, 15 जून 2027 को 13:45 – 16:32 के बीच, हरि वासर के बाद और द्वादशी रहते।

क्या वैष्णव निर्जला एकादशी अलग दिन है?

हाँ। 14 जून 2027 को अरुणोदय के समय दशमी चल रही है, इसलिए वैष्णव परंपरा में व्रत मंगलवार, 15 जून 2027 को रखा जाता है।